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  • हे ! राम तुम कहाँ हो ?

    हे ! राम तुम कहाँ हो ?

    हे ! राम तुम कहाँ हो ? धरती के कण-कण में तुम परती के जन-मन में तुम क्षिति-जल-पावक में तुम विचरते गगन-वात में तुम। न्यायिक पंच परमेश्वर में तुम विवादों में तुम संवादों में तुम शांति...

  • तृण पर ओस-बूँद सी

    तृण पर ओस-बूँद सी

    तृण पर ओस-बूँद सी चमकती-छलकती जिंदगी सूर्य की ओजस्वी उष्मा से अस्तित्व बचाने को तड़पती लेकर चंचल चंद्र संजीवनी श्यामल श्वेत शीतलता से संघर्षरत झिलमिलाती सी तारिका संग मुग्ध मचलती तृण पर ओस-बूँद सी चमकती-छलकती जिंदगी...


  • धरती के सूरज

    धरती के सूरज

    धरती के सूरज तुम जागो अंधकार तुम्हें पुकार रहा दे कर दुहाई पौरुष की चीत्कार रहा हुंकार रहा। डाल-डाल पर चहके पक्षी पशुओं ने आनंद श्वास लिया कमलदल विकसे तडाग में समीर ने स्वागत गान किया।...


  • रिश्तों में दीमक

    रिश्तों में दीमक

    हर तरफ विवादों की गली है रिश्तों में दीमक लगने लगी है बिखरते रिश्ते उड़ता धुआं जलने की महक आने लगी है। धीरज से रहना आता नहीं है अपनों का साथ भाता नहीं है सिकुड़ा सिमटता...

  • दीपावली

    दीपावली

    है दीपों की अवली यह दीपावली का पर्व मनाएं सब मिलजुल कर प्रेम, शांति से सहर्ष। पूजन हो घर-घर प्रिय लक्ष्मी-गणेश का राम-सीता,राधा-कृष्ण देवो के देव पार्वती महेश का। बाँटे खुशियाँ मिष्ठान्न खाएँ पटाखे बम चकरी...