इतिहास

मानव के सिर पर तना कला-वितान है विरासत

अविराम गति नवल सर्जना की पीठिका है और ठहराव अवसान का द्योतक। इसलिए कालचक्र की नियति निरन्तर गतिशीलता ही है। काल पुरुष सभ्यताओं एवं संस्कृतियों के उत्थान, विकास एवं पतन का एकमात्र साक्षी होता है। सभ्यताएं जन्मती हैं और अपना सृजन-दायित्य निभाकर जीवन का पटाक्षेप भी करती हैं। फिर उसी उर्वर भूमि पर अनुकूल समय, […]

पर्यावरण

विश्व गौरैया दिवस पर विशेष : क्यों रूठ गया हमसे आंगन का पंछी

आज से दो-तीन दशक पूर्व तक हमारे घरों में एक नन्ही प्यारी चिड़िया की खूब आवाजाही हुआ करती थी। वह बच्चों की मीत थी तो महिलाओं की चिर सखी भी। उसकी चहचहाहट में संगीत के सुरों की मिठास थी और हवा की ताजगी का सुवासित झोंका भी। नित्यप्रति प्रातः उसके कलरव से लोकजीवन को सूर्योदय […]

गीत/नवगीत

जीवन स्वयं गढ़ेंगी हम

आसमान में उड़ने का कौशल है आजादी दो। गिरि-शिखर झुकाने का साहस बल है आजादी दो। मां पोषण-प्यार, दुलार हमें भी दो अब बेटों-सा, सागर के सीने पर शौर्य लिखेंगी आजादी दो।। बढ़े चरण न अब रोक सकेंगी नुकीली चट्टानें। मंजिल पर कदम रुकेंगे संकल्प हृदय में ठाने। तूफानों के शीश कुचलने का दमखम हममें […]

कविता

मिलो तो सागर बन जाऊं

प्यार के मधुरिम आखर बन जाऊं। सुरीले सरगम, गागर बन जाऊं। मैं तो सूखा हुआ इक दरिया हूं, तुम मिलो तो फिर सागर बन जाऊं।। शुष्क मन में तुम बन बदली छाना। इकबार मिलो तो मत कहीं जाना। आया हूं जन्मों की प्यास लेकर, नेह-नीर पिला, ठहर नहीं जाना।। हर प्रश्न का तुम जवाब बन […]

इतिहास

इतिहास के दर्पण में राष्ट्र-ध्वज तिरंगा की विकास यात्रा

राष्ट्रीय ध्वज किसी राष्ट्र एवं देश के गौरव, गरिमा एवं गर्व का हेतु होता है। राष्ट्र-ध्वज राष्ट्रीय स्वाभिमान, शौर्य-पराक्रम एवं सांस्कृतिक परंपरा का द्योतक है। ध्वज में लोक का असीम प्रेम, त्याग एवं समर्पण प्रतिबिम्बित होता है। ध्वज राष्ट्र की पहचान है, प्रतिष्ठा है। ध्वज किसी वस्त्र का टुकड़ा मात्र नहीं होता बल्कि उसके धागे-धागे […]

इतिहास

अब पराक्रम दिवस के रूप में मनाई जायेगी सुभाष जयंती

भारत माता को ब्रिटिश शासन सत्ता से मुक्ति के लिए हुए स्वाधीनता संघर्ष में एक व्यक्तित्व महानायक बनकर उभरा जिसे नेता जी विश्व सुभाष चन्द्र बोस के नाम से जानता है। उल्लेखनीय है कि 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बाबू ने आजाद हिन्दुस्तान की अंतरिम सरकार बनाई जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और युद्धमंत्री का दायित्व स्वयं […]

इतिहास

हेमू कालाणी : अंग्रेजी शासन के विरुद्ध उठा किशोर सिंधी स्वर

पुण्यतिथि 23 जनवरी पर विशेष भारतीय स्वाधाीनता संग्राम के पावन यज्ञ में हजारों क्रान्तिकारियों ने अपने श्वासों की समिधा होम की है। रक्त की अंतिम बूंद तक अंग्रेजी सैन्य शक्ति से लोहा लिया है। मां भारती को स्वातंत्र्य सिंहासन में आरूढ़ाभिषेक करने हेतु प्राणों की बाजी लगा दी। फांसी के फंदों को कंठहार मान स्वयं […]

पर्यावरण

छतों पर उपवन उगाने की कला – वर्टिकल फारेस्ट्री

सदियों से ही मानव जीवन का प्रकृति के साथ अन्योन्याश्रित जीवन्त मधुमय सम्बंध रहा है। यही कारण रहा है कि विश्व की नदी-घाटी सभ्यताएं भी नदियों के तट और अरण्य के समीप ही विकसित हुई थीं। संत तुलसीदास ने भी ‘क्षिति जल पावक गगन समीरा; पंच तत्व यह बना शरीरा’ के माध्यम से प्रकृति के […]

इतिहास

सावित्रीबाई फुले : महिलाओ की  शिक्षा एवं प्रगति की पथ प्रदर्शक

भारतवर्ष में 19वीं शताब्दी का उत्तरार्ध शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आंदोलनों एवं समाज में व्याप्त अस्पृश्यता, बाल विवाह, सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या एवं अशिक्षा के विरुद्ध लोक जागरण एवं लड़ाई का स्वर्णिम काल था। आज देश में शिक्षा एवं विकास के समान अवसर उपलब्ध हैं पर डेढ़ सौ साल पहले यह कल्पना करना भी […]

इतिहास

मां भारती के अनन्य साधक : महामना मदन मोहन मालवीय

किसी व्यक्ति के समाज जीवन में किया गया एक समाजोपयोगी राष्ट्रीय कार्य उसे न केवल वैश्विक पहचान देता है बल्कि उसका व्यक्तित्व भी वामन से विराट बना देता है। व्यष्टिगत सुख, सुविधा एवं संतुष्टि से ऊपर लोकसृष्टि एवं समष्टि के कल्याण की वरीयता, हित-कामना एवं योगक्षेम की चिंता उसे महामानव बना देती है। संसार के […]