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  • नारी एक कल्पवृक्ष

    नारी एक कल्पवृक्ष

    प्रेम नारी का जीवन है.अपनी इस निधि को वो आदिकाल से पुरुष पर बिना किसी स्वार्थ के पूर्ण समर्पण और इमानदारी के साथ निछावर करती आई है.कभी न रुकने वाले इस निस्वार्थ प्रेम रुपी निर्झर ने...


  • नारी सृष्टि  निर्माता के रूप में

    नारी सृष्टि निर्माता के रूप में

    आज के लेख की शुरुआत दुर्गा सप्तशती के इस श्लोक से करता हूँ इसमें कहा गया है… विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः, स्त्रियाः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्, का ते स्तुतिः स्तव्यपरापरोक्तिः॥ – दुर्गा सप्तशती अर्थात्:- हे देवी! समस्त...


  • प्रेम एक अनुभव

    प्रेम एक अनुभव

    कबीरा मन निर्मल भया जैसे गंगा नीर पीछे-पीछे हरि फ़िरे कहत कबीर कबीर|| यदि मनुष्य का मन निर्मल हो जता है तो उसमे पवित्र प्रेम उपजता है वो प्रेम जिसके वशीभूत होकर स्वयं ईश्वर भी अपने...