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  • दीप जलायें

    दीप जलायें

    चलो एक दीप जलायें मन के किसी कोने मे तिमिर को भगाकर उजाला लाये उस कोने मे राग द्वेष से भरे पड़े है दिल और दिमाग जो कूंठित हुये है सब को निकाल बाहर फेके ज्योति...

  • खत

    खत

    एक एक करके मिटते जा रहे है मेरे डायरी मे लिखा हुआ तुम्हारे नाम के खत का आखर उन तितलियों के भॉति जो किसी फूल के मकरंद का रसपान कर उड़ जाती हैं और फूल जहॉ...


  • जीना चाहती हूँ

    जीना चाहती हूँ

    हॉ मै जीना चाहती हूँ लेकिन तुम्हारे अधीन रहकर नही स्वतंत्रत होकर सभी बंधन से मुक्त होकर आखिर मेरे लिये ही सभी बंधन बने है तुम्हारे लिये कुछ नही तो आज सुन लो अब से मै...



  • हम भारतवासी है

    हम भारतवासी है

    हम भारतवासी है यह सबको बताने आता है अपने देश के लिये हमे खुन बहाने आता है मिली है हमे आजादी लेकिन कुछ अभी भी बाकी है उसे पूरा करने के लिये हमे हथियार उठाने आता...



  • राख

    राख

    क्या रखा इस जीवन में क्यों इतराना इस दुनिया में एक दिन तो खाक होना हैं फिर क्यो लड़ते है आपस में है क्यों अभिमान खुद पर नही रखते दया भाव किसी पर सब एक जगह...