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  • मुक्तक

    मुक्तक

    भरे जो मेघ नैनों के, बरसना भी जरूरी था गिले शिकवे दिलों में थे, गरजना भी जरूरी था सहजता से मिले कुछ तो, कदर उसकी नहीं होती अहमियत एक दूजे की, समझना भी जरूरी था परिचय...

  • ऐ मेरे मन के दिये

    ऐ मेरे मन के दिये

    ऐ मेरे मन के दिये तू हौशलों से काम ले, आ रही आंधी इधर खुद को जरा तू थाम ले । काम तेरा जलना है तू बस सदा जलता रहे, इन अंधेरों को मिटाके रोशनी करता...


  • पीर

    पीर

    झूठी शान अब हमसे दिखाई नहीं जाती, ये दुनियादारी की रस्में निभाई नहीं जाती । मत डाल इतना बोझ इन कंधो पर खुदा, ये जिम्मेदारियां मुझसे उठाई नहीं जाती । झूठे चेहरे, जज्बात लिए फिरते है...

  • इंतजार

    इंतजार

    भग्न हृदय विकल चित्त अश्रु सलिल से सींच रहीं प्रिय-पथ झूठी आस लिए मन में विश्वास लिए ये गोपी आज भी खड़ी है प्रियतम कृष्ण के इंतजार में नादान, नासमझ नहीं जानती ये इंतजार है अनंत…….....

  • भय

    भय

    घने अंधेरे में जमीन पर पड़ा वो रस्सी का टुकड़ा सांप सा प्रतीत होता है एक अनजाना सा भय बस यूं ही इस मन को छलता है… बिल्कुल तृणवत तुच्छ फिर भी पहाड़ सा लगता है...

  • सपना

    सपना

    पानी का बुलबुला ठहरकर भी कब तक ठहर पाता उसे फूटना ही था… एक सपना वो सपना ही तो था एक न एक दिन जिसे टूटना ही था… परिचय - नीतू शर्मा नाम-नीतू शर्मा पिता-श्यामसुन्दर शर्मा...

  • चाहतों के लिबास

    चाहतों के लिबास

    बिखरे जज्बातों की एक झड़ी जिन्दगी, हर तरफ उलझनों से भरी जिन्दगी । भोर के तारे सी आसमां में सजी, पल गुजरते ही ओझल हुई जिन्दगी । चाहतों के लिबासों में लिपटी मिली, ढूंढने जब गई...

  • हृदयोद्गार

    हृदयोद्गार

    कवि के मन में सहसा उपजे, भांति भांति के विचार है कविता, कवि का हृदयोद्गार है कविता । प्रणय मिलन की कल्पना और स्वपनों का संसार है कविता, प्रेम, दया, कभी क्रोधयुक्त, सब भावो का भंडार...

  • रावण

    रावण

    फिर से आज दशहरा आया, मेरा पुतला बना दिया l रामवेश लेकर मानव ने मरे हुए को जला दिया l साधुवेश में मेरे द्वारा सीता एक बार थी ठगी गई l पाखण्डी-चंगुल में फंसती नारी फिर...