Author :

  • कविता – विवशता

    कविता – विवशता

    वो जो किनारे पर बंधी है वो नैया मैं ही तो हूँ। हुनर मेरा तैरना,नाम होता माझी का,वो मैं ही तो हूँ।। डूब जाती समंदर मैं खुद ही कागज की है नैया। लगे इल्जाम समंदर पर,बस...


  • वो हुनर कहाँ से लाओ

    वो हुनर कहाँ से लाओ

    *_वो हुनर कहाँ से लाऊं,अब अपनी माँ कहाँ से लाऊं…….._* मिट्टी से आँगन लीपने का हुनर बस माँ को आता था। मेरे मन की बात समझने का हुनर बस माँ को आता था। बिना कुछ कहे...





  • व्यंग – मोबाइल और आज का जीवन

    व्यंग – मोबाइल और आज का जीवन

    मोबाइल के नुकसान गिनवाने वाले लोग तो आपने बहुत देखे होंगे,आज मैं मोबाइल से होने वाले फायदों के बारे में आप लोगों को बताना चाहता हूँ।जी हां ध्यान से पढ़िएगा जनाब क्योंकि यह एक बहुत ही...

  • कलम की मार

    कलम की मार

    कविता – कलम की मार से मचा हाहाकार सबकी अपनी सोच है,सबका अपना मन। लगती हो लगे बुरी,पर हम लिखते जीवन।। हम लिखते जीवन,किसी को क्यों चुभता है। चुभन कलम की तेज,जैसे भाला चुभता है।। भाला...

  • कविता – दुख

    कविता – दुख

    कैसी बेटी कैसे बेटे । अगर माँ बाप रोते।। माँ बाप के दुख  । सारे रिश्तेदार चुप ।। हर व्यक्ति मजे लेता है । कौन किसी का होता है ।। तुझे भी बुढापा आएगा । बता...