गीतिका/ग़ज़ल

न करो रब से गिला

न करो रब से गिला, तोहफे कमतर मिले। जो भी पाया, वो हसीन लम्हें बेहतर मिले। आओ मिल के इन परींदों के ख्वाब सजा दे, कोई न फिरे खानाबदोश, हरेक को घर मिले। क्या पता,कल इन्हीं रास्तों से गुजरना पडे, चुन लो इन राहों से, जो भी काँटे, पत्थर मिले। क्यों करें शिकायत, कौन यहां […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

गर   इस  जहान  में गर  कहीं  भी  खुदा होगा। यकीनन   वो   गूंगा,  अंधा  और  बहरा  होगा। उस  के  हौसले   इस   बूते पे  ही  तो  बुलंद हैं, के यहाँ   का   हरेक   पहरेदार  सो  रहा होगा।  रो लो दो घडी, सब मिल के जला लो शमाँ भी, इस   तरतीब   से   कहां   इंसाफ  भला  होगा। इस   खामख्याली  में  […]

गीत/नवगीत

किस मोड़ पे आ के खडी है जिंदगी

किस मोड़ पे आ के खडी है जिंदगी। ख़्वाबों की लाश लगती है जिंदगी। बिकने लगे हैं सत्य और ईमान इन दिनों, कैसे होगी अच्छे बुरे की पहचान इन दिनों, फरेब के साये में पलती है जिंदगी। किस मोड़ पे आ के खडी है जिंदगी। अस्मत के सौदे बने मुफलिसी की जरुरतें, हर उसूल से […]

गीतिका/ग़ज़ल

सबको है गुमां

सबको है गुमां, मगर, मुकम्मल कोई नहीं। सूने पडे पनघट, चहलपहल कोई नहीं। दूर तक कोई शजर नही, कोई आसरा नही, तपती दुपहरी में छावं दे, आँचल कोई नहीं। गरज की नींव पे तामिर हर एक मरासिम, न हम किसी के, हमारा भी, आजकल कोई नहीं। हर एक का दावा है, अपनी पाक मौहब्बत का, […]

गीतिका/ग़ज़ल

किनारा

यूँ  जी  रहा , लाख  टूट  टूट  के  बिखरा हूँ मैं। मेरा  जीवन  कुन्दन,  जल  के  निखरा  हूँ मैं। हर   कदम   पे   साहस  ने  थामा  है  मन  को, एक  नया  संदेश  पाया,  जब  भी  गिरा हूँ मैं। उम्र  भर   बगिया   से   मै   फूल   चुनता  रहा, इन  काँटों  के  पास  भी  दो  पल  ठहरा हूँ मैं। […]

गीतिका/ग़ज़ल

साजिशें

अंधेरों ने  की है  साजिशें, मिल  के  हवाओं के साथ। दिया हूँ जलता  रहूँगा, दोस्तों की  दुआओं  के साथ। हो   के   रहेगा   बरबाद,  अब   दिल   का  अंजुमन, बर्क की  अदायें  भी है, जुल्फों की घटाओं के साथ। ये आजकल  का नया  सलीका है  इन  कातिलों का, निगाहों  में खंजर  भी  है  मासूम  अदाओं  के साथ। […]

गीतिका/ग़ज़ल

पैगाम

जिंदगी  है  बेवफा,  मुझे  जिंदगी  से  डर लगता है। जाने  कौन  हो   रहजन, आदमी  से  डर  लगता है। जाने कौन सा खुशी का पैगाम,जिंदगी में तूफां लाये, गम  से  है  याराना, अब  खुशी  से   डर  लगता  है। रुसवाईयाँ    मिलेगी,   तँन्हाईयाँ   मिलेगी   इस   में, हुस्न  से  तौबा  खुदाया, आशिकी  से डर  लगता है। अब के  […]

गीतिका/ग़ज़ल

इंसाफ

हवाओं  में  कितना जहर घुला है यारों। शहरों से  तो  ये  जंगल  भला  है यारों। दो  कदम  तुम , दो  कदम  हम भी चले, बस  इतना  ही   तो  फासला  है  यारों। वक्ते  जुदाई  एक  बार न देखा मुड के, ये कैसा चाहत का  सिलसिला है यारों। हाथ में  पत्थर लिए  इंसाफ के  देवता, मगर  यहाँ […]

गीतिका/ग़ज़ल

एक  युग  बीता

श्रध्येय अजर अमर आत्मा श्री गोपाल दास नीरज जी की स्मृति में एक  युग  बीता, इतिहास  रचकर चला गया। तिशनगी  बाकी  रही,  वो समन्दर  चला गया। जिस  को पढ  के,सुन के, हम ने गढना सीखा, शब्दों का  वो  चित्रकार वो  रहबर  चला गया। गीतों के  मदिर  फूलों  से  महकेगी  ये दुनिया, कलियों  पे  गुंजन  करता […]

गीतिका/ग़ज़ल

उस  पारे  बरसे

उस  पारे  बरसे , हम  से  निर्मोही  हो  गए बादल। तरस  रही  अँखियाँ,  के  परदेशी  हो  गए बादल। पहाड़ों   से  जूझ   रहे,  करते   नई   अठखेलियाँ, पुरवाई की  सुनते  नही, विद्रोही  हो  गए  बादल। हम तो  समझे  के  आये  है  तो  ठहरेंगे चार दिन, दो पल में ही ओझल  हुए , बटोही हो गए बादल। प्यासे […]