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  • दो मुक्तक

    दो मुक्तक

    बसे नयनो में नीरज के, मिलो दीदार कर लेंगे। नयन भर कर निहारेंगे, तुम्हे स्वीकार कर लेंगे। तुम्हे है चाहते लाखो, मैं धड़कन सैकड़ो की हूँ, करो इकरार या इनकार तुमसे प्यार कर लेंगे।। कलेजा चीर...


  • ग्रीष्मावकाश

    ग्रीष्मावकाश

    बन्द हुए स्कूल गली में बच्चे खेले खेल। आगे पीछे दौड़ रहे है छुक छुक करती रेल। भरी दुपहरी तपती धरती इनको नही सताती। जोर जोर आवाज लगाकर मम्मी रोज बुलाती। पल पल में झगड़े करते...


  • बचपन के खेल

    बचपन के खेल

    बन्द हुए स्कूल गली में बच्चे खेले खेल। आगे पीछे दौड़ रहे है छुक छुक करती रेल। भरी दुपहरी तपती धरती इनको नही सताती। जोर जोर आवाज लगाकर मम्मी रोज बुलाती। पल पल में झगड़े करते...

  • माँ सरस्वती वन्दना

    माँ सरस्वती वन्दना

    मेरी लेखनी का जादू संसार पर चला दो। अनुपम अमित अलौकिक साहित्य से मिला दो।। छन्दों के दोष सारे माँ छार छार कर दो, सब लोग गुनगुनाये हमको निहाल कर दो।। ~ दोहे~ वीणा वादिनि शारदे...

  • गीत : माँ

    गीत : माँ

    मेरे बचपन में मेंरी माँ मुझको खूब खिलाती थी। सच्ची झूठी कथा कहानी मुझको रोज सुनाती थी। मेरे बस्ते में केला अमरुद कतलिया सत्तू की, पापकार्न मुम्फली खिलाकर के हरदम हर्षाती थी।। अम्मा जरा देख तो...