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  • मन की बात

    मन की बात

    ये मन भोला है बड़ा, इस जग से अनजान । बोलो तो पहले करो, भली-भाँति पहचान ।। मन की बातें मत कहो, मन में रखो छुपाय । मतभेदों के अन्त का, है बस यही उपाय ।।...

  • शब्द-बाण

    शब्द-बाण

    मैं लाख जतन कर लू फिर भी… निर्मम लोगों के विषैले शब्द-बाण, कहीं ना कहीं इस मासूम हृदय को आहत कर ही देते है. उनके जहरीले बाणों का प्रत्युत्तर देने में असक्षम, जैसे-तैसे हृदय को थामकर,...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    स्वयं के स्वार्थ से मतलब, दुआ वो क्या भला जाने फरेबों से लबालब जो, वफा वो क्या भला जाने भले रोए कि फिर तड़पे, नहीं मतलब किसी से कुछ हृदय पत्थर बने जिनके, दया वो क्या...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    भरे जो मेघ नैनों के, बरसना भी जरूरी था गिले शिकवे दिलों में थे, गरजना भी जरूरी था सहजता से मिले कुछ तो, कदर उसकी नहीं होती अहमियत एक दूजे की, समझना भी जरूरी था परिचय...

  • ऐ मेरे मन के दिये

    ऐ मेरे मन के दिये

    ऐ मेरे मन के दिये तू हौशलों से काम ले, आ रही आंधी इधर खुद को जरा तू थाम ले । काम तेरा जलना है तू बस सदा जलता रहे, इन अंधेरों को मिटाके रोशनी करता...


  • पीर

    पीर

    झूठी शान अब हमसे दिखाई नहीं जाती, ये दुनियादारी की रस्में निभाई नहीं जाती । मत डाल इतना बोझ इन कंधो पर खुदा, ये जिम्मेदारियां मुझसे उठाई नहीं जाती । झूठे चेहरे, जज्बात लिए फिरते है...

  • इंतजार

    इंतजार

    भग्न हृदय विकल चित्त अश्रु सलिल से सींच रहीं प्रिय-पथ झूठी आस लिए मन में विश्वास लिए ये गोपी आज भी खड़ी है प्रियतम कृष्ण के इंतजार में नादान, नासमझ नहीं जानती ये इंतजार है अनंत…….....

  • भय

    भय

    घने अंधेरे में जमीन पर पड़ा वो रस्सी का टुकड़ा सांप सा प्रतीत होता है एक अनजाना सा भय बस यूं ही इस मन को छलता है… बिल्कुल तृणवत तुच्छ फिर भी पहाड़ सा लगता है...

  • सपना

    सपना

    पानी का बुलबुला ठहरकर भी कब तक ठहर पाता उसे फूटना ही था… एक सपना वो सपना ही तो था एक न एक दिन जिसे टूटना ही था… परिचय - नीतू शर्मा नाम-नीतू शर्मा पिता-श्यामसुन्दर शर्मा...