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  • कविता  : गांव और शहर  

    कविता : गांव और शहर  

    एक शहर कई गांव हो सकते हैं लेकिन एक गांव शहर नहीं हो सकता गांव में संस्कृत है संस्कृति है शहर सुसज्जित है सज्जनों से, गांव में भूखे नंगे हैं लेकिन कहीं बेहतर हैं शहरी नंगो...