सामाजिक

परीक्षा में सफलता कैसे मिले…

प्रिय विद्यार्थीयों जैसा की आप लोग जानते हैं कि कुछ ही दिनों में बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं।ऐसे में आप लोगों के परीक्षा संबंधी तनाव और परेशानियों को दूर करने के लिए मैं कुछ नये सकारात्मक सूत्र आपको देना चाहता हूँ, क्योंकि अपने इतने वर्षों के शिक्षण काल में मैंने अनुभव […]

लघुकथा

रिश्तों की नाकामयाबी

लता बहुत उत्साहित क्योंकि आज उसकी बेटी रूपल पगफेरे के लिए आने वाली | ससुराल में बहुत व्यस्त कार्यकृम था | परसों शाश्वत के साथ वो हनीमून पर जाने वाली थी |उसकी तैयारी भी करनी थी | अत: शाश्वत शाम को ही विदा कराकर ले जाने वाले थे| बहुत कष्टों के साथ लता ने रूपल […]

लघुकथा

आत्मसम्मान

‘तो क्या हो गया बेचारी विधवा है खुश हो जाएगी |’ ये शब्द जैसे ही सोनम के कानो में पढ़े सहसा उसके कदम रूक गये दरअसल उसकी भाभी उसके भाई द्वारा उसे दिए गये उपहार की उलाहना दे रही थी | अभी कुछ तीन साल पहले ही सोनम का विवाह सार्थक से हुआ था | […]

लघुकथा

बेरोजगार

फर्स्ट क्लास ऍम.ए. और बी.एड. करने के बाद भी रवि को कहीं मनचाही नौकरी नही मिल पा रही थी | नौकरी की तलाश में वो जहां-तहाँ भटकता फिरता| वो बढ़ा हताश निराश सा रहने लगा रोज़ की तरह वो आज सुबह भी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जा रहा था की अचानक उसके दरवाज़े पर […]

लघुकथा

बेटी का बोझ

शादी हुए अभी एक साल ही हुआ था की उमा को गर्भ ठहर गया दोनों पति पत्नी और सास ससुर बहुत खुश थे | लेकिन आज जब सौरभ उमा के चेकअप के बाद अस्पताल से घर आया तो उसका चेहरा उतरा हुआ था उसकी माँ ने पुछा क्या है तो वो अपनी मां के साथ […]

लघुकथा

टूटा विश्वास और बिखरा स्वाभिमान

शैलेश तमतमाता हुआ ऑफिस से बाहर आया उसका स्वाभिमान और स्वर दोनों ही उच्चावस्था में थे बात ये थी की उसे किसी आवशयक कार्य हेतु अपने एक महीने की सैलरी एडवांस चाहिए थी और शैलेश स्कूल में कोई नया नही था बल्कि २० सालों से विद्यालय में हिंदी पढ़ाता चला आ रहा था वो बच्चों […]

लघुकथा

घुटन से संघर्ष की ओर

सरला अब उठ खड़ी हुई थी ये विवाह उसके माता पिता और गर्वित के माता पिता की ख़ुशी से हुआ था लकिन न जाने क्यों गर्वित उससे दुरी बनाये रखता है न जाने उसे स्त्री में किस सौन्दर्य की तलाश थी ये सोचकर उसके माथे पर दुःख की लकीरें उभर आई वो सोचने लगी- विवाह […]

लघुकथा

अस्तित्व

सोनम एक प्रतिभावान छात्रा थी लेकिन रिश्तेदारों के दवाब के चलते उसके बीमार पिता ने उसकी शादी बारहवीं पास करते ही कर दी| सोचा था पिता के घर तो बस पिता की सेवा में ही लगी रहेगी शादी करके ससुराल चली जाएगी तो जीवन सुख से बीतेगा उसका ,लेकिन विधि का विधान कुछ और था […]

सामाजिक

आत्मकेंद्रित होते युवा और समाज की आवश्यकता

इस तकनीकि के युग में आजकल के युवा इतने आत्मकेंद्रित हो गये है की उन्हें समाज या अपने आसपास के लोगों से मानो कोई सरोकार ही नही रह गया है| इसलिए आज घर के बुजुर्गों को अपने युवा हो रहे किशोरों से ये कहते सुनते है कि समाज में उठा बैठा करो, लोगों से मिला […]

लघुकथा

अकेलापन

प्रमोद ने माइक्रोवेव में खाना गरम किया और और डाइनिंग टेबल पर बैठ कर खाने लगा | जाने क्या बात थी  कुछ महीनों से उसे अकेलापन खलने लगा था | वह अपने जीवन के बारे में सोचने लगा जवानी में उसने अपने जीवन में कभी कोई कमी महसूस नही की थी, वह अपने में ही […]