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  • श्राद्ध

    श्राद्ध

    छोटे तू तो बड़ा ही खुश दिखाई दे रहा है और तेरे चेहरे पर पूर्ण संतुष्टि और तृप्ति का भाव दिखाई दे रहा है। हाँ दादा,आप सही कह रहे हैं।अभी श्राद्धपक्ष में जब हमें अपनी संतानों...

  • परख

    परख

    सुनयना ने अपनी खास सहेली सुलेखा से पूछा कि-“इस बार तो यह तय माना जा रहा था कि तुम्हारा रिश्ता पक्का हो ही जाएगा।दोनों परिवार एक दूसरे से मिल भी चुके थे और तुम्हारी उस लड़के...

  • पहनावा

    पहनावा

    वह अपने भाई की शादी में मुम्बई से आई थी ।मायका कस्बे में था तो कम ही आना होता था।पिछड़ा हुआ इलाका था तो अब यहाँ के लोग भी पिछड़े हुए लगने लगे थे।वर्षों बाद आना...

  • असमंजस

    असमंजस

    आज करूणा को वह समय याद आ रहा था जब विनय किसी भी धंधे में हाथ डालता था तो मिट्टी भी सोना हो जाती थी।घर में काली-सफेद दौलत का ढेर लग गया था।रोज रात को बहकते...

  • अन्नदाता

    अन्नदाता

    अन्नदाता हाँ वह अन्नदाता है लेकिन क्या तुमने देखा है उसे खुलकर मुस्कुराते हुए या फिर वह कब हँसा था ठहाके मारकर लगता है वह हँसना-मुस्कराना ही भूल गया है क्या तुमने देखा है उसके सपनों...

  • कलुषित मन

    कलुषित मन

    “वह कुलटा नारी सम्पूर्ण ग्राम का माहौल खराब कर रही थी। ग्राम का कोई भी परिवार उस कुलटा नारी को पसन्द नहीं करता था। ग्राम की बड़ी-बूढ़ी औरते उसे कुलच्छनी कहती थीं। उस कुलटा नारी का...