कहानी

कहानी – टुलु की प्रेमकथा 

यह प्रेम कथा है..असम के आदिवासी परिवार में जन्मी एक सोलह वर्षीय लड़की टुलुमुनि की।  जिसको प्यार सब टुलु कहते थे। एक सीधा साधा आदिवासी असमिया परिवार कोकराझार के एक छोटे से गांव में रहता था। चार बच्चों सहित छह लोगों का यह परिवार दिहाड़ी मजदूरी करता था। टुलु इस परिवार की सबसे बड़ी बेटी थी। बंडल […]

कविता

जड़ों से जुड़े ये पुष्प हैं प्रवासी

वतन की ऊर्जा हिये में हर्षाये हरेक प्रकोष्ठ में धरा के समाये। रंग-रूप रीति-नीति धर्म-कर्म संग जड़ों से जुड़े ये पुष्प हैं प्रवासी। सांसों में थामे कस्बाई हवा को उड़ चले सातों समंदर के पार। कुरीतियों पे करते जमकर प्रहार विषमताओं के तोड़ते हैं तार। वृक्षों से झरे पर मुरझाए नहीं जड़ों से जुड़े ये […]

गीत/नवगीत

मैं जल-कल और हल हूँ

मैं जल-कल और हल हूँ (1) धरती का अमोल रत्न हूँ मैं जल-कल और हल हूँ। चलता जीवन मेरे सहारे हरेक जीव का मैं बल हूँ। एक बूंद को तरसती दुनिया ग्रीष्म से तड़पती दुनिया। पक्षियों ने तोड़ा प्यास से दम संभल मानव जीवन है कम। कर मत व्यर्थ अमृत को समझ ले इसके महत्व […]

कविता

चहुँ ओर वसंत का शोर

वसंत लेकर आया शोर वन वन नाच रहे हैं मोर। नीरव स्वच्छ आकाश में होड़ लगी है चारों ओर। पीली साड़ी पहने सरसों देखो खड़ी खेत में। अलसाये से अलक उसके चमकीली सी धूप में। नहा रहा बाल गोपाल सौंधी-सौंधी धूप में। थाम रहा जल की बूंदें नन्हें-नन्हें हाथों में। सूरज पड़ता नैनों में नयन […]

सामाजिक

कहानी कण-कण की 

मेरे घर के चारों तरफ पेड़-पौधों की हरियाली व पक्षियों के बसेरे हैं। भोर पांच बजे छत पर प्रकृति की सुंदरता अभिभूत कर देती है। पक्षियों का अलग-अलग स्वर में कलरव सुनाई देता है। कहीं कोयल के कुहकने की आवाज तो कहीं पीली चोंच वाली द्वि मैना का वार्तालाप, कहीं कौए का कर्कश स्वर तो कहीं […]

कविता

मेरे भारत देश में

लगी भीड़ गद्दारों की मेरे भारत देश में। छिपा यहाँ हर कोई न जाने किस भेष में। खाते हैं जिस थाली में छेद उसी में करते हैं। भोजन गिरता थाली से नीचे फिर उस पर लपकते हैं। रखे ताक पर शिक्षा को अज्ञानी सम झूल रहे। खड़ा कर चौराहे पर माँ को अस्मिता से उसकी […]

कविता

पंखुड़ी एक गुलाब की

पंखुड़ी गुलाब की झूल रही डाल से। जुड़ने को मचल रही अपने परिवार से। ढुलका दिया हवा ने पत्तों के आसपास। श्वास उसकी चल रही मजबूत थी उसकी पकड़। नाज़ुक कोमल सी पंखुड़ी ऊर्जित थीं उसकी शिराएं। पत्र पर पड़ी-पड़ी प्राण रस ले रही। थी परीक्षा की घड़ी धैर्य संयम संग खड़ी। समय बहुत ही […]

गीत/नवगीत

उस पार सरहद के चली

उस पार सरहद के चली उड़ती पवन पंछियों संग उस पार सरहद के चली। न रोके कोई न टोके कोई गुनगुनाती चली मुस्कुराती चली। उस पार सरहद के चली। नदिया से मिलकर सागर पे लेटी बालू के कण कुछ लेती चली। इत्र उड़ाएं पंख फैलाए नटखट अदा दिखाती चली। उड़ती पवन पंछियों संग उस पार […]

लघुकथा

खोखला करती दीमक

वीराने से एक जंगल में कई सौ साल पुराना बरगद का एक वृक्ष था। उसकी लम्बी-लम्बी लटाएं धरती को छू रही थी। बूढ़े बरगद में अपार शक्ति थी। उसके भयानक रूप को देखकर लोग उसके पास जाने से डरते थे। बरगद भी बहुत अकड़ कर अपनी मूछों पर ताव देता था कि इस जंगल में कोई […]

गीत/नवगीत

गीत – अश्रु समन्दर बह जाता है 

शब्द गरल पीते ही अश्रु समन्दर बह जाता है। खारा जल कपोल पर ढुलके मन आघात दे जाता है। वाणी की महिमा को समझो हिय तराजू तोल कर बोलो। आखर आखर अर्थ भरा है विष से अमृत मोल बड़ा है शब्दों की अग्नि से झुलसा तन बदन जल जाता है। खारा जल कपोल पर ढुलके […]