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  • शरद पूर्णिमा

    शरद पूर्णिमा

    शरद पूर्णिमा की शरद रात में चमक चांदनी छिटकी हुई थी । कनक किरणों के मोह जाल में वियोगी वसुधा उलझी हुई थी। मची हलचल जलधि जल में तटिनी तट पर बेसुध बिखरी थी निहुर निहुर...

  • ख्वाहिश

    ख्वाहिश

    तिरंगे में लिपटना आसान नहीं है हर किसी के बस का यह काम नहीं है। कुछ कदम चलकर ही हम लड़खड़ा गए वो अपने कदमों के निशां बना गए। यह जन्म मानव का नहीं मिलता बार...

  • ख्वाहिश

    ख्वाहिश

    तिरंगे में लिपटना आसान नहीं है हर किसी के बस का यह काम नहीं है। कुछ कदम चलकर ही हम लड़खड़ा गए वो अपने कदमों के निशां बना गए। यह जन्म मानव का नहीं मिलता बार बार...




  • धरती का दिनमान 

    धरती का दिनमान 

    अब न होगी रात अंधेरी हरेक पग पर उजाला होगा। इस धरती के दिनमान से जीवन सबका संवरा होगा। जलेगी शिक्षा की ज्योति हर बालक मोती सम होगा। वैदिक संस्कृति से जुड़कर भारत का उद्धार होगा।...

  • सूखा पत्ता

    सूखा पत्ता

    देखकर सूखे पत्ते की सूखी उभरी नसों को याद आ गई बूढ़ी माँ छोड़ आया था जिसे नितांत अकेला सूने से कोने में कट कर जड़ों से आ बसा माया के लोभ में विधर्मी देश में।...

  • बोनसाई होता जीवन

    बोनसाई होता जीवन

    सब जगह काट-छांट अकेला होता जीवन छोटे होते परिवार खुशियों को लगता ग्रहण हो गया सब तरफ बोनसाई जीवन। जड़ों को काटकर कर दिया छोटा नहीं चाहिए धूप पानी अंधेरे कमरे गुजर-बसर होता। हर कोई अपनी...

  • रक्षा सूत्र

    रक्षा सूत्र

    पर्व यह रक्षा सूत्र का कहलाता रक्षा बंधन कोमल पवित्र पावन सा ये रिश्ता बहन भाई का बाँधकर रक्षा सूत्र भाई के रिश्ते को मजबूत बनाएं एक दूजे पर विश्वास करें हम कभी नहीं घबराएं ।...