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  • कविता : आतंकवाद

    कविता : आतंकवाद

    देश की धरा पर खुनी मंजर छाया अंधकार का जहर भरा खंजर लाया हिंसा की जंजीर ये लाया जब आतंकवाद अपने देश में आया। इंसानियत की मौत का पैगाम ये लाया मानवता की चोट का आलम...