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  • किनारा

    किनारा

    यूँ  जी  रहा , लाख  टूट  टूट  के  बिखरा हूँ मैं। मेरा  जीवन  कुन्दन,  जल  के  निखरा  हूँ मैं। हर   कदम   पे   साहस  ने  थामा  है  मन  को, एक  नया  संदेश  पाया,  जब  भी  गिरा हूँ...

  • साजिशें

    साजिशें

    अंधेरों ने  की है  साजिशें, मिल  के  हवाओं के साथ। दिया हूँ जलता  रहूँगा, दोस्तों की  दुआओं  के साथ। हो   के   रहेगा   बरबाद,  अब   दिल   का  अंजुमन, बर्क की  अदायें  भी है, जुल्फों की घटाओं के...

  • पैगाम

    पैगाम

    जिंदगी  है  बेवफा,  मुझे  जिंदगी  से  डर लगता है। जाने  कौन  हो   रहजन, आदमी  से  डर  लगता है। जाने कौन सा खुशी का पैगाम,जिंदगी में तूफां लाये, गम  से  है  याराना, अब  खुशी  से   डर  लगता ...

  • इंसाफ

    इंसाफ

    हवाओं  में  कितना जहर घुला है यारों। शहरों से  तो  ये  जंगल  भला  है यारों। दो  कदम  तुम , दो  कदम  हम भी चले, बस  इतना  ही   तो  फासला  है  यारों। वक्ते  जुदाई  एक  बार न...

  • एक  युग  बीता

    एक  युग  बीता

    श्रध्येय अजर अमर आत्मा श्री गोपाल दास नीरज जी की स्मृति में एक  युग  बीता, इतिहास  रचकर चला गया। तिशनगी  बाकी  रही,  वो समन्दर  चला गया। जिस  को पढ  के,सुन के, हम ने गढना सीखा, शब्दों...

  • उस  पारे  बरसे

    उस  पारे  बरसे

    उस  पारे  बरसे , हम  से  निर्मोही  हो  गए बादल। तरस  रही  अँखियाँ,  के  परदेशी  हो  गए बादल। पहाड़ों   से  जूझ   रहे,  करते   नई   अठखेलियाँ, पुरवाई की  सुनते  नही, विद्रोही  हो  गए  बादल। हम तो  समझे ...


  • सब चाहते हैं

    सब चाहते हैं

    सब चाहते हैं साथ यौवन का। किसने साथ निभाया बचपन का। छूट गईं सखियां छूट गये बाग बगीचे, तैरते हैं ख़्वाब कजरारी पलकों के नीचे, इंतज़ार है मनचाहे साजन का। किसने साथ निभाया बचपन का। चलते...

  • ग़ज़ल – शहर

    ग़ज़ल – शहर

    कोहरे की चादर मे लिपटा शहर। अपने ही दायरे मे सिमटा शहर। अपने मे गुम, मुंह फेर के बैठा है, न जाने किस बात पे रुठा शहर। दिल की मानिंद,धड़कता था कभी, पत्थरों के कैदखाने मे...