लघुकथा

अंधभक्ति की पराकाष्ठा

सुबह के चार बजे का समय रहा होगा. समारू काका की नींद खुल गयी. उन्हें जोर का प्रेशर आया था. गाँव के अन्य लोगों की भाँति उनके घर में भी शौचालय नहीं था, सो उन्हें गाँव के बाहर स्थित खेत और तालाब पर ही निर्भर रहना पड़ता था. वे तेज कदमों से सँभलते और लगभग […]

लघुकथा

बाबागिरी

नवनीत बचपन से ही बड़ा होनहार था। पहली कक्षा से ग्रेजुएशन तक की सभी कक्षाओं में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होने के तुरंत बाद अपने पहले ही प्रयास में यू.पी.एस.सी. की परीक्षा पास कर एक आई.पी.एस. अधिकारी बन गया। निर्धारित प्रशिक्षण और परीवीक्षा अवधि पूरा करने के बाद पुलिस अधीक्षक के रूप में उसकी पोस्टिंग […]

पद्य साहित्य बाल कविता बाल साहित्य

परी

परी कल रात मेरे सपने में आई थी एक सुंदर परी। अपने साथ लाई थी चॉकलेट टॉफी ढेर सारी। लाल, नीली, पीली, बैगनी, गुलाबी और हरी। चॉकलेट पाने मेरे दोस्तों में मच गई मारामारी। आपस में ही हमें उलझते देख बोली रानी परी। यूँ छोटी सी बात पर लड़ना नहीं है समझदारी। सबको मिलेगा, आओ […]

कथा साहित्य लघुकथा

वर्ल्ड रिकॉर्ड

वर्ल्ड रिकॉर्ड “सर, हमने एक जबरदस्त प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें आपकी अगुवाई मे पूरे राज्य में एक ही दिन में एक करोड़ पौधों का रोपण कर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में राज्य का नाम दर्ज किया जा सकता है।” वन विभाग के प्रमुख सचिव ने मुख्यमंत्री जी से कहा। “पी.एस. साहब, पिछले साल […]

कथा साहित्य संस्मरण

पिताजी की सीख

संस्मरण पिताजी की सीख यह जुलाई, सन् 1989 की बात है। पिताजी ने मुझे अपने पास बुलाकर कहा, “बेटा, अब तुम बड़े हो चुके हो। तुम्हारी दीदी भी शादी करके अपने ससुराल चली गई है। इसलिए मैं चाहता हूँ कि अब से तुम घर के छोटे-मोटे काम किया करो।” मैंंने कहा, “ठीक है, बताइए मुझे […]

पद्य साहित्य हाइकु/सेदोका

हरियाली तीज के हाइकु

तीजा के हाइकु “”””””””’””””””””””’” तीजा के दिन हुआ पुनर्मिलन पार्वती-शिव। ***** भोले भंडारी परम उपकारी हैं दुखहारी। ***** आया है तीजा ले खुशियाँ अपार आएगा मजा। ***** प्यार हमारा सूरज-चाँद जैसे रहेगा सदा। ****** तीजा का पर्व सुहागिन का धर्म मनाएँ हम। ****** तीजा के रंग मायके में उमंग बेटी के संग। ****** दीर्घायु पति […]

लघुकथा

भाई

लघुकथा “””””””””” भाई “”””” किसी बात पर बच्चों की लड़ाई में पहले उनकी माँएँ फिर पिता भी कूद पड़े। मामला थाने तक पहुँच गया। थानेदार ने समझा बुझाकर दोनों भाइयों में सुलह करा दी। पर इस घटना के बाद दोनों भाई एक दूसरे के पक्के दुश्मन बन गए। घटना के सालों बाद जब बड़े भाई […]

हास्य व्यंग्य

मोबाइल महात्म्य

“अजी सुनिये तो।” कहती हुईं हमारी श्रीमती जी मोबाइल हाथ में पकड़े मेरे सामने आकर खड़ी हो गईं। “अजी सुनाइए तो…” हमने भी अपनी मोबाइल से नज़रें हटा कर श्रीमती जी को प्यार से देखते हुए कहा। “लगता है ये मोबाइल खराब हो गया है। आजकल ये अटक-अटक कर चलता है।” श्रीमती जी ने शिकायती […]

कथा साहित्य कहानी

सब्र का फल

मुकेश छब्बीस साल का एक खूबसूरत, होनहार नौजवान था। जब राज्य प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास कर वह एक उच्च पद पर आसीन हुआ, तब उसके सामने विवाह के लिए एक से एक खूबसूरत, पढ़ी-लिखी और नौकरीशुदा लड़कियों के रिश्तों की लाइन लग गयी थी। वह भलीभांति जानता था कि शादी-व्याह कोई बार-बार होने वाला […]

पद्य साहित्य बाल कविता बाल साहित्य

माँ

मेरा दु:ख, माँ का दु:ख मेरी खुशी, माँ की खुशी चोट मुझे लगती है मेरी माँ रो पड़ती हैं। खाना मैं खाता हूँ माँ तृप्त हो जाती हैं। मुझे सुलाकर ही सोती हैं पर वे ही सबेरे जगाती हैं। मेरे हर मर्ज की दवा मेरी माँ ही होती हैं। ईनाम मैं पाता हूँ माँ खुश […]