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  • मुस्कान

    मुस्कान

    उसकी मुस्कान पर ये दिल मचल गया साहिब, जैसे अंधियार में कोई चिराग जल गया साहिब।। उसके दुपट्टे ने मेरी घड़ी छुई जब से, तब से वक्त अपना भी बदल गया साहिब।। घर के आइने ने...

  • ग़ज़ल : खुद को बदनाम

    ग़ज़ल : खुद को बदनाम

    खुद को बदनाम कर रही है वो, इश्क़ सरेआम कर रही है वो।। खुद भी राधा कि तरह सजकर के, मुझको भी श्याम कर रही है वो।। हिचकियाँ आकर कह रही मुझसे, याद सुबह शाम कर...

  • कविता

    कविता

    घने अँधियार में जैसे कोई जुगनू चमकता है, भरे बाजार में वैसी हमारी एक सलोनी है। लबों पर सजके बैठे है मोहब्बत के तराने सब, आज की रात में उससे हमारी बात होनी है। लगा है...


  • माँ को नमन

    माँ को नमन

    “काश मुझसे भी कोई ऐसा जतन हो जाये कि मेरे प्यारे वतन का मन मगन हो जाये सर झुका दूँ मैं भारत की पावन माटी पर फिर देश की हर माँ को नमन हो जाये…! वन्देमातरम्...



  • एक भोली भाली लड़की

    एक भोली भाली लड़की

    एक भोली भाली लडकी का अद्भुत, अनुपम दीदार हुआ, सुंदरता का वर्णन ऐसा कंचन सा श्रृंगार हुआ, आँखें जिसकी शर्मीली एक तिल भरा रुख़्शार हुआ, हमको बस कुछ पल में उनसे थोड़ा थोड़ा प्यार हुआ। एक...