कविता

शाश्वत सत्य

ये तो- शाश्वत सत्य है कि मृत्यु तो आयेगी, पर ये नहीं था ज्ञात बिन दस्तक दबे पैरों यूँ चुपके से आयेगी। बिना किसी से कुछ कहे बिना किसी से गले मिले बिना किसी के आँसुओं को देखे हमें अनाथ सा ले जायेगी। न कोई क्रियाकर्म करने वाला न को कोई सांत्वना देने वाला ये […]

कविता

योग

पंतजलि गुरु का ध्यान-योग आज फिर विश्व में लहराया है। हम थे विश्व में सक्षम पहले भी आज फिर विश्व को चेताया है। आ गया फिर योग दिवस तन-मन स्वस्थ बनाने को। जन-मन में करके आह्वान विश्व व्याधि दूर भगाने को। सूर्य की अद्वितीय किरणें प्रबल पराक्रमी बनाती हैं। सूर्य नमस्कार क्रिया द्वारा सबको आनंदित […]

कविता

आत्महत्या

आत्महत्या और क्रोध झूलते हैं एक ही पालने में मानसिक तनाव के झोंकों से सब उलट-पलट हो जाता है, यह जीवन बहुत कीमती है किसी कशमकश में न रहना प्यार से सींच कर इस मनचले को शुद्ध विचारों का जमा पहना पालना पोसना। अगर चाहते हो करना    आत्महत्या ! तो उन कुवृत्तियों,कुविचारों की करना, […]

कविता

हमारी विरासत चूल्हा 

माँ के हाथ की सोंधी रोटी बनती थी इस चूल्हे पर चौके में बैठ सारा परिवार भोजन का लेता आनंद कभी आग जब धीमी होती धुआं उगलता चूल्हा तब माँ, छोटी फुकनी ले हाथ में फूंकती जोर जोर से चूल्हा रोटी एक तवे पर डलती एक आगी पर सिकती पिता के कहने पर पापड़ भी […]

कविता

हिम्मत न हारना 

समय नहीं रहता एक सा परिवर्तन शाश्वत नियम तू न डरना चट्टानों से कर्म करना सचेत संयम। संकरे मार्ग से लेकर सीख चौड़ी राह कदम तू रखना जंगल, वन, पर्वत लांघकर सागर से मोती तू चुनना। हिम्मत न हारो चलते जाओ पथ स्वयं बनता जाएगा कंकड़ पत्थर देख न घबराओ शूल भी फूल बन जाएगा। […]

लघुकथा

लघुकथा- प्राथमिकता 

श्रीमती कनिका शर्मा एक अध्यापिका व  प्रतिष्ठित महिला है। गुवाहाटी में उनका अपना छोटा सा दो बेडरूम का घर है। दो बच्चे हैं। जो बड़े हो चुके हैं। अब सारा लाड़-प्यार वह अपने पालतू कुत्ते कालू पर लुटाती रहती थीं। श्रीमती शर्मा के यहाँ काम करने वाली मालती अपने साथ पांच वर्ष की बेटी बुलबुल […]

कविता

बूढ़ा होते देखा है

बूढ़े होते मात-पिता को अपने में सिमटते देखा है। अब नहीं लगती भूख उन्हें दर्द विनाशक मलते देखा है। बुढ़ापे का दर्द सहते बूढ़ा होते देखा है। बूढ़े होते मात-पिता को अपने में सिमटते देखा है। अब नहीं शिकायत किसी से प्रभु से बात करते देखा है। हर तकलीफ को सहते बच्चों से छिपाते देखा […]

बाल कहानी

पतंग की कहानी

बारह वर्ष का विहान रोते-रोते दादा जी के पास आया। दादा जी दादा जी देखो न सबकी पंतग तो आकाश में कलाबाजी खा रही है। पर मेरी पंतग तो ऊपर जाती ही नहीं है। बार-बार नीचे गिर जाती है। मेरे सब दोस्त मुझ पर हंस रहे हैं। सोनू ठीक से उड़ीची नहीं दे रहा था […]

कविता

अक्षय हो संस्कार 

अक्षय तृतीय पर हम करते हैं कामना धन-संपत्ति अक्षय होने की सुख-शांति अक्षय होने की रिश्ते-परिवार अक्षय होने की नहीं करते हम कामना संस्कृति-संस्कार, भक्ति अक्षय होने की हो गई अगर भक्ति अक्षय सुसंस्कार-संस्कृति अक्षय मिलेगा सुख-शांति चैन धन-संपदा मिल जाएगी बचेंगे रिश्ते टूटने से व्यक्ति-व्यक्ति से जुड़ जायेगा परिवार, समाज व देश बनेगा भ्रष्टाचार […]

कविता

सबके हिस्से में मोती हो

बचपन की साथी पुस्तक मेरी जिसने किया भविष्य निर्माण मिला न इससे अच्छा मित्र ढूंढ लिया दुनिया जहान। शब्द बहुत छोटा है पुस्तक पर संवाहक जीवन की मानसिक रूप से सक्षम बनाकर बुद्धि विवेक का दायरा बढ़ाती। ज्ञान भंडार भरा है इसमें करती व्यक्तित्व का निर्माण व्यवहार कुशल बनाकर के मानवता को देती सम्मान। दिखाकर […]