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  • फिर भी नशा नही !

    फिर भी नशा नही !

    तेरा छोड़ के जाना! एक छल था । कोई हादसा नही । ये जिंदगी है अब, एक टूटा सितारा । कोई कहकशां नही । पी गया हूँ सारे मैखाने की शराब । फिर भी नशा नही...

  • जीवन जैसे – दृष्टिपटल

    जीवन जैसे – दृष्टिपटल

    मिट जाएंगे प्रतिबिम्ब, है निश्चित ! आज, अभी या कल । कितनी शलकायें, किसको सुध! जीवन जैसे – दृष्टिपटल ।। उलझन,पीड़ाएं, संघर्ष,विपदाएं । ये शब्द किसने गढ़े ! जीवन चरित्र -अलंकृत पन्ने। अंतर्मन में बिखरे पड़े...

  • बलात्कारेण

    बलात्कारेण

    तकरीबन 18-19 साल पहले की एक धुंधली याद आज मन मे फिर ताजा हो गयी । संस्कृत विषय के एक अध्याय की किसी पंक्ति में “बलात्कारेण” शब्द आता था । मेरे गुरु जी आदरणीय शास्त्री जी...

  • बरखा से गुजारिश

    बरखा से गुजारिश

    अभी राह में हूँ । ऐ बरखा! जरा थम के बरस । या लगा लेने दे, दो घूंट “मैं” के ! फिर फिक्र क्या, तू जम के बरस !! परिचय - नीरज सचान Asstt Engineer BHEL...

  • आजादी

    आजादी

    कल रात बिना प्याज लहसुन का मटन कोरमा खा कर! मटुक लाल जी गहरी निद्रा में सोए हुए थे, उनका थोथा पेट बनियान से बाहर झांककर रहम की दुहाई मांग रहा था। उनके खर्राटे की आवाज गश्त...

  • बारिश और तेरी याद

    बारिश और तेरी याद

    यूँ तो हर तरफ बारिशों का पहरा है । फिर क्यों मन ये मेरा रेत का सेहरा है ।। इतना बरस कि आँखें समंदर हों जाएं । आज ये वक्त तेरी याद पे ठहरा है ।।...

  • आग लगाता ये सावन

    आग लगाता ये सावन

    गीली धरती ,तपता मन। आग लगाता ,ये सावन।। सुगंध खोकर, खिले गुलाब। खुद से जलता,एक आफताब।। चाँद के संग बाटता, अपने दिल का सूनापन। आग लगाता, ये सावन।। हरियाली मन की, दिल है बंजर। जीवन पथ...


  • “बंद दरवाजा”

    “बंद दरवाजा”

    “बंद दरवाजा” ये कहानी नही है ! और न ही रामसे ब्रदर्स की किसी फ़ीचर फ़िल्म का एक टाइटल । “बंद दरवाजा” एक मनन है मेरे अंत:करण का । यूँ तो बीएचईएल झांसी की छोटी सी...