कविता

ना दिख मजबूर

  रूह की गर्त पर एक नकाब लपेटे हूँ। टूटे सपनो में अब भी आश समेटे हूँ।। दुखों की कड़कड़ाती धूप बहुत है। खुशी की सर्द हवा की उम्मीद समेटे हूँ।। क्यूँ हुआ तू किनारे , सोचता है क्यूँ भला। देख पीपल के नीचे रखे भगवान का नजारा, टूट जाये अगर भगवान की मूरत का […]

कविता

गिरगिट

  गिरगिट देखो निकल पड़ा अपना रंग बदलने, परायो को दिखाने अपना और अपनों को छलने, शान बड़ी है चाल में इसकी और चमक चेहरे में, ठुमक ठुमक के चलता चाल,लगता खूब मटकने, आँखों में मिठाश है भरी पर मुँह से आग उगलता, लगता तुमको अपना पर हर डाल पर रंग बदलता, फितरत है ऐसी […]

कविता

कोई तो है

  मेरे मन को छूने का हुनर वो जान गया है। आँखों मे छिपे अश्को को पहचान गया है।। कोई रिश्ता नही है उससे लेकिन वो मेरे मन के हर कोने के छिपे दर्द को पहचान गया है। हर एक रिश्ता जब मुझे हर वक्त छल रहा था। वो मेरे दर्द को अपना मान मेरे […]

कविता

बस अभी जगा हूँ

  *बस अभी जगा हूँ , सपनो के भवर जाल से,* *कदम अभी चले है,जो फॅसे थे मकड़जाल में,* *मन की जकड़न ने भी अभी अंगड़ाई ली है।* *पैरो की बेड़ियों ने भी अभी पैरो को रिहाई दी है।।* *ह्रदय की धड़कन ने भी तोड़े है अब भय के जाले,* *मंजिल मिले ना मिले अब […]

लघुकथा

माँ

  रजनी अपने तीन साल के बेटे के साथ बस से ससुराल से मायके के लिए सफर कर रही थी।उसके पिता रजनी को ससुराल से अपने घर ले जा रहे थे।जैसे के आमतौर पर बेटियां अपने माँ बाप से मिलने जाती हैं। ससुराल से मायके तक बस से तकरीबन तीन घंटे का सफर पिता पुत्री […]

कविता

आज का पत्रकार

  पत्रकारिता को बेशर्मो ने जाने क्या बना दिया। चमचागिरी ने सभी को आज बहुत गिरा दिया।। वो पत्रकार जो आज बहुत चिल्ला रहे है। ना जाने किस नेता की कमर सहला रहे है।। बहुत ही पाक पेशा होता है पत्रकार का, चंद रुपयों की चाहत में उस पर दाग लगा रहे है। बहुत समय […]

कविता

यादें

  पुरानी तस्वीरों में यादों को जिंदा रखते है। कुछ लोग अभी भी रिश्तों को जिंदा रखते है।। पुराने किवाड़ों को रोज साफ कर रहे हैं। कुछ लोग अभी भी रिश्तों को जी रहे है।। अभी आने ही वाला है मेरे परिवार का कोई, कुछ लोग अभी भी देहली पर बाट निहार रहे है। ना […]

बाल कविता

जंगल की सर्दियां

ठिठुरन बढ़ गयी भालू मामा, सर्दियां देखो फिर से आई। छोटी सी ये चिड़िया तुम्हारी, ठंड से बहुत ही कपकपाई।। बहुत बड़ा घर है तुम्हारा मामा, इसलिए मैं मामा घर आयी। अपने पास ही रख लो मामा, घोंसले में,मैं ठंड से ना बच पायी।। भालू मामा ने चिड़िया को प्यार से फिर गोद मे अपनी […]

कविता

आ गए चुनाव

नेताजी फिर आ गये ले के वादे हज़ार। इतने उत्साही है,लगता है कर देंगे बेड़ा पार।। चुनावो में करते है हर बार खूब प्रचार। हो जाये चुनाव फिर दिखते नही ये यार।। कर लो अबकी बार तुम लोगो ये तैयारी। ईमानदार नेता को जिताने की है बारी।। ईमानदार नेता से देश का विकाश होगा। हर […]

कविता

उम्मीदों का वृक्ष

  उम्मीदों की चादर में कई सपने दफ्न हो गए। जिन वृक्षो से की थी छाया की उम्मीदे,वो छाया पतझड़ आने पर खुद ही कहीं गायब हो गयी।। जीवन के गुजरते पलो में अक्सर ऐसा हुआ। शुखे मुरझाये वृक्षो से भी कई बार ठंडी हवाओं का अनुभव हुआ , शायद गिर रहे थे जो पत्ते […]