मुक्तक/दोहा

मुक्तक

दिखाने को दिखा दूँ आँख का गिरता हुआ पानी, मगर बदनाम हो जायेगा दर्द से रिसता हुआ पानी। नहीं सम्मान पा पायेगा मशहूर होकर के जज्बात, इसी कारण छुपा लेता आँख का गिरता हुआ पानी।। — प्रदीप कुमार तिवारी

कविता

मरकज के जमाती

मौत खड़ी है सर पर लेकिन भान नहीं कुछ इसका है, बचना इससे इनको कैसे, ज्ञान नहीं कुछ इसका है। चरमपंथ है, कट्टरपंथ है, धर्म का जाहिलपन इनमें, बनी रहे आपस में दूरी, ध्यान नहीं कुछ इसका है।। दुनिया जिससे छुप रही, उसको गले लगाने वाले, गले लगाकर प्रेम-भाव से, आपस में बतियाने वाले। समझ […]

कविता

अपना गांव करौंदी

ग्राम करौंदी की आओ पहचान बताते हैं, बड़े-बड़े दो पावन धाम की महिमा गाते हैं। चमत्कारिणी मां गायत्री का मंदिर यहां विशाल, मां शारदा मंदिर का वैभव हम यहां दिखाते हैं।। भक्ति भाव से मंदिर में सब महिमा गाते हैं, मातारानी सम्मुख आकर अपनी व्यथा सुनाते हैं। नहीं कह सका जो मित्रों से या अपने […]

मुक्तक/दोहा

स्वार्थ सिद्ध में

स्वार्थ सिद्ध में नेताओं ने, अंगारों पर हमको डाला, गलतफहमियां पैदा कर, नफ़रत में हमको पाला। नाग विषैले छोड़ दिये हैं, जहर उगलने के खातिर, सच्चाई से दूर किया है, मिथ्या लेप से हमको ढ़ाला।। ईमान की कसमें खाकर बेइमान छुपे हैं खालों में, सच्चाई को फेंक के आये हैं ये बहते नालों में। जनमानस […]

कविता

शंकित थी प्रियंका

पीकर शराब इंसान शैतान बन गया था, छोड़कर ईमान युवा हैवान बन गया था। नोचा था बदन मिलकर, मार कर जलाया, दैत्यसुत का वो स्वयं पहचान बन गया था।। निकले थे जो कमाने, घर में दाल रोटी लाने, मां बाप के अरमान को, वो ही लगे जलाने। बन भेड़िया, समाज को ही जंगल बना कर, […]

कविता

यूँ जिंदगी मेरी नीलम कर गयी

यूँ जिंदगी मेरी नीलम कर गयी ********* यूँ जिंदगी मेरी नीलम कर गयी, ना चाहते हुए भी बदनाम कर गयी। पापा की थी परी जबसे हूर बन गयी, बदनाम कर के बाप को मशहूर बन गयी।। नाजों से तुमको पाला था नासूर बन गयी, खुशियों भरे भवन को गम में चूर कर गयी। मैं दोष […]

कविता

युगों युगों तक

युगों युगों तक कीर्ति आपकी नहीं मिटेगी, प्रलय तलक पदचिन्ह आपकी नहीं मिटेगी। यहां गौरव गाथा गीतों में बनकर गूंजेगी, पर मनुज रुप में किसी सदन में नहीं दिखेंगी।। आयेंगी लाखों पदचिन्ह पकड़कर सदन में, पर तीखे मीठे बोल आपके गूंजेगी ना सदन में। जो ओज आपमें, तेज आपमें झलक रहा, ऐसी कोई प्रतिभा अब […]

कविता

पापा मुझको मारना मत

पापा मुझको मारना मत ******* भरा हुआ है अपना आँगन, बारिस के पानी से, नाव बनाया कागज की, फाड़ के अपनी कापी से। डूब गये हैं कई अभी तक, मगर बनाये जाता हूँ, आधा पेज हुआ है गायब, पापा अपनी कापी से।। डर लगता है बहुत आपसे, आप बहुत मारेंगे, आया गुस्सा अगर आपको, रौद्र […]

कविता

हिमा दास

वह दौड़ रही है जीवन के स्याह पहलुओं से आगे, वह दौड़ रही है जंजीरों को तोड़ मनुज ने जो बांधे। ना रोक सकेगा कोई अब ये तो सरिता बन बैठी है, बाँध तोड़ जब नदी बही तो टिका नहीं कोई आगे।। मेहनत की भट्ठी में जलकर हिमा बनी है जलधारा, जग रोक नहीं पायेगा […]

कविता

वर्षा रुपी कुदरत तांडव को….

वर्षा रुपी कुदरत तांडव को शब्द चित्र में कहते हैं। ब्लाक करौंदी की सुनलो हम सत्य कहानी कहते हैं।। बड़े नाम की तेज में, ग्रामीणों की देख में, बनी सड़क अच्छी खासी, दिखने में मोटी ताजी। बारिस की नन्हीं बूदों की चोट नहीं सह पायी, आज बिखर गयी टूट कर हार कर बूदों से बाजी।। […]