Author :

  • हमारा गांव

    हमारा गांव

    गाँव हमारा कितना प्यारा  लगता सब जग से न्यारा दरवाजे पर खाट डालकर बुजुर्गो की होती बैठक माँ, चाची और भौजाई मिल घर का काम करती पापा चाचा भी रोज ही निकल पड़ते अपने काम पर...

  • नादान

    नादान

    मानती हूँ मेरा दिल नादान है लेकिन मेरा प्यार नादान नही लड़ती हूं झगड़ती हूँ  मगर प्यार तुमसे ही करती हूँ  ना देखूं एक पल तुझको तो दिल बेचैन हो उठता हैं  हरदम अपने पास ही ...



  • मां

    मां

    माँ  ममता की मूरत  ऑचल मे समाहित उनके प्रेम रस की धारा बच्चो की यह दाता इनको चूने है विधाता गर्भ मे नौ माह रखती फिर बच्चो को जन्म देती बड़े प्यार से पालती माँ  अपने...


  • अखबार

    अखबार

    सुबह सुबह  जैसे ही ऑखे खोलती हूं  सब काम छोड़  अखबार ले बैठती हूं  जामाती हूं ऑखे उसपर  कहीं आज न दिख जायें  मेरे देश के सपूतो की लाशें  किसी कोने मे न मिले  बेटियो के...

  • आइसक्रीम वाले

    आइसक्रीम वाले

    सुनो भैया आइसक्रीम वाले रोज क्यो नही बेचने आते इस भीषण गर्मी को मैं  कैसे सहता हूं  मै ही जानूं  मेरी गर्मी की छुट्टी हुई पर लगता तुम चले गये  अपनी छुट्टी मनाने सुबह शाम  इंतजार...

  • मेहमान

    मेहमान

    घर आये थे मेहमान बनकर  मेरे दिल मे बस गये अरमान बनकर  पूजती रही मैं  उनको एक  देवता समझकर  हमे क्या पता कि दे देगें धोखा ये अजनबी बनकर  वही हुआ जिसका डर था नही जिसको...

  • तरबूज

    तरबूज

    गर्मी के दिनों  मे ये फल  बच्चे के मन को भाता है पापा के घर आने से पहले अपनी फरमाईस सुना देते है ले आना आज पापा मेरे वो प्यारा प्यारा तरबूज  पापा भी बच्चो की...