लघुकथा

सिंदूर

जब भूख से व्याकुल होकर वह घरों में काम ढूंढने निकली थी। उस दौरान मेरे घर की घंटी भी उसने बजाई थी और तभी उस मूर्ति नाम की शरीर से बूढ़ी दिखने वाली दुखियारी औरत से मेरी मुलाकात हुई थी। चालीस साल की मूर्ति आज भी अपनी मांग में सिंदूर लगाए रहती है। उसके लिए जिसने […]

कविता

कविता

सत्य और झूठ की लड़ाई होनी चाहिए, नागरिकता कानून की सिकाई होनी चाहिए। हो तुम सच्चे नागरिक तो डर किस बात का, करो कुछ ऐसा देश भलाई होनी चाहिए। आँख बंद करके करो कुछ काम मत, सामने की खाई पर नजर होनी चाहिए। विचारों की धूल पर झाड़ पोंछ करके, सोचने समझने की गहराई होनी […]

कविता

स्वर्ग सा हिंदुस्तान

बहुत हो चुके बेघर अपने ही घर में हम, हम अब न सहेंगे जिंदगी में दर्दे गम। फूलों की घाटी में शूलों का राज होगा खत्म, हम हिंदुस्तानी हिंदुस्तान के नहीं हैं किसी से कम। बनाकर हर जख्म को जख्म की दवा, फूलों की घाटी में सनसनाती है हवा। ईमान को ईमान की कद्र होनी […]

कविता

भोर की बयार

 हर रोज चुपके से भोर की बयार कानों में कुछ कह जाती है खुशबू उसकी सारा दिन महका जाती है। एक दिन मैं पूछ बैठी उस बयार से पगली तू इतनी खुशबू लाती है कहाँ से ? तेरे खुशबू का भंडार नहीं होता कभी रीता हरदम महकती रहती है तू चिंता फ़िक्र परेशानी को कहाँ […]

कविता

किस हेतु तन धारण किया?

सोचो धरती पर क्यों आए किस कारण जन्म लिया? क्या कर्तव्य है तुम्हारा किस हेतु तन धारण किया? पढ़-लिख कर नौकरी की, कुछ ने व्यापार किया। धन इकट्ठा कर-कर के घर द्वार अपना भर लिया। लेकिन प्रश्न फिर भी वही किस हेतु तन धारण किया ? युवावस्था में विवाह किया बच्चों का लालन-पालन किया। पढ़ा-लिखा […]

गीत/नवगीत

धरा नई बनाते हैं

आओ मिलकर हम सब, धरा नई बनाते हैं गीत नया गाते हैं,अब गीत नया गाते हैं। जो बीत गया सो बीत गया आगे की सुध लेते हैं। धरा नई बनाते हैं अब धरा नई बनाते हैं। न रहे कोई भूखा प्यासा,न सोये फुटपाथ पर न हो धर्म भेद कहीं, न विवाद तकरार हो। चहूँ ओर जलाकर […]

कविता

यूँ ही व्यर्थ न जाने दो।

उत्साही को खुशियां ढूँढे कायर को दुख के कण। जीवन की आपाधापी में समेट लो फुर्सत के क्षण। प्यार करो हर क्षण को तुम भर देगा खुशियों से दामन। व्यर्थ करो न इसके संग को हर पल का ले लो आनंद। भर कर बाँहों में इसको अंग-प्रत्यंग निहार लो। अमूल अद्वितीय धन को यूँ ही […]

कविता

हे ! राम तुम कहाँ हो ?

हे ! राम तुम कहाँ हो ? धरती के कण-कण में तुम परती के जन-मन में तुम क्षिति-जल-पावक में तुम विचरते गगन-वात में तुम। न्यायिक पंच परमेश्वर में तुम विवादों में तुम संवादों में तुम शांति में तुम अशांति में तुम सब धर्मों में तुम कर्मों में तुम। हे ! राम तुम कहाँ हो ? […]

कविता

तृण पर ओस-बूँद सी

तृण पर ओस-बूँद सी चमकती-छलकती जिंदगी सूर्य की ओजस्वी उष्मा से अस्तित्व बचाने को तड़पती लेकर चंचल चंद्र संजीवनी श्यामल श्वेत शीतलता से संघर्षरत झिलमिलाती सी तारिका संग मुग्ध मचलती तृण पर ओस-बूँद सी चमकती-छलकती जिंदगी घिरती घनघनाती घटाओं में कपकपाती तड़ित गर्जन से प्रस्तर प्रहार सहती पग-पग संघर्ष हिंडोला झूले डगमग रिश्तों को तराजू […]

सामाजिक

असम में अनोखे चावल की खेती

जब बहुत ज्‍यादा भूख लगती है तो मिनटों में क्‍या बनाते हैं। अध‍िकतर लोगों का जवाब होगा नूडल्‍स। यदि यह कहा जाए कि एक चावल की किस्‍म ऐसी भी है। जोकि पूरी तरह प्राकृतिक है और इसे खाने के लिए पकाने की जरूरत नहीं है। जी हां! पानी भी गर्म नहीं करना। यह पूरी तरह […]