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  • मौत जिंदगी का अकाट सत्य !

    मौत जिंदगी का अकाट सत्य !

    आज दोपहर की धूप में पहले से कही ज्यादा तमनगी थी । सोंचा किसी सजऱ की छांव तले कुछ देर ठहर लूं ,फिर एक हूँक की कर्कश आवाज़ को सुनकर स्वतः ही मोटरसाइकिल पर ब्रेक लग...

  • मुक्तक दोहा

    मुक्तक दोहा

    पीर पथराई पिघल कर गीत बनने को विकल है, और नंगे घाव कहते हैं मुझे चादर ओढ़ाओ। जिंदगी! आधी सदी चल कर यहां तक आ गया पर, मार्ग कितना कंटकों का शेष है कुछ तो बताओ!...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रंजो-गम हैं, बहुत नफरत भी है क्या कहीं थोड़ी मुहब्बत भी है? किसी को दे सके दो पल का सुकूं तेरे लफ्जों में वो ताकत भी है? क़लम को फेंक! कटार से ही लिख क़लम की...