गीतिका/ग़ज़ल

लक्ष्य

लक्ष्य थोड़ा बडा था मगर, हम विजयी हुए। झुक गए, पर्वत सागर, हम विजयी हुए। दिशा दिशा महक रही है,हवा हुई बावरी, आशादीप जले घर घर, हम विजयी हुए। नाचो और गाओ,बरसों की साधना पूरी हुई, झूम रहे धरती अंबर,हम विजयी हुए। बूंद बूंद सागर बने के राई राई पर्वत, अपनी एकता के बल पर, […]

गीतिका/ग़ज़ल

सपनों के पनघट पे

दो पल  सपनों के  पनघट  पे ठहरा करो। पलकों की मुंडेरों से,अंतर्मन में झाँका करो। बहुत प्यासे है हम प्यार की बूंद बूंद को, प्रीत की घटा मेरे आँगन भी बरसा करो। ह्रदय में प्रीत का मोती छुपा रखा है मैंने, तुम उथले सागर की सीपियाँ न माँगा करो। शहर का नीम अन्धेरा, सन्नाटा, बेकल […]

गीतिका/ग़ज़ल

रूठ गए बदरा

रूठ गए  बदरा दिन  फुहारों  में गुजरा। फूल न थे,जीवन फकत खारों में गुजरा। कभी कभी अपने गाँव की भी सुध लो, मासूम बचपन,जिन गलियारों में गुजरा। मिलने आना है, वो वादा कर के भूल गए, अपना सारा वक्त चाँद सितारों में गुजरा। हर  लम्हा  हम  उस  पल को  ढूंढते  रहे, आया न पलट के,जो […]

गीत/नवगीत

जिंदगी में

ठहरी जिंदगी में आए, तुम बनके सुखद स्पंदन। बबूल से कटीले पल, हो गए चंदन चंदन। तुमने प्यार से दस्तक दी, भावना की देहरी पे। खुशियों के बादल घुमड़ने लगे,मेंरी जिंदगी पे। तुम्हारे प्यार का पारस, कर गया मुझे कंचन। बबूल से कंटीले पल, हो गये चंदन चंदन। बरसते मौसम ने यूं, शरबती रंग उछाले। […]

गीतिका/ग़ज़ल

अभी रुकना नहीं है

बहुत  दूर  जाना  है  के  अभी  रूकना नहीं है। तूफां  तो  बहुत  आयेंगे, राही  झुकना  नहीं है। खुशियों  के  पल  बाँटेंगे  हम  तो  हर  एक  से, दर्द का फ़साना कभी किसी से कहना नहीं है। बढते   रहो   मुसलसल,  तरक्की   की  राह में, मैं  रहूँ  या  न  रहूँ,  ये  कारवाँ  थमना  नहीं है। हर  लम्हें  को  […]

गीतिका/ग़ज़ल

शीशे सा दिल मेरा

शीशे सा दिल मेरा तोड़ दिया,अब तो खुश हो ना। अश्कों से मेरा रिश्ता जोड़ दिया, अब तो खुश हो ना। अब न तकरार होगी, न कोई शिकायत करेगा, मैंने दर्द का कफन ओढ लिया, अब तो खुश हो ना। गर राहों में टकराये, मिलेंगे अजनबी की तरह, दिल ने ये अहम फैसला लिया, अब […]

गीतिका/ग़ज़ल

जीतना है

सूरज  न   सही,  राह   में  चराग  बाले  रखिए। जाना  है  बहुत  दूर,  दिलों  में  उजाले  रखिए। ये तो वो भी जानता है के सच  और झूठ क्या है, डण्डे को  जोर है, अपने  मुंह  पर  ताले  रखिए। रहोगे   घर  में,  तो   कुछ   बिगड़  नही  जायेगा, के  मुश्किल  दौर  है   खुद  को  सँभाले  रखिए। खैरात   में  […]

गीतिका/ग़ज़ल

अंधेरों का दर्द

इन अंधेरों का दर्द उजालों में छुपा है। मेहनत का सब मजा छालों में छुपा है। बच बच के चलियेगा इस बस्ती में, यहां भेडिया इन्सानी खालों में छुपा है। गर समझ सको तो समझ जाओ यारों, मेरा जवाब मेरे सवालों में छुपा है। एक दिन झोपडे में गुजार कर देखो, मुफलिसी का राज कहां […]

गीतिका/ग़ज़ल

दरकते रिश्ते

एतबार की नींव खोखली दरकते है रिश्ते। बेगरज की बुनियाद पे ही बनते है रिश्ते । शीशे की मानिन्द ही नाजुक है रिश्तों के पैकर , कि टूटने के बाद फिर कहाँ जुडते है रिश्ते। गैरों की दिल्लगी, अपनों की खताये भी भुला दो, इन्हीं छोटी छोटी बातों से महकते है रिश्ते। दिल और दिमाग […]

गीतिका/ग़ज़ल

न करो रब से गिला

न करो रब से गिला, तोहफे कमतर मिले। जो भी पाया, वो हसीन लम्हें बेहतर मिले। आओ मिल के इन परींदों के ख्वाब सजा दे, कोई न फिरे खानाबदोश, हरेक को घर मिले। क्या पता,कल इन्हीं रास्तों से गुजरना पडे, चुन लो इन राहों से, जो भी काँटे, पत्थर मिले। क्यों करें शिकायत, कौन यहां […]