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  • मेरा साया

    मेरा साया

    अपनी परछाई से मंजिल का पता पूछ रहा हूँ। भटक गया हूँ,मंजिल का निशान ढूंढ रहा हूँ।। कोई जब ना दिखा रहा था वहाँ पहुँचने की राह। तो खुद ही खुद से वहां जाने की राह...

  • गणतंत्र दिवस

    गणतंत्र दिवस

    हाथ तिरंगा लेकर गणतंत्र दिवस पर, मैं गीत देशभक्ति के गाता हूँ। देश पर शहीद हुए जो,मुझे याद नही, लेकिन खुद को देशभक्त बताता हूँ । मैं आज के भारत देश का युवा हूँ, तिरंगे के...

  • गिरगिट

    गिरगिट

    दामन अपना आसमाँ सा बनाना आसान नही । अपने आँचल में सूरज , चाँद और सितारों को एक साथ दिल से बसाना कोई आसान काम नही ।। आजकल लोग अपनी जरूरत से लोगो को गले लगाते...

  • साल दर साल

    साल दर साल

    साल दर साल यूँ ही बदलते चले गए, उम्र बढ़ती गई , सपने मरते चले गए। क्या कुछ बदला पिछले कुछ सालों में, हाँ हर साल धोखो के चेहरे बदल गए। साल दर साल मेरा चेहरा...

  • सत्य

    सत्य

    सत्य पराजित है खड़ा , झूठ का होता सम्मान। मान अपमान के भवर में डूब रहा सच्चा इंसान।। नैया सच की है डोलती और खिवैया झूठो का यार। जब नैया डुबाये खिवैया ही फिर कैसे हो...

  • जिम्मेदारी

    जिम्मेदारी

    सर्द हवाओं में सुबह के अंतिम अंधकार में, मुँह और सर को ढककर वो अपने बच्चो की पढ़ाई कमाने के लिए घर से निकल पड़ा है। शाम ढले तक बच्चो को खिला सके भरपेट खाना, बस...

  • लघुकथा – कैलेंडर

    लघुकथा – कैलेंडर

    दरवाजे की घंटी बजने पर उमेश ने दरवाजा खोला। दरवाजा खोलते ही उमेश ने देखा उसका बडा बेटा शाम को अपनी नौकरी से वापस आ गया है। उमेश ने अंदर जाकर बेटे को चाय बना कर...

  • रिश्ते

    रिश्ते

    बड़े सुंदर उजियाले थे,जब गाँव के घरों में छोटे से आले थे। दिल मे सच्चाई थी,जब गाँव के चूल्हे पर बनते निवाले थे।। एक साथ चूल्हे के सामने बैठकर खाना खाते भाई सभी। एक दूसरे के...

  • मैं नशे में हूँ

    मैं नशे में हूँ

    उजाले मंद हुए , मैं मयखाने चला गया। जख्म उजागर ना हो,मैं पीता चला गया।। जैसे जीवन से कभी नफरत होती थी। बस मैं वैसे ही जीवन जीता चला गया।। चंद बूंदे मय की जो मुझ...

  • बसेरा

    बसेरा

    बसेरा बनाने निकल पड़ा हूँ,पर अंधकार बड़ा गहरा है। रौशनी भी कहीं नही है और जुगनुओं पर भी पहरा है।। डगर भी उथल पुथल है और कोहरा भी बड़ा गहरा है। रुकने का भी वक्त नही...