गीत/नवगीत

सावन में बहारें

हर गुल खोया बुलबुल खोई अनजान सी ये पहचान हुई सावन में बहारें खुद झूमी पतझड़ में खुद वीरान हुई–!! कितने बादल छाकर लौटे कितने मेघों ने आह भरी होठों ने ओस की बूंदों से अपने भीतर की प्यास हरी इक पल की आस में उम्र मेरी नाजाने क्यों नादान हुई सावन में बहारें खुद […]

इतिहास

हमारे अटल जी (पुण्यतिथि पर विशेष)

कभी भारतीय लोकतन्त्र में अछूत रही पार्टी भाजपा की पहचान बनाने वालों में से अटलबिहारी वाजपेयी खास चेहरे रहे है. 24 दिसम्बर 1924 में ग्वालियर में पैदा हुए अटलबिहारी वाजपेयी जी न सिर्फ एक कुशल राजनीतिज्ञ अपितु एक कवि भी थे.उनके पिता उत्तर प्रदेश के आगरा जनपद के मूल निवासी पण्डित क्रष्णबिहारी वाजपेयी जो कि […]

कहानी

कामवाली

फितरत सूरज सिर पर चढ़ आया था. सुबह पाँच बजे उठने वाली शांति दाई का दरवाजा नौ बजे तक खुला नहीं था. हाँ, दरवाजा कह सकते है उन लकड़ी के पलड़ो को जिनमें फूस से भी कम ताकत बची थी. उम्मीदों के अनगिनत झरोखे हो रखे थे. जब से ये दरवाजे लगे थे इस दहलीज […]

कहानी

मुसाफिर

सुबह के दस बज चुके थे सभी आँफिस पहुँच चुके थे देव हमेशा की तरह लेट था.रोज बाॅस की डाँट खाता था पर उस पर कोई असर नहीं होता था.भरोसेमंद और ईमानदार था इस लिए बाॅस का चहेता था.देव पैतीस साल का था पाँच साल पहले उसकी शादी हो चुकी थी तीन साल के दो जुड़वा बेटे थे.छः साल से बेंगलूर में जाॅब कर रहा है.भोपाल में माँ पापा और एक भाई बहन रहते है.छुट्टियों में ही वह घर […]

सामाजिक

ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट का बहु प्रतीक्षित आदेश देश मे कुछ लोगो को राहत दिया तो एक नई बहस को जन्म भी दे दिया। समलैंगिकता पर जोर देने वाले लोग बहुत कम है किंतु समाज मे ऐसे लोगो को अच्छी निगाह से नही देखा जाता है। न्यायालय की अपनी सीमा है ।उसी परिधि में रहकर न्याय दे […]

कविता

कविता

जब मै कोयल सी कूक रही थी पेङों पर,, तब मनमुग्ध से तुम भावविभोर हो उठे,, बसाया अपने मन में फूल की तरह… जब गौरैया सी चिहचिहा रही थी तुम्हारे स्मृति पटल पर, तब तुम धबराए,, कही भाग्य न बन जाऊॅ तुम्हारे आँगन का… जब मोर पंख सा स्पर्श किया मेरी रूह ने तुम्हारी रूह […]

गीत/नवगीत

गीत – धुंधली तस्वीरें

धुंधली धुंधली तस्वीरें है धुंधला जीवन का खेल हुआ जब उम्र ढली तब पता चला कैसे लोंगो से मेल हुआ–!! लड़खड़ाया बचपन जब तेरा मेरे हाथ तेरी बैसाखी थे जवान हुई तेरी राहें मेरे नैन दिया और बाती थे तुझे आसमान छूने के लिए मैने था सबकुछ बेच दिया—!! वक्त ने ऐसा बड़ा किया मुझे […]

गीतिका/ग़ज़ल

जाने किधर गए

चुपके से आके वो कहीं मुझमें ठहर गए ना वो किसी अजीज के न अपने ही घर गए ठहरे है ऐसे मोड़ पे जहाँ मंजिल के न निशां मिल जाते काफिले मुसाफिर सारे गुज़र गए अब ढूढते है शाम-ओ-शहर जलते हुए दिए जल कर के खाक बन के उड़े जाने किधर गए संभला नहीं उनसे […]

गीत/नवगीत

विरह वेदना

विरह वेदना के आँचल में ,कैसे तुझे छुपाऊँ मै कहने को तो मै माँ हूँ पर, तुझे बचा न पाऊँ मै–! लोग कहें परछाई मेरी,मन ही मन मुस्काती हूँ देख के तुझमें बचपन अपना,फूलों सी खिल जाती हूँ टुकड़े होती परछाँई को,किस आँचल में छुपाऊँ मै- कहने को तो मै माँ हूँ–!! जब भी अस्मित […]

कविता

नव वर्ष की छटा

नव वर्ष की छटा निराली हो हर ओर बिखरती लाली हो संकल्प रहे जनमानस का बसुधा हर किसी की आली हो–! मनुहार निराले हो जाए गुबार भी सारे धुल जाए मन उजला दर्पण हो जाए मुस्कान समर्पण वाली हो–! हो जाए सभ्यता फिर जीवित कलियों का सभ्य परिधान रहे टूटेगी नही डाली से कली हर […]