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  • मृगतृष्णा

    मृगतृष्णा

    मृगतृष्णा एक छोटी मासूम सी लड़की, आँखों में कई सपने सँजोए हुए, अपनी ज़िंदगी की बढ़ती रफ़्तार को क़ाबू में किये हुए, एक मुक़ाम तक पहुँचने की इच्छा रखती थी। वह उत्तर प्रदेश के एक छोटे...


  • अर्द्धांगिनी

    अर्द्धांगिनी

    सुबह सूरज़ की पहली किरण के साथ ही उठ जाना और अपने-अपने काम में लग जाना यही क्रम रोज़ का होता था उदय और नीना का। नीना एक घरेलू औरत थी वहीं उदय नौकरीपेशा वाला। परंतु...

  • विंती पुस्तक की

    विंती पुस्तक की

    नए ज़माने के नवयुवकों, यूँ मेरी पहचान न मिटाओ तुम, मेरा स्थान मेरा ही रहने दो, उस जगह न किसी और को बिठाओ तुम। कल तक पुस्तकालयों की शोभा थी मैं, न उन पर धूल जमाओ...



  • मुक्तक- आँचल

    मुक्तक- आँचल

    सूरज की तरह लगे मुझे माँ का #आँचल, करता रहता रोशन मुझे हरदम, मैं सूरज ना सही चिराग़ बनकर तो, कर सकती हूँ घर को रोशन हरदम। — नूतन गर्ग (दिल्ली) परिचय - नूतन गर्ग दिल्ली...

  • एक वृक्ष की क़ीमत

    एक वृक्ष की क़ीमत

    कक्षा में अध्यापक जी बच्चों को वृक्ष की उपयोगिता के बारे में बता रहे थे…. “बच्चों क्या तुम्हें पता है? अगर एक पेड़ पचास साल जीता है तो वह हमें क्या देकर जाता है?” “नहीं सर”...

  • अनजान डर

    अनजान डर

    घंटी बजती है रम्या दौड़कर जाती है “अरे पोस्टमास्टर अंकल आप।” “हाँ भई ख़ुशख़बरी है जल्दी से इनाम लाओ।” पोस्टमास्टर जी ख़ुश होते हुए बोलते हैं। “अरे क्या हुआ? मैं भी तो देखूँ” माँ कहती हुई...