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  • लो बेच दिया जमीर

    लो बेच दिया जमीर

    बाजार मे खुद ही अपना ईमान बेचकर। कल रात नींद ना आयी अपना अभिमान बेचकर ।। बस अब मेले में नजर मैं ना आऊंगा । जो मैं था वो ना बचेगा तो खुद से नजरे कैसे...

  • माँ

    माँ

    माँ के सम्मान में क्या कहूँ, ये शब्द अपने आप मे सम्माननीय है, कभी मेरे दर्द से जो दुखी हुई वो सिर्फ माँ थी, हमेशा साथ थी मेरे,चाहे मैं बड़ा था या बच्चा था, माँ जब...

  • नीर हुआ गंभीर

    नीर हुआ गंभीर

    सबके अपने दर्द है सबके अपने नीर । क्यों तू अपने दर्द पर नीर हुआ गभीर ।। मतलबी के दिल मे कब था तेरा दर्द । जिससे उसका काम बने बस उसी के लिए उसके नीर...


  • कविता – गुनाह

    कविता – गुनाह

    कुछ इस कदर अपने गुनाहों का हिसाब रखता हूँ, एक आईना पीछे और एक आईना सामने रखता हूँ, सभी गुनाहों मैं कुछ गुनाह मेरे छूट ना जाये, इसलिए आईने अपने दाये- बाये भी रखता हूँ, वो...