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  • रिश्तों की नाकामयाबी

    रिश्तों की नाकामयाबी

    लता बहुत उत्साहित क्योंकि आज उसकी बेटी रूपल पगफेरे के लिए आने वाली | ससुराल में बहुत व्यस्त कार्यकृम था | परसों शाश्वत के साथ वो हनीमून पर जाने वाली थी |उसकी तैयारी भी करनी थी...

  • आत्मसम्मान

    आत्मसम्मान

    ‘तो क्या हो गया बेचारी विधवा है खुश हो जाएगी |’ ये शब्द जैसे ही सोनम के कानो में पढ़े सहसा उसके कदम रूक गये दरअसल उसकी भाभी उसके भाई द्वारा उसे दिए गये उपहार की...

  • बेरोजगार

    बेरोजगार

    फर्स्ट क्लास ऍम.ए. और बी.एड. करने के बाद भी रवि को कहीं मनचाही नौकरी नही मिल पा रही थी | नौकरी की तलाश में वो जहां-तहाँ भटकता फिरता| वो बढ़ा हताश निराश सा रहने लगा रोज़...

  • बेटी का बोझ

    बेटी का बोझ

    शादी हुए अभी एक साल ही हुआ था की उमा को गर्भ ठहर गया दोनों पति पत्नी और सास ससुर बहुत खुश थे | लेकिन आज जब सौरभ उमा के चेकअप के बाद अस्पताल से घर...


  • घुटन से संघर्ष की ओर

    घुटन से संघर्ष की ओर

    सरला अब उठ खड़ी हुई थी ये विवाह उसके माता पिता और गर्वित के माता पिता की ख़ुशी से हुआ था लकिन न जाने क्यों गर्वित उससे दुरी बनाये रखता है न जाने उसे स्त्री में...

  • अस्तित्व

    अस्तित्व

    सोनम एक प्रतिभावान छात्रा थी लेकिन रिश्तेदारों के दवाब के चलते उसके बीमार पिता ने उसकी शादी बारहवीं पास करते ही कर दी| सोचा था पिता के घर तो बस पिता की सेवा में ही लगी...


  • अकेलापन

    अकेलापन

    प्रमोद ने माइक्रोवेव में खाना गरम किया और और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर खाने लगा | जाने क्या बात थी  कुछ महीनों से उसे अकेलापन खलने लगा था | वह अपने जीवन के बारे में...

  • अपना मन ही अपना कुरुक्षेत्र

    अपना मन ही अपना कुरुक्षेत्र

    आज प्रत्येक व्यक्ति का मन चलता फिरता कुरुक्षेत्र बना हुआ है| जहां पर हमारी निकृष्ट और उत्कृष्ट ,सद्गुण और दुर्गुण ,धर्म और अधर्म दोनों ही प्रकार की प्रुवृत्तियों में निरंतर द्वंद्व चलता रहता है| हमारी आंतरिक...