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  • होली की दस्तक

    होली की दस्तक

    होली की दस्तक, रंग गया मस्तक, नहीं बच पाया कोई अब तक। रंगों में रंग गया, सपनों में खो गया, जिस पर रंग लगा वो ही निखर गया। कंही नगारे बजे, कंही ढोल बजे, किसी के...

  • कुछ शैलाकृतियाँ

    कुछ शैलाकृतियाँ

    कुछ शैलाकृतियाँ है जो मुझे बुला रही हैं, ढलते सुर्य को अपने दामन में छुपा रही हैं, छु रही है हर आकृति मन की आकृतियों से चुप रह कर भी ये शैलाकृतियाँ कुछ कह रही हैं।...


  • उम्मींद करता हूँ ….

    उम्मींद करता हूँ ….

    उम्मींद करता हूँ ……………………………….. उम्मींद करता हूँ हर वक्त तरसता हूँ जिन्दगी के पैमाने है उन्हीं से गुजरता हूँ। फूल भी देखता हूँ नजदीक महसुस करता हूँ उन्हें छू नहीं सकता अपने आप को कौसता हूँ।...


  • एक नई कविता बनती है,

    एक नई कविता बनती है,

    एक नई कविता बनती है, यहाँ सुर्योदय से सुर्यास्त तक सूर्य की किरणें बिखरती हैं, एक फार्म हाउस में एक नई कविता बनती हैं। पीली सरसों खेतों में चमकती हैं, मैं भी लिखता हूँ, एक नई...


  • ऐ जिन्दगी

    ऐ जिन्दगी

    ऐसी कोई बात होगी फिर से कभी कोई मुलाकात होगी पुरानी यादों से ऐ जिन्दगी फिर कोई सौगात होगी। वक्त के पुराने दौर को फिर से सवांर देना उनसे फिर रूबरू करा देना कई मित्र गुमनाम...