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  • आजादी

    आजादी

    कल रात बिना प्याज लहसुन का मटन कोरमा खा कर! मटुक लाल जी गहरी निद्रा में सोए हुए थे, उनका थोथा पेट बनियान से बाहर झांककर रहम की दुहाई मांग रहा था। उनके खर्राटे की आवाज गश्त...

  • बारिश और तेरी याद

    बारिश और तेरी याद

    यूँ तो हर तरफ बारिशों का पहरा है । फिर क्यों मन ये मेरा रेत का सेहरा है ।। इतना बरस कि आँखें समंदर हों जाएं । आज ये वक्त तेरी याद पे ठहरा है ।।...

  • आग लगाता ये सावन

    आग लगाता ये सावन

    गीली धरती ,तपता मन। आग लगाता ,ये सावन।। सुगंध खोकर, खिले गुलाब। खुद से जलता,एक आफताब।। चाँद के संग बाटता, अपने दिल का सूनापन। आग लगाता, ये सावन।। हरियाली मन की, दिल है बंजर। जीवन पथ...


  • “बंद दरवाजा”

    “बंद दरवाजा”

    “बंद दरवाजा” ये कहानी नही है ! और न ही रामसे ब्रदर्स की किसी फ़ीचर फ़िल्म का एक टाइटल । “बंद दरवाजा” एक मनन है मेरे अंत:करण का । यूँ तो बीएचईएल झांसी की छोटी सी...


  • मौत जिंदगी का अकाट सत्य !

    मौत जिंदगी का अकाट सत्य !

    आज दोपहर की धूप में पहले से कही ज्यादा तमनगी थी । सोंचा किसी सजऱ की छांव तले कुछ देर ठहर लूं ,फिर एक हूँक की कर्कश आवाज़ को सुनकर स्वतः ही मोटरसाइकिल पर ब्रेक लग...

  • मुक्तक दोहा

    मुक्तक दोहा

    पीर पथराई पिघल कर गीत बनने को विकल है, और नंगे घाव कहते हैं मुझे चादर ओढ़ाओ। जिंदगी! आधी सदी चल कर यहां तक आ गया पर, मार्ग कितना कंटकों का शेष है कुछ तो बताओ!...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    रंजो-गम हैं, बहुत नफरत भी है क्या कहीं थोड़ी मुहब्बत भी है? किसी को दे सके दो पल का सुकूं तेरे लफ्जों में वो ताकत भी है? क़लम को फेंक! कटार से ही लिख क़लम की...