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  • सब चाहते हैं

    सब चाहते हैं

    सब चाहते हैं साथ यौवन का। किसने साथ निभाया बचपन का। छूट गईं सखियां छूट गये बाग बगीचे, तैरते हैं ख़्वाब कजरारी पलकों के नीचे, इंतज़ार है मनचाहे साजन का। किसने साथ निभाया बचपन का। चलते...

  • ग़ज़ल – शहर

    ग़ज़ल – शहर

    कोहरे की चादर मे लिपटा शहर। अपने ही दायरे मे सिमटा शहर। अपने मे गुम, मुंह फेर के बैठा है, न जाने किस बात पे रुठा शहर। दिल की मानिंद,धड़कता था कभी, पत्थरों के कैदखाने मे...


  • ख़ामोशी

    ख़ामोशी

    जरा सोचना  तन्हाई में,खामोशी क्या  कहती है। मजलूम के होंठों  में दबी  चुप्पी  क्या  कहती है। अपने सपनों की खातिर, तुम जो  छोड आये हो, वो नदियाँ , वो गाँव की पगडण्डी क्या कहती है। आज...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कहीं हिन्दुओं का, कहीं बसेरा मुसलमानों का। मैं तो समझा था यारब, ये शहर है इन्सानों का। कभी चहकती थी बुलबुलें, दरख्तों की शाखों पे, अब है हदे निगाह, जंगल, पत्थर के मकानों का। हर जानिब...

  • शहीद

    शहीद

    कल रात मेरे सपने मे /आजाद भगत सिंह आए/ऐसे वीर शहीदों को/सम्मुख पाके हम हर्षाए हम बोले हे वीर शहीदों/अपने कदमो की थोड़ी सी रज दे दो/ मेरा जीवन सफल हो जाएगा/ मै भी कुछ देश...