कविता

आईना

आज एक बार फिर आईने के सामने खड़ा हूँ मैं, वो सच्चा है तो हो,अपनी सच्चाई पर अड़ा हूँ मैं, ना जाने कौन से घमंड का आईने पर साया है। अपनी सच्चाई पर कुछ इस कदर यकीं है मुझको, इसलिए उसके सामने कभी ना सर झुकाया है।। गलतफहमियों का शिकार कोई भी हो सकता है। […]

कविता

बनो सूरज सा

अभी घर से निकला हूँ,धीरे – धीरे आगे चलूँगा। मैं किसी का गुलाम नही,जो सबके हुक्म झेलूँगा।। कुछ लोगो को गुमान है,वो सूरज को रास्ता दिखाते है। बड़े बेशर्म है ,उसकी रौशनी में ही आगे बढ़ते जाते है।। वो जो समन्दर को कहते है , कि वो खारा है। वो लोग समन्दर में उतरने से […]

बाल कहानी

स्कूल (गरीबी पर जीत)

राम एक नवी कक्षा का विद्यार्थी है और हमेशा से पढ़ने लिखने में बहुत ही अच्छे दिमाग का रहा है।आठवी कक्षा तक उसकी अटेंडेंस हमेशा पूरी रहती थी और उसकी पिछली कक्षा आठवीं में तो उसकी अटेंडेंस लगभग 97% थी। इससे उसकी टीचर भी उससे बहुत खुश रहते थे।हमेशा पढ़ाई में अव्वल रहने वाला राम […]

कविता

चल संभल कर

है दूर तक अँधेरा और कोहरा भी गहरा। संभल कर चल , रोशनी पर भी है पहरा।। कोहरे को जरा ओस की बूंदों में बदलने दे। राह में फैले घनघोर अँधेरो को छटने तो दे।। माना उजाले के सहारे बहुत नही है पास तेरे, बस जुगनू के उजाले पर खुद को चलने दे। मंजिल की […]

कविता

होली पर सब एक हो जाये

अपनेपन के रंगों से मन की पिचकारी भर दो। अबके होली में तुम सबको एक रंग में भर दो।। ना हिन्दू हो,ना कोई मुस्लिम,एक रंग में सबको रंग दो। इस होली में तुम सबको एक ही मजहब में रंग दो।। एक बच्चे सा मन हो सबका,ना मन मे कोई भेदभाव हो। इस होली में सबको […]

लघुकथा

आज का श्रवण कुमार

पापा मैं ये बीस कम्बल पुल के नीचे सो रहे गरीब लोगो को बाट कर आता हूँ।इस बार बहुत सर्दी पड़ रही है।श्रवण अपने पिता से ये कहकर घर से निकल गया। इस बार की सर्दी हर साल से वाकई कुछ ज्यादा ही थी।श्रवण उन कंबलों को लेकर पुल के नीचे सो रहे लोगो के पास […]

कविता

कोई तो है

  मेरे मन को छूने का हुनर वो जान गया है। आँखों मे छिपे अश्को को पहचान गया है।। कोई रिश्ता नही है उससे लेकिन वो मेरे मन के हर कोने के छिपे दर्द को पहचान गया है। हर एक रिश्ता जब मुझे हर वक्त छल रहा था। वो मेरे दर्द को अपना मान मेरे […]

कविता

तैयारी

  मिट्टी की स्याही लेकर उंगलियो की कलम बनाकर, खुद के नए बूत को बनाने की फिर तैयारी कर ली है। हवाये कितनी भी विपरीत दिशाओ में अब चल ले, हमने हवाओ से भी लड़ने की तैयारी अब कर ली है। तुफानो से डगमगा रही जो नैया,तो मांझी का इंतजार क्यों, खुद मांझी बनकर अपनी […]

लघुकथा

अमर की शरारत

अमर दसवीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा था।आमतौर पर इस कक्षा के विद्यार्थी काफी शरारती होते हैं और उसी प्रकार अमर का भी व्यवहार काफी शरारती था। अमर पढ़ने में एवरेज बच्चा था और उसकी कोशिश हमेशा पेपरों से बचने की रहती थी।दसवीं के प्री बोर्ड के एग्जाम चल रहे थे।अमर काफी घबराया हुआ था क्योंकि […]

लघुकथा

माँ

  रजनी अपने दो साल के बेटे के साथ बस से ससुराल से मायके के लिए सफर कर रही थी।उसके पिता रजनी को ससुराल से अपने घर ले जा रहे थे।जैसे के आमतौर पर बेटियां अपने माँ बाप से मिलने जाती हैं। ससुराल से मायके तक बस से तकरीबन तीन घंटे का सफर पिता पुत्री […]