कविता

कोई तो है

  मेरे मन को छूने का हुनर वो जान गया है। आँखों मे छिपे अश्को को पहचान गया है।। कोई रिश्ता नही है उससे लेकिन वो मेरे मन के हर कोने के छिपे दर्द को पहचान गया है। हर एक रिश्ता जब मुझे हर वक्त छल रहा था। वो मेरे दर्द को अपना मान मेरे […]

कविता

तैयारी

  मिट्टी की स्याही लेकर उंगलियो की कलम बनाकर, खुद के नए बूत को बनाने की फिर तैयारी कर ली है। हवाये कितनी भी विपरीत दिशाओ में अब चल ले, हमने हवाओ से भी लड़ने की तैयारी अब कर ली है। तुफानो से डगमगा रही जो नैया,तो मांझी का इंतजार क्यों, खुद मांझी बनकर अपनी […]

लघुकथा

अमर की शरारत

अमर दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा था।आमतौर पर इस कक्षा के विद्यार्थी काफी शरारती होते हैं और उसी प्रकार अमर का भी व्यवहार काफी शरारती था। अमर पढ़ने में एवरेज बच्चा था और उसकी कोशिश हमेशा पेपरों से बचने की रहती थी।दसवीं के प्री बोर्ड के एग्जाम चल रहे थे।अमर काफी घबराया हुआ था क्योंकि […]

लघुकथा

माँ

  रजनी अपने दो साल के बेटे के साथ बस से ससुराल से मायके के लिए सफर कर रही थी।उसके पिता रजनी को ससुराल से अपने घर ले जा रहे थे।जैसे के आमतौर पर बेटियां अपने माँ बाप से मिलने जाती हैं। ससुराल से मायके तक बस से तकरीबन तीन घंटे का सफर पिता पुत्री […]

कविता

ना दिख मजबूर

  रूह की गर्त पर एक नकाब लपेटे हूँ। टूटे सपनो में अब भी आश समेटे हूँ।। दुखों की कड़कड़ाती धूप बहुत है। खुशी की सर्द हवा की उम्मीद समेटे हूँ।। क्यूँ हुआ तू किनारे , सोचता है क्यूँ भला। देख पीपल के नीचे रखे भगवान का नजारा, टूट जाये अगर भगवान की मूरत का […]

कविता

गिरगिट

  गिरगिट देखो निकल पड़ा अपना रंग बदलने, परायो को दिखाने अपना और अपनों को छलने, शान बड़ी है चाल में इसकी और चमक चेहरे में, ठुमक ठुमक के चलता चाल,लगता खूब मटकने, आँखों में मिठाश है भरी पर मुँह से आग उगलता, लगता तुमको अपना पर हर डाल पर रंग बदलता, फितरत है ऐसी […]

कविता

कोई तो है

  मेरे मन को छूने का हुनर वो जान गया है। आँखों मे छिपे अश्को को पहचान गया है।। कोई रिश्ता नही है उससे लेकिन वो मेरे मन के हर कोने के छिपे दर्द को पहचान गया है। हर एक रिश्ता जब मुझे हर वक्त छल रहा था। वो मेरे दर्द को अपना मान मेरे […]

कविता

बस अभी जगा हूँ

  *बस अभी जगा हूँ , सपनो के भवर जाल से,* *कदम अभी चले है,जो फॅसे थे मकड़जाल में,* *मन की जकड़न ने भी अभी अंगड़ाई ली है।* *पैरो की बेड़ियों ने भी अभी पैरो को रिहाई दी है।।* *ह्रदय की धड़कन ने भी तोड़े है अब भय के जाले,* *मंजिल मिले ना मिले अब […]

लघुकथा

माँ

  रजनी अपने तीन साल के बेटे के साथ बस से ससुराल से मायके के लिए सफर कर रही थी।उसके पिता रजनी को ससुराल से अपने घर ले जा रहे थे।जैसे के आमतौर पर बेटियां अपने माँ बाप से मिलने जाती हैं। ससुराल से मायके तक बस से तकरीबन तीन घंटे का सफर पिता पुत्री […]

कविता

आज का पत्रकार

  पत्रकारिता को बेशर्मो ने जाने क्या बना दिया। चमचागिरी ने सभी को आज बहुत गिरा दिया।। वो पत्रकार जो आज बहुत चिल्ला रहे है। ना जाने किस नेता की कमर सहला रहे है।। बहुत ही पाक पेशा होता है पत्रकार का, चंद रुपयों की चाहत में उस पर दाग लगा रहे है। बहुत समय […]