इतिहास

भारत के सबसे ऊंचे स्तूप के रूप में देहरादून का मिन्ड्रोलिंग मठ-

भारत के सबसे ऊंचे स्तूप के रूप में देहरादून का मिन्ड्रोलिंग मठ- (बुद्ध पूर्णिमा के विशेष अवसर पर) बैसाख की पूर्णिमा को पूरे विश्व मे बुद्धपूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। भगवान बुद्ध का जन्म, परिनिर्वाण और ज्ञान की प्राप्ति ये तीनों महत्वपूर्ण घटनाएं उनके जीवन में इस एक ही दिवस विशेष पर घटित […]

इतिहास

आज़ाद हिंद फौज और उत्तराखंड

आजाद हिन्द फौज में उत्तराखण्ड का भी बड़ा योगदान था- 21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने आज़ाद हिन्द सरकार का गठन किया था. इस सरकार की स्थापना सिंगापुर में की गयी थी. 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देश को अंग्रेजों की गुलामी से निजात दिलाने के उद्देश्य से आजाद हिन्द […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

पहाड़ों की मंगल धुन “ढोल-दमाऊं”

लोककला और लोकसंगीत किसी क्षेत्र विशेष की पहचान से बन जाते हैं। भिन्न-भिन्न भोगौलिक क्षेत्रों में अलग -अलग वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाता है, जिनकी उपयोगिता उस क्षेत्र एवं वहां रहने वाले लोगों, उनके रीति-रिवाजों, उनकी संस्कृति आदि पर निर्भर करती है। अगर देवभूमि उत्तराखण्ड के वाद्य- यंत्रों की बात करें तो उनमें ढोल- […]

इतिहास

प्राचीनकालीन सिक्कों का इतिहास

■ भारतवर्ष के सबसे प्राचीन सिक्के- “आहत सिक्के” ■ मुद्रा के रूप में भारत मे सिक्कों का चलन लगभग ढाई हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। शुरुआत में सिक्कों को आज के सिक्कों की भांति सांचों में ढाला नही जाता था बल्कि धातु के टुकड़ों पर औजारों से प्रहार कर आकृतियां बनाई जाती थीं। […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

नमस्ते : हमारी पुरातन परंपरा

भारतीय संस्कृति, धर्म और जीवन शैली की श्रेष्ठता की पैरवी करने पर अनेक  बुद्धिजीवियों द्वारा बिना किसी संकोच के तुरंत ही अति राष्ट्रवादी होने के आरोप लगा दिए जाते हैं किंतु वस्तुस्थिति यह है कि समय-समय पर आधुनिक विज्ञान द्वारा भारतीय आचार-विचार, धर्म, ज्ञान और जीवनशैली की वैज्ञानिकता प्रमाणित की जाती रही है। वर्तमान संदर्भ […]

इतिहास

इतिहास के झरोखे में महाराणा प्रताप का दर्शन

_कोटि-कोटि नमन_ “श्री महाराणा प्रताप सिंह जी जयंती के विशेष अवसर पर ●महाराणा मेवाड का वंश आज तक संसार के सबसे प्राचीन चलने वाले वंश के रूप मे जाना जाता है🙏 जन्म – 9 मई, 1540 ई. जन्म भूमि – कुम्भलगढ़, राजस्थान पुण्य तिथि – 29 जनवरी, 1597 ई. पिता – श्री महाराणा उदयसिंह जी […]

अन्य लेख

महात्मा बुद्ध के शिक्षाप्रद वचन

              (बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर) ●हम जो कुछ भी हैं वो हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है। यदि कोई व्यक्ति बुरी सोच के साथ बोलता या काम करता है, तो उसे कष्ट ही मिलता है। यदि कोई व्यक्ति शुद्ध विचारों के साथ बोलता या […]

सामाजिक

शिक्षा और शैक्षिक वातावरण का मानव जीवन में महत्व

शिक्षा देने के लिए एक शिक्षक ही हो ऐसा कोई जरुरी नहीं है। मैं ये बात पूछना चाहती हूं कि पुराने समय में हमारे माता पिता जब शिक्षित नहीं थे यानी उन्हें अक्षर ज्ञान नहीं था तो क्या वे अपने बच्चों को या अपने संपर्क में आने वालों को उचित शिक्षा, अच्छे संस्कार नहीं देते […]