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  • पड़ोसन की मी टू

    पड़ोसन की मी टू

    आजकल ‘मी टू’ का कहर किसी सुनामी से कम नहीं, जिसने हमारे जैसे किसी भी बेहद ही शरीफ और संवेदनशील मर्द के बच्चे को, जिसने कभी धोखे से भी स्कूल, कॉलेज या ऑफिस के दिनों में...

  • आक्रोश

    आक्रोश

    “सर, आज न तो स्वतंत्रता दिवस है, न ही गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती भी तो नहीं, फिर इधर ये देशभक्ति और शहीदों वाले गीत क्यों बजाए जा रहे हैं।” अनपढ़ से दिखने वाले लाइनमैन ने मुझसे...

  • फर्क

    फर्क

    आखिरकार पापा ने अपनी प्रॉमिस पूरी कर दी। उन्होंने अपने इकलौते बेटे अमन से प्रॉमिस किया था कि यदि वह अपनी कक्षा में फर्स्ट आएगा, तो उसे गर्मी की छुट्टियों में एक दिन ऑफिस लेकर जाएँगे।रिजल्ट...

  • पुनर्वास

    पुनर्वास

    पुनर्वास हार्ट अटैक का पहला झटका झेलने के दूसरे ही दिन रमाकांत जी की अपनी निजी पुस्तकालय की सभी पुस्तकें जिला ग्रंथालय को दान करने के फैसले से मालती चकित थी।लगभग पचपन साल पहले जब रमाकांत...

  • मुफ्तखोरी

    मुफ्तखोरी

    मुफ्तखोरी जिस कार्यालय में मैं नौकरी करता हूँ, वहाँ एक प्रकार की परिपाटी-सी बनी हुई है कि कनिष्ठ कर्मचारी ही अपने पैसों से वरिष्ठों को चाय-पानी कराते हैं. न चाहते हुए मैं भी मन-मारकर कई साल...


  •  पड़ोसन की मी टू

     पड़ोसन की मी टू

    आजकल ‘मी टू’ का कहर किसी सुनामी से कम नहीं, जिसने हमारे जैसे किसी भी बेहद ही शरीफ और संवेदनशील मर्द के बच्चे को, जिसने कभी धोखे से भी स्कूल, कॉलेज या ऑफिस के दिनों में...


  • चन्द हायकु

    चन्द हायकु

    चन्द हायकु 1. चुप रहना कुछ मत कहना कर दिखाना। ———– 2. अकेला तू ही बदलेगा दुनिया शुरु तो कर। ———– 3. शिक्षा जरूरी जीवन-संग्राम में डिग्री नहीं। ———– 4. सब संभव कुछ न असंभव करके...

  • अनुभव

    अनुभव

    मनोज दसवीं कक्षा में पढ़ता था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ वह खेलकूद में भी बहुत तेज था। वार्षिक परीक्षा समाप्त हो चुकी थी । उसके सभी पर्चे अच्छे हुए थे।...