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  • राख

    राख

    क्या रखा इस जीवन में क्यों इतराना इस दुनिया में एक दिन तो खाक होना हैं फिर क्यो लड़ते है आपस में है क्यों अभिमान खुद पर नही रखते दया भाव किसी पर सब एक जगह...


  • बेटी

    बेटी

    तेरे पायल के छन छन की आवाज आज भी मेरे कानों मे गूँजते रहतें हैं तेरे पैरो के महावर से घर मे पड़ी छाप को उसी तरह सुरक्षित रखी हूँ जिस तरह तुम मेरे घर मे...

  • स्वच्छता

    स्वच्छता

    आओ बच्चे तुम्हे बताये स्वच्छता का निति अपनाये रोज सबेरे उठकर ब्रश से दॉत साफ करे पानी से हाथ पैर धोकर टॉवेल से पोछ सुखाया करे खेल कूद कर जब घर आये साबून से हाथ धोकर...


  • मुझे पता था

    मुझे पता था

    मुझे पता था एक दिन बंद कर दोगे मेरे जबान को जिस दिन मै  अपनी आवाज उठाऊगी  नही कहने दोगे मेरी बात  इसी कारण तो लूट कर अस्मत  घूमते फिरते हो शहर बाजारो मे  और मै...

  • नेता

    नेता

    गये जमाने उन नेताओ की जो जनता को समझते थें उनके एक आवाज पर अपनी दस आवाज उठाते थे मर मिटते देश के लिये नही किसी से डरते थे सादा लिबास मे रहकर अपना परिचय बतलाते...


  • हमारा गांव

    हमारा गांव

    गाँव हमारा कितना प्यारा  लगता सब जग से न्यारा दरवाजे पर खाट डालकर बुजुर्गो की होती बैठक माँ, चाची और भौजाई मिल घर का काम करती पापा चाचा भी रोज ही निकल पड़ते अपने काम पर...

  • नादान

    नादान

    मानती हूँ मेरा दिल नादान है लेकिन मेरा प्यार नादान नही लड़ती हूं झगड़ती हूँ  मगर प्यार तुमसे ही करती हूँ  ना देखूं एक पल तुझको तो दिल बेचैन हो उठता हैं  हरदम अपने पास ही ...