सामाजिक

छुअन अत्याचार/ शारीरिक शोषण

छुअन अत्याचार एक जघन्य अपराध है और यह दिन प्रतिदिन बहुत बढ़ता जा रहा है। अगर हम आज भी नहीं जागे तो यह समस्या हमारे सामने एक दिन अपने भयावह रूप में आकर खड़ी हो जाएगी। आज के बदलते परिवेश में महिलाओं को चारों तरफ़ से आँख खोलकर चलने की ज़रूरत है क्योंकि आज की […]

बाल कहानी

बालकथा – आघात

“माँ मैं कल से स्कूल नहीं जाऊँगा।” स्कूल से आते ही मानू बस्ता रखते हुए कहता है। “क्यों?” माँ ने प्रश्न किया बिना कुछ कहे चुपचाप अपने कमरे में चला जाता है। माँ भी पीछे-पीछे जाती है पर! वह दरवाज़ा माँ को अंदर लिए बग़ैर ही बंद कर देता है। माँ बहुत देर तक दरवाज़ा […]

कहानी

मृगतृष्णा

मृगतृष्णा एक छोटी मासूम सी लड़की, आँखों में कई सपने सँजोए हुए, अपनी ज़िंदगी की बढ़ती रफ़्तार को क़ाबू में किये हुए, एक मुक़ाम तक पहुँचने की इच्छा रखती थी। वह उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में रहती थी। उस समय पर गाँव में लड़कियों को ज़्यादा पढ़ाया-लिखाया नहीं जाता था। बस यह […]

कविता

पत्र जो लिखा पर भेजा नहीं

लिख दिया ग़मों को, मैंने एक पत्र में, मन हल्का कर लिया, समय के रहते जीवन में। लिख दिया ख़ुशी के पलों को, मैंने एक पत्र में, मन खुश कर लिया, समय के रहते जीवन में। दोनों रहते सदा साथ हमेशा, आते रहते बारी-बारी, इसी का नाम तो जीवन है, क्या लिखूँ अब पत्र में […]

लघुकथा

अर्द्धांगिनी

सुबह सूरज़ की पहली किरण के साथ ही उठ जाना और अपने-अपने काम में लग जाना यही क्रम रोज़ का होता था उदय और नीना का। नीना एक घरेलू औरत थी वहीं उदय नौकरीपेशा वाला। परंतु उदय कभी नीना को घरेलू औरत नहीं मानता था वह हमेशा कहता कि घर में रहना और बच्चों को […]

आत्मकथाएं

विंती पुस्तक की

नए ज़माने के नवयुवकों, यूँ मेरी पहचान न मिटाओ तुम, मेरा स्थान मेरा ही रहने दो, उस जगह न किसी और को बिठाओ तुम। कल तक पुस्तकालयों की शोभा थी मैं, न उन पर धूल जमाओ तुम, बचा लो वज़ूद मेरा इस जहाँ में, कर रही फ़रियाद हाथ जोड़ तुमसे मैं आज। माना आगे बढ़ना […]

कविता

हाथ जोड़ विनती पुस्तक की

नए ज़माने के नवयुवकों, यूँ मेरी पहचान न मिटाओ तुम, मेरा स्थान मेरा ही रहने दो, उस जगह न किसी और को बिठाओ तुम। कल तक पुस्तकालयों की शोभा थी मैं, न उन पर धूल जमाओ तुम, बचा लो वज़ूद मेरा इस जहाँ में, कर रही फ़रियाद हाथ जोड़ तुमसे मैं आज। माना आगे बढ़ना […]

कविता

माँ के चरणों में भक्त का विनम्र निवेदन

माँ के चरणों में भक्त का विनम्र निवेदन होंठों पे माँ बस तेरा ही नाम है, तुझे इक पल तो आना पड़ेगा, ग़म किसको सुनाऊँ मैं मइया , अब तुझको तो सुनना पड़ेगा । मेरा तेरे सिवा कौन है माँ , तेरी दासी ने तुझको पुकारा , रूठ जाना न मुझसे तू मइया , नहीं […]

लघुकथा

एक वृक्ष की क़ीमत

कक्षा में अध्यापक जी बच्चों को वृक्ष की उपयोगिता के बारे में बता रहे थे…. “बच्चों क्या तुम्हें पता है? अगर एक पेड़ पचास साल जीता है तो वह हमें क्या देकर जाता है?” “नहीं सर” कक्षा में जोर से आवाज़ आई! “चलो तो इसे समझते हैं।” अध्यापक जी बोलते हैं.. “एक पेड़ हमें क़रीब […]