लघुकथा

लघुकथा – मोटर साइकिल

“देखिए मास्टर साहब को, दस साल से नौकरी कर रहे हैं; अभी तक एक मोटर साइकिल नहीं खरीद पाए है” विजय गुप्ता ने कहा। अपने सहकर्मी विजय की बात सुनकर अवाक रह गया कुणाल वर्मा। उन्होंने देखा कि मास्टर साहब संजय साह का चेहरा थोड़ा सफेद पड़ गया है। बात को दूसरी तरफ ले जाने […]

कविता

विडम्बना

समाज की सारी अच्छाइयाँ धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं जब इंसान का नैतिक पतन हो जाता है । नैतिक बल नहीं रह जाता है, सच को सच और झूठ को झूठ बोलने का। लोभ के वशीभूत इंसान बन जाता है कपटी और चाटुकार छोड़ देता है दामन सच का और करने लगता है  झूठ […]

लघुकथा

विकल्प

“अपने वार्ड से तीन उम्मीदवार खड़े हैं पंचायत समिति के सदस्य के लिए।” पति ने चाय की चुस्की लेते हुए कहा। “अच्छा, तब तो मुकाबला भी शानदार होगा!”पत्नी ने कहा। “बिल्कुल, सभी कर्मठ, ईमानदार, शिक्षित और समाजसेवी जो हैं!” पति ने चुटकी लेते हुए कहा। पत्नी कुछ कहती इसके पहले ही तीन  हैंड बिल उसके […]

लघुकथा

तुलना

“आपने शादी के पहले खुद मुझसे बहुत सारी जानकारी ली। फिर दूसरों से क्यों तुलना? मैंने तो कभी अपनी डिग्री की गलत सूचना नहीं दी।” पत्नी की बातों से आकाश को लगा पत्नी आज मूड बना कर बात कर रही है, “क्यों आज तुम बहुत नाराज़ हो?” “मैं नाराज़ नहीं हूँ, नाराज होकर भी क्या […]

लघुकथा

लघुकथा – सर्दी

“फिर बारिश होने लगी मम्मी, तुम भींग जायेगी। चलो, कुछ देर सामने के मकान के बरामदे में रुक जाते हैं।” “नहीं बेटा ! स्कूल पहुँचने में तुम्हें देर हो जायेगी। हल्की बूँदा- बूँदी हो रही है।” “माँ! मेरी छोटी -सी छतरी में तुम आ भी नहीं सकती। पानी से भींगने से तुम्हें सर्दी लग जायेगी।” […]

कहानी

कहानी : आमने -सामने

रामनवमी के अवसर पर बिंदुधाम मंदिर में भक्तों और दर्शकों की काफी भीड़ थी।बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों से हजारों की संख्या में लोग प्रतिवर्ष इस मंदिर में आते हैं। झारखंड के साहिबगंज जिले के बरहरवा कस्बा से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर एक टीले पर अवस्थित इस मंदिर  का सौंदर्य बहुत ही मनोहारी […]

बाल कहानी

बाल कहानी – मासूमियत

“बहुत ठंड है। अभी तुम्हारे लिए गरम चादर तैयार करती हूंँ।”  चाची ने कमरे के अंदर झाँककर देखा, सात साल की भतीजी नेहा एक पुराने तौलिए को कैंची से काट रही है और कुछ कहे जा रही है। चाची कमरे के अंदर जाती है और पूछती है,” क्या कर रही हो नेहा?  आंटी, मेरी गुड़िया […]

लघुकथा

लघुकथा समझदारी

“ज्योति,अब तुम शिक्षिका बन गई हो। उम्र भी तेईस हो गई है अब तो तुम्हें आपत्ति नहीं है न ?” अपने दोस्त की बातें सुन ज्योति गंभीर हो गई। “चुप क्यों हो? कहीं मैं तुम्हें पसंद नहीं या कोई और तुम्हें पसंद है, साफ-साफ आज बता दो”राकेश ने कहा।  ज्योति और राकेश ने एक साथ ग्रेजुएशन […]

हाइकु/सेदोका

तीन हाइकु

     1 बसंत ऋतु खिले प्रणय पुष्प दिल मचला।      2 प्रेम की भाषा आँखें हुई चंचल निंदिया दूर।        3 जीना बेकार प्रेम स्पर्श न मिला प्यासा हृदय। — निर्मल कुमार डे

लघुकथा

लघुकथा :आईना

मुहल्ले में रोज कुछ न कुछ मुद्दों पर तर्क बहस और झगड़ा साधारण सी बात है।  आज दस वर्षीय गोलू को पीट दिया महेशजी ने।  गोलू की माँ घर से निकल कर महेशजी से प्रश्न कर देती है जिसकी आशा नहीं थी महेशजी को,”क्या किया था मेरे इस नादान बेटे ने, आप ने उसे पीट दिया?” […]