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  • मुक्तक- आँचल

    मुक्तक- आँचल

    सूरज की तरह लगे मुझे माँ का #आँचल, करता रहता रोशन मुझे हरदम, मैं सूरज ना सही चिराग़ बनकर तो, कर सकती हूँ घर को रोशन हरदम। — नूतन गर्ग (दिल्ली) परिचय - नूतन गर्ग दिल्ली...

  • एक वृक्ष की क़ीमत

    एक वृक्ष की क़ीमत

    कक्षा में अध्यापक जी बच्चों को वृक्ष की उपयोगिता के बारे में बता रहे थे…. “बच्चों क्या तुम्हें पता है? अगर एक पेड़ पचास साल जीता है तो वह हमें क्या देकर जाता है?” “नहीं सर”...

  • अनजान डर

    अनजान डर

    घंटी बजती है रम्या दौड़कर जाती है “अरे पोस्टमास्टर अंकल आप।” “हाँ भई ख़ुशख़बरी है जल्दी से इनाम लाओ।” पोस्टमास्टर जी ख़ुश होते हुए बोलते हैं। “अरे क्या हुआ? मैं भी तो देखूँ” माँ कहती हुई...


  • बंद ताले की चाबी

    बंद ताले की चाबी

    बंद ताले की चाबी हे भोले बाबा दे दो वरदान मुझे, फिर से चुना जाऊँ इस गद्दी के लिए, जो काम अधूरा रह गया मेरा, समय रहते जीवन में कर जाऊँ पूरा।। हर ताले की चाबी...

  • नसीब

    नसीब

    “मेमसाहब दस रूपये दो ना कुछ सुबह से नहीं खाया बड़ी भूख लगी है।” सड़क पर भीख माँगता हुआ एक सात साल का बच्चा तरसती निगाहों से। लीना ने गाड़ी एक कोने में करी और बच्चे...

  • अनोखी राजनीति

    अनोखी राजनीति

      शब्दों के तीर चलाते, बाणों की वर्षा करते, आते चार साल बाद करने मानवता के मन का शिकार, देखो-देखो वे कैसे हैं मतलबी शिकारी ? दूर तक बजाते जाते अपनी ढपली अपना राग, हर किसी...

  • माँ का ऋण

    माँ का ऋण

    माँ तूने किये हैं इतने उपकार मुझपर, जिसका ना हिसाब कभी रख पाऊँगी, चाहे जीवन भर कर लूँ सेवा मैं तुम्हारी, फिर भी ना कभी यह ऋण तेरा चुका पाऊँगी।। सारा बचपन तेरी गोद में बीता,...

  • ज़िद्दी परिंदा इंसान

    ज़िद्दी परिंदा इंसान

      “उम्मीदों से बँधा एक ज़िद्दी परिंदा है इंसान, जो घायल भी उम्मीदों से है और ज़िंदा भी उम्मीदों पर है।” कैंसर अपने आख़िरी पड़ाव पर पहुँच गया था परंतु रामशरण जी अभी भी इसी उम्मीद...