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  • तर्पण

    तर्पण

    नवीन गुप्ता जी हर साल कनागतों में आने वाली अमावस्या को बहुत बड़ा भंडारा रखते । आज़ भी उन्होंने भंडारा रक्खा हुआ था । पूरे शहर से ग़रीबों की लाईन लगी थी । वे सबको खाने...

  • गाँधीं जयंती पर कविता

    गाँधीं जयंती पर कविता

    सत्य और अहिंसा का दूसरा नाम था बापू …….. शरीर से दुबले – पतले लेकिन आत्मा के महान थे बापू , शरीर पर सिर्फ़ धोती धारण करते पर दिल के धनी थे बापू , अपनी बात...

  • दिशा भ्रम

    दिशा भ्रम

    अपनेआप और अपनों से प्रेम चन्द्रप्राल जी को दिल का दौरा पड़ता है और वो गिर जाते हैं ! थोड़ी देर बाद वो अपने आपको एक ऐसे स्थान पर पाते हैं जहाँ सब कुछ मौन है...


  • उत्सव के रंग त्योहारों के संग

    उत्सव के रंग त्योहारों के संग

    भारत के हर प्रांत में त्योहारों का अपना महत्व है और सब ऐसे मनायें जाते हैं जैसे कोई उत्सव हो रहा हो। सभी अपने – अपने तरीक़े से इन त्योहारों को मनाते हैं। अच्छा है कुछ...


  • अटल जी को श्रद्धांजली

    अटल जी को श्रद्धांजली

    किसने खोया किसने पाया धरा पर थी ग़म की लहर, स्वर्ग पर थी ख़ुशी की लहर। भारत ने खोया अनमोल रत्न, स्वर्ग ने पाया अनमोल रत्न ।। किसने खोया किसने पाया…… ना जाने कहाँ छिप गया...

  • आज़ादी

    आज़ादी

    कर लो नमन उनको, जिन्होंने दिलाई आज़ादी हमको। क्या वाक़ई हम आज़ाद हुए हैं? या अपने ही अपनो को मार रहे हैं। बँट गया भारत माँ का कलेज़ा, तर-बितर छितरा हुआ सा।। कर लो नमन उनको...

  • कपटी बाबा

    कपटी बाबा

    “इतनी जल्दी आ गई?” माँ ने रेनू से पूछा “हाँ माँ ! बड़ी मुश्किल से निकल पाई !” रेनू बोलते हुए माँ से लिपटकर रोने लगती है घबराते हुए माँ पूछती है “एैसा क्या हो गया...