गीतिका/ग़ज़ल

मुस्कान

उसकी मुस्कान पर ये दिल मचल गया साहिब, जैसे अंधियार में कोई चिराग जल गया साहिब।। उसके दुपट्टे ने मेरी घड़ी छुई जब से, तब से वक्त अपना भी बदल गया साहिब।। घर के आइने ने ये बात कही है मुझसे, जादू किसी का तेरे रुख पे चल गया साहिब।। कड़ा होकर के तूफ़ान से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल : खुद को बदनाम

खुद को बदनाम कर रही है वो, इश्क़ सरेआम कर रही है वो।। खुद भी राधा कि तरह सजकर के, मुझको भी श्याम कर रही है वो।। हिचकियाँ आकर कह रही मुझसे, याद सुबह शाम कर रही है वो।। मेरी धड़कनों रुक रुक के चलो, दिल में आराम कर रही है वो।। — नीरज पांडेय

कविता

कविता

घने अँधियार में जैसे कोई जुगनू चमकता है, भरे बाजार में वैसी हमारी एक सलोनी है। लबों पर सजके बैठे है मोहब्बत के तराने सब, आज की रात में उससे हमारी बात होनी है। लगा है खुशियों का मेला मेरे दिल के घराने पर, जैसे राजा के महलों में कोई बारात होनी है…!

कविता

माँ का ही अवतार है हिन्दी

भारत का श्रृंगार है हिन्दी, हम सब का संस्कार है हिन्दी, हर बेटे का प्यार है हिन्दी, माँ का ही अवतार है हिन्दी। रामायण का विस्तार है हिन्दी, गीता के पावन सार है हिन्दी, माँ गंगा की धार है हिन्दी, माँ का ही अवतार है हिन्दी। युद्धों में ललकार है हिन्दी, योद्धा की तलवार है […]

मुक्तक/दोहा

माँ को नमन

“काश मुझसे भी कोई ऐसा जतन हो जाये कि मेरे प्यारे वतन का मन मगन हो जाये सर झुका दूँ मैं भारत की पावन माटी पर फिर देश की हर माँ को नमन हो जाये…! वन्देमातरम् जय हिन्द जय माँ भारती। (:: नीरज पान्डेय ::)

कविता

हे ! भारत के वीर सपूतो

हे ! भारत के वीर सपूतों तुम वतन के सच्चे यार बनो चाँद के जैसे रौशन हो और नभ के एक एक तार बनो सारी दुनिया देख रही है सिर्फ तुम्हारे मस्तक को उठो बहादुर पढ़ो लिखो भारत की जय जयकार बनो..! गीत बनो संगीत बनो तुम महाकाव्य की धार बनो रफ़ी साब की नाव […]

कविता

” वो बेटी ही तो है “

“कल घर के आँगन में खेलती थी, आज आँखों के आँगन में आ जाती है। वो बेटी ही तो है जो एक छत और कुछ दीवारों को घर बना जाती है।। मैं अपनी कलाई की देखकर राखी, यही देर रात तक सोचता रहा, वो बेटी ही तो है जो आदमी को भाई, पिता, पति-परमेश्वर बना […]

कविता

एक भोली भाली लड़की

एक भोली भाली लडकी का अद्भुत, अनुपम दीदार हुआ, सुंदरता का वर्णन ऐसा कंचन सा श्रृंगार हुआ, आँखें जिसकी शर्मीली एक तिल भरा रुख़्शार हुआ, हमको बस कुछ पल में उनसे थोड़ा थोड़ा प्यार हुआ। एक भोली भाली लड़की का………………. मिलन हुआ जब उनसे मेरा वो दूर का रिश्तेदार हुआ, पल दो पल का प्यार […]

कविता

“आकाश की परी मेरे घर उतर गई”

“ये जिंदगी भी मेरी अचानक मँचल गई, ये उम्र चारू चेहरें की खातिर फिसल गई, मुझको तो उसकी आँखों ने मदहोश कर दिया, नशा प्यार का देकर मेरी जाना किधर गई। फिर जिंदगी भी मेरी अचानक सँवर गई, सूरज की किरणें खुशियाँ बनकर बिखर गई, मेरी जान वो नादान को ढूँढा कहाँ कहाँ, वो आकाश […]

कविता

“ना जमीं में हूँ ना आसमां में हूँ”

“ना जमीं में हूँ ना आसमा में हूँ, तुझे छूकर जो गुजरी मैं उस हवा में हूँ। ना नफरती बाजार में हूँ ना ही किसी के गुनाह में हूँ, मैं मोहब्बत हूँ तो मोहब्बत की जुबां में हूँ। मेरे दुश्मन भी मेरा कुछ कर नहीँ सकते, मैं ईश्वर की कृपा में हूँ , बुजुर्गो की […]