गीतिका/ग़ज़ल

इंसाफ

हवाओं में कितना जहर घुला है यारो। शहरों से तो ये जंगल  भला है यारो। दो कदम तुम ,दो कदम  हम भी चले, बस इतना ही तो फासला है यारो। वक्ते जुदाई एक बार न देखा मुड के, ये कैसा चाहत का  सिलसिला है यारो। हाथ में पत्थर लिए  इंसाफ के देवता, मगर यहाँ कौन […]

गीत/नवगीत

मजदूर

अपने खुदगर्ज सवालो से डर लगता है। बच्चों के मासूम सवालों से डर लगता है। जो आज हुआ बाजारों में,क्या वही कल होगा। बच्चे तरसेंगे रोटी को,क्या बंद सफल होगा। मजदूर है जी,हडतालों से डर लगता है। जमीर ऐसा गोया कि हाथों से  फिसलती रेत। रक्षक ही भक्षक बने,बागड खा गई खेत। यारब,अब तो घोटालों […]

गीतिका/ग़ज़ल

ऐ जिंदगी

न ही कुछ जोडा,न ही कुछ  घटाया,ऐ जिंदगी। जैसी भी मिली उसी तरह  निभाया,ऐ जिंदगी। रोती रही रातों में,शबनम मेरी  बेबसी पे, रूठे ख्वाबों को थपकी दे के सुलाया,ऐ जिंदगी। कभी मिले खुशी के गीत कभी बेबसी के नग्में, हर लम्हाँ गीतों सा,गुनगुनाया,ऐ जिंदगी। खुद ही ओढ लिया घबरा  के,गम का क़फ़न, कतरा कतरा साँसों […]

गीतिका/ग़ज़ल

काठ के खिलौनों ने

धँसी आँखें,पिचके पेटों को ,फिर सुनाया भाषण। काठ के खिलौनों ने पढा,रटा रटाया भाषण। रात हुई बारिश,टपकता रहा टूटा छप्पर, रात भर हम ने भी ओढा और बिछाया भाषण, गरीबी वरीबी कुछ भी नही,जेहनी बीमारी है, साहिबे निजाम ने कडवी दवा सा पिलाया भाषण कोई फिरका ,कोई तबका, वो फर्क नही करते, हुई हैं तरक्की,हरेक […]

गीत/नवगीत

तुम्ही तो हो

सनम तुम हो तो मै हूँ, तुम से है वजूद मेरा। तुम हो भोर की किरण, तुम्ही हो रोशन सबेरा। तुम्ही हो सरमाया ए हयात, जीवन की पतवार तुम। तुम्ही से जुडी सारी आशाये, मेरे प्यार का आधार तुम। तुम दिल की हो धडकन तुम से है वजूद मेरा। मिले थे अजनबी बन के, वो […]

गीत/नवगीत

दिल का शीशा

दिल का शीशा ऐसे टूटा, उनकी खुशी रह गई। शायद मेरी ही चाहत मे, कोई कमी रह गई। जिंदा हूं कांधों पे, वफ़ा की लाश लिये, उन्हें क्या कोई मरे,या कि कोई जिए, उठा लिये गम कि पलकों पे नमी रह ग्ई। शायद मेरी ही चाहत मे कोई कमी रह गई। सहमी हुयी धड़कनों को,करार […]

गीतिका/ग़ज़ल

गठबंधन

नया गठबंधन है, नए रिश्तों की शुरुआत भी। खुशनुमा माहौल है, महक रहे जज्बात भी। जागती आँखें, देख रही आज, इन्द्रधनुषी सपनें, तुम मिले, हो गए, सोने से दिन, चाँदी सी रात भी। हम थे कभी अजनबी, जन्मों के हमसफर बने, राह में फूल बिछे,सजी है सितारों सी बारात भी। सब कुछ था, फिर भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कभी वक्त तो कभी जिंदगी मयस्सर नही। हम है ऐसे नामुराद,कोई खुशी मयस्सर नही। जितना तुम्हें चाहिए, मुझ से मेरा वक्त, के उतना तो खुद मुझे भी मयस्सर नही। हम ने उसे फ़कत तस्वीरों में ही देखा है, जिंदा रहे धूप के साये में, चाँदनी मयस्सर नही। जिस का जिक्र हो कभी, यारों की अंजुमन […]

गीतिका/ग़ज़ल

किरदार

कभी रकीब तो कभी मतलबी यार हुए। लिबास की तरह अब के किरदार हुए। न ही रंग है कोई, न खुशबू के  आसार है, हदे निगाह कागज के ही गुलजार हुए। फिरते है रावण यहां,राम की  सूरत लिए, इन्सानियत के रिश्ते भी तार तार हुए। कल शब एक हसीं ख्याल से रुबरु हुए, बेकली के […]

कविता

माँ

समय की तेज धारा में खो दिया, वो सौगात वो दौलत याद आती हैं। अकसर तन्हाँ तन्हाँ रातों में मुझको माँ तेरी प्यारी  सूरत याद आती हैं घर देरी से अाने पर वो डाँटना तेरा पापा की मार से फिर बचा लेना मुझे अकसर बच्चों को डाँटता हूँ तब तब तेरी वो सारी नसीहत याद […]