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  • अस्तित्व

    अस्तित्व

    खुद में खुद को ढूँढकर अब जानना होगा, है तेरा अस्तित्व क्या पहचानना होगा । फिर अमावस की निशां में चाँदनी सोई, इन अंधेरों में कहीं फिर रौशनी खोई । आस के दीपक से तम को...

  • दोहे

    दोहे

    मोहन मन मोहित हुआ, लगे न दूजी ठोर । अब तो निरखो साँवरे, तनिक हमारी ओर ।। हरपल बढ़ती जा रही, विरहा की ये पीर । विरहानल भड़का रहा, इन नैनों का नीर ।। प्रिय तुमको...

  • हेप्पी मदर्स डे कहना

    हेप्पी मदर्स डे कहना

    सूनसान कंटीली झाड़ी में गूँज उठी थी जो चित्कार । तेरे हृदय तक पहुँच सकी ना मेरी दर्द भरी वो पुकार । हाय! विवशता थी ये मेरी, वज्र हृदय का वार था सहना । मिले गर...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    फ़रेबी लोग ऐसे है, कि पल-भर में बदल जाते जिगर जिनके बने पत्थर, भला कैसे पिघल जाते  महक पाई सुमन से तो, करों में भी चुभे कांटे मिले कोई गुलिस्तां भी, बिना देखे निकल जाते ।...


  • सीख लिया

    सीख लिया

    सहते-सहते अग्नि का ताप जल ने भी जलना सीख लिया । लोगो की फितरत देख-देख हमने भी बदलना सीख लिया । कुछ जोर ना था जब शब्दों में चुप्पी ने कहना सीख लिया । नहीं राह...

  • लहराएं तिरंगा प्यारा

    लहराएं तिरंगा प्यारा

    जय जवान जय जय किसान  का आज लगाएं नारा ऊँचे नील गगन में लहराएं तिरंगा प्यारा । केसरिया रंग शौर्य पराक्रम, की गाथा को गाता है, अमन चैन को श्वेत रंग समृद्धि को हरा दर्शाता है,...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    आस विश्वास से पूर्ण मन तुम करो जिंदगी को महकता चमन तुम करो चीर के तम प्रबल भानु सा तुम बनों तुच्छ कमजोरियों का दमन तुम करों । परिचय - नीतू शर्मा नाम-नीतू शर्मा पिता-श्यामसुन्दर शर्मा...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    किसी गम को छुपाने के लिये हम मुस्कुराते है । जमाने को दिखाने के लिये हम मुस्कुराते है । बड़ी बेताब रहती है, छलकने को नयन नदियाँ । कि अश्को को सुखाने के लिये हम मुस्कुराते...

  • परवाह और जरूरत

    परवाह और जरूरत

    “माँ आज तुम खिचड़ी बना कर खा लेना, मैं और रश्मि फिल्म देखने जा रहे है। खाना बाहर ही खाएँगे ।” राजेश के ये शब्द सुनकर सुजाता की आँखे नम हो गई । अपने मुँह से...