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  • सावन मनभावन महीना

    सावन मनभावन महीना

    सावन का महीना बहुत पावन महीना कहलाता है। चारों ओर हरियाली और बारिश की हल्की -हल्की फुँआरें मन में एक नई उमंग पैदा करती हैं क्योंकि हमें भयंकर ताप से मुक्ति मिलती है। चारों ओर से...

  • “चॉद और धरा “

    “चॉद और धरा “

    चन्द्रगृहण पर कुछ पँक्तियॉ….. चॉद कहे धरा से थोड़ा सा तो खिसक ले , कर लूँ दीदार मैं भी अपने चमन का, अब कुछ घुटन सी होने लगी है मन पर, कहीं मैं होकर निढाल गिर...

  • समाज (भाई भाई)

    समाज (भाई भाई)

    अनिल और यूसुफ़ दोनों सीनियर सिटीज़न पार्क में रोज़ मिलते थे । घंटों बातें करते रहते फिर घर चले जाते । रोज़ यही सिलसिला चलता रहता । आज भी वे दोनों मिले पर अनिल ख़ुश नहीं...

  • आकाश से ऊपर

    आकाश से ऊपर

    नीलिमा अपने घर में बैठी सोच में डूबी हुई जैसे सारा क़िस्सा अभी हाल में ही हुआ हो।पीछे की ज़िन्दगी में जाती है ….. घर में काम करने वाली शांता बाई नें एक दिन अपनी बेटी...

  • उड़ान बाक़ी है

    उड़ान बाक़ी है

    सरिता पचास साल पूरे कर चुकी थी आज उसका जन्मदिन था । बालकनी में बैठी अपने जीवन का ऑकलन कर रही थी !! क्या पाया-क्या खोया? अब आगे क्या -क्या करना है ? कितनी जल्दी दिन...