कविता

रजा तेरी

मुझे तो इश्क करना है तुझसे तू चाहे तो दगा दे जाए। सच बोलना फितरत है मेरी फिर चाहे जां मेरी चली जाए। दिल की दीवानी हूं अपने बगावत नही करनी इसकी फिर चाहे तू जुदा हो जाए। कोई आए न हमारे दरमियान इतना चाहा है तुझे अब हसरत है तेरी तू चाहे तो मेरा […]

कविता

तुम साथ नही होते

जब दिल आहें भरता है तुम साथ नही होते। जब आहें तुझे देती हैं सदा तुम साथ नहीं होते। यूं तो महफिल है संग मेरे दर्दों की जब तन्हाई सताए तुम साथ नही होते। रोम रोम में बसे हो मेरे जब जोर से धङके दिल क्यों तुम साथ नहीं होते मेरे सिर्फ मेरे हो फिर […]