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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    थोक में गर नहीं तो फुटकर दे चंद खुशियाँ मेरे मुक़द्दर दे जिस्म से अब थकान बोलती है आज खारों का सही बिस्तर दे जब नज़र में हो सिर्फ़ उर्यानी रूह के पैरहन को अस्तर दे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जीस्त के पाँव यूँ जो ठहरते नहीं चलने से आबले ये मुकरते नहीं बेवजह साथ यूँ छोड़ तुमने दिया बिन ख़िज़ां के तो पत्ते भी झरते नहीं हर कहीं है मिलावट नमक की, तभी आजकल ज़ख़्म...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    अदब से यूँ निभाना चल रहा है मिज़ाज अब शायराना चल रहा है समझता कौन है अब दिल की बातें फ़क़त सुनना सुनाना चल रहा है तुम्हारे दर्द की पूँजी लगाकर ग़मों का कारख़ाना चल रहा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सोचते हैं बारहा क्यूँ हम सयाने हो गए हो गए हैं हम नए रिश्ते पुराने हो गए बात क्या है मिन्नतें रोती बहुत हैं आजकल ख़्वाहिशों को मुस्कुराए तो ज़माने हो गए बीनती कूड़ा जो बच्ची...

  • गजल

    गजल

    कितना है दर्दनाक ये एहसास देखिए सच्चाई जिसको समझे, है आभास देखिए सबकी दलील सुन के पशेमां है वो बडा सीधेपन का कैसा ये उपहास देखिए इक एक कर के राह में ही रुक गए सभी...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    जहाँ देना ज़रूरी है वहीं अक्सर नहीं देता कहीं कारूं ख़ज़ाना है कहीं तिल भर नहीं देता तेरी रहमत खुदा मुफ़लिस की तो हालत यही देखी कभी रोटी नहीं देता कभी बिस्तर नहीं देता — पूनम...

  • गजल

    गजल

    सब बीजों में पेड़ों के आसार लिखो झरनों पर भी सागर सा विस्तार लिखो सारी खुशहाली है दौलतमंदों की मुफ़लिस के घर भी कोई त्योहार लिखो बेकारी की चक्की ने है यों पीसा कितने जिंदादिल हो...

  • गजल

    गजल

    सोचना क्या है किसकी रज़ा चाहिए आगे बढ़ने को बस हौसला चाहिए साफ़ कपड़ों का होना तो लाज़िम ही है साफ़ दिल हो अगर और क्या चाहिए जान पहचान सौदागरी मांगती और रिश्तों में भी अब...