Author :

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कहीं हिन्दुओं का, कहीं बसेरा मुसलमानों का। मैं तो समझा था यारब, ये शहर है इन्सानों का। कभी चहकती थी बुलबुलें, दरख्तों की शाखों पे, अब है हदे निगाह, जंगल, पत्थर के मकानों का। हर जानिब...

  • शहीद

    शहीद

    कल रात मेरे सपने मे /आजाद भगत सिंह आए/ऐसे वीर शहीदों को/सम्मुख पाके हम हर्षाए हम बोले हे वीर शहीदों/अपने कदमो की थोड़ी सी रज दे दो/ मेरा जीवन सफल हो जाएगा/ मै भी कुछ देश...





  • पगडण्डीयाँ

    पगडण्डीयाँ

    काश के सपनों के गांव में होतीं पगडण्डीयाँ। पांव पांव चलते और पा लेते खुशीयाँ। पर्वत पर्वत फूल खिलाते होते साथ साथ, चांदनी को समेटे हम करते अठखेलियाँ। गहरे पानी में मोती मिलेंगे धीरज न खोना,...

  • गुमराह

    गुमराह

    जो थे गुमराह कभी वही राहबर बन गये। तमाम फूल जिंदगी के पत्थर बन गये। दूर तलक दरख़्तो के साये नही, बुलबुलों की मीठी सदाएं नहीं, मीलों तक बस पत्थरों के घर बन गये। ये कैसा...

  • दीपशिरवा

    दीपशिरवा

    भोर तक उजालों के उपहार बांटती रही पागल पवन से न घबराई दीपशिखा। रुठे मन का अवसाद न जाने कहां खो गया मेंहदी रचे हाथों ने जब जलाई दीपशिखा। मन में नन्ही नन्हीं उमंगों के गीत...

  • माँ

    माँ

    समय की तेज धारा में खो दिया, वो सौगात वो दौलत याद आती हैं। अकसर तन्हाँ तन्हाँ रातों में मुझको माँ तेरी प्यारी  सूरत याद आती हैं घर देरी से अाने पर वो डाँटना तेरा पापा...