कविता

खूब पढ़ाते टीचर जी

अच्छी बात हमें सिखाते, टीचर जी। मेहनत से खूब पढ़ाते, टीचर जी।। मोती से दांत चमकते, आंखे तेज। पान-मसाला नहीं चबाते, टीचर जी।। होमवर्क न करके लाते बच्चे जो। तब डांटते, चपत लगाते, टीचर जी।। कोई बात समझ न आती,  हम कहते। एक नहीं दस बार बताते, टीचर जी।। पढ़ाते-लिखते मन जब लगे ऊबने। कविता, […]

इतिहास

मैडम भीकाजी कामा : विदेश में तिरंगा ध्वज फहराने वाली प्रथम भारतीय

24 सितम्बर 1861 को मुम्बई के एक व्यापारी पारसी परिवार में माता जैजीबाई की कोख से एक बच्ची का जन्म हुआ। पिता सोराबजी फ्रेमजी पटेल बिटिया पर प्यार लुटाने लगे। नाम रखा गया भीकाजी। भीकाजी का बचपन अंग्रेजी रहन-सहन और रईसी शानो-शौकत में व्यतीत हुआ। पढ़ाई के लिए मुम्बई के प्रसिद्ध ‘‘अलेक्जेंडर नेटिव गल्र्स इंग्लिश […]

कुण्डली/छंद

वह रति को लजाती है

लालिमा सुशोभित मुखमंडल में उनके, अपूर्व सौंदर्य नख-शिख में समाया है। व्याकुल हृदय को लुभाते हैं कंज नयन, वाणी में मधुरता अमिय रस पाया है। मोहित मदन मन निहारे मृदुल तन, प्रेमी बादल अनंत अम्बर में छाया है। है विधाता का सृजन अनुपम मनोहर, अंग-अंग गढ़ रुचि नेह से बनाया है।         […]

क्षणिका

क्षणिकाएं

*रंग-रूप* युवती का ऐसा खिला रंग-रूप। जैसे सूरज ने केशर-दूध में घोल दिया हो मुट्ठी भर धूप। *भूख* एक था एक थी दोनों भूखे थे। था को मिला तन थी को मिला धन दोनों हुए खुश। *रहमत* कोरोना काल में वह बोला सब से घर से बाहर कभी रह मत। क्योंकि घर में है रहमत। […]

कुण्डली/छंद

ओढ ली चूनर धानी

ओढ़ ली चूनर धानी वसुधा ने आज फिर धरती न धीर मन मौन इतराती है। अंबर नत होकर चूमता कपोल जब, श्यामल तन खिले सुमन हरसाती है। मोहित मदन मन पछुवा पवन बन, बिखेरता सुगंध मंद धरा मुस्काती है। पावस का वारि जल करता उर विकल, मिलन के स्वप्न नैन धरती सजाती है।     […]

कुण्डली/छंद

टेरता पपीहा मन

रसाल सी रसीली आम्र कानन बीच वह, वर्षा वारि धार साथ खेलती-नहाती है। प्रकृति सुंदरी समेट सुंदरता सकल, समाई है उसमे वह रति को लजाती है। प्रेम झूले में झूलती इठलाती कली वह, मर्यादा में बंधी पर प्रेम न जताती है। उपवन सुवासित है उसकी सुवास से, हंसे तो मीठी स्वर लहरी बिखराती है।   […]

मुक्तक/दोहा

सांसें जपती नाम उसी का

स्वारथ का संसार यहां संबंधी कौन किसी का। रिश्ते-नाते, परिजन, परिचित बनते अंग इसी का। पर होता कोई जिसकी यादों से मन महक उठे, मलयज सांसें जपतीं नाम सदा हो मौन उसी का।। घोर उदासी में भी खुशियों के स्वर मिल जाते हैं। फूलों के पथ पर भी चल पांव कभी छिल जाते हैं। जीवन […]

हास्य व्यंग्य

लाॅकडाउन: एक लेखक की व्यथा कथा

देश में लाॅकडाउन है और मैं भी तमाम देशवासियों की तरह घर में रहने को मजबूर हूं। हालांकि लाॅकडाडन घोषित होते समय अन्दर से बहुत खुश था कि विद्यालय बंद हो जाने से इस अवधि में लेखन के शौक के चलते कुछ लिखने-पढ़ने का सार्थक काम हो जायेगा। और तदनुरूप योजना भी बना ली थी […]

इतिहास

क्रांतिकारी अजीमुल्ला खां रचित वह प्रथम राष्ट्रगीत जिसे अंग्रेजों ने जब्त कर लिया था

भारतवर्ष वीरों की भूमि है। वीर रस से पगी इस पावन भूमि का कण-कण साक्षी है कि 1857 के स्वाधीनता समर में अंग्रेजी जुल्म और शोषण के विरुद्ध संपूर्ण देश समाज अपनी पूरी शक्ति और सामथ्र्य के साथ उठ खड़ा हुआ था। राजा, महाराजा, नवाब, साहूकार, सैनिक, किसान और मजदूर भाषा, क्षेत्र, जाति और पंथ- […]

इतिहास

सुभाष चन्द्र बोस: जिनके नाम से अंग्रेजों के हृदय कांपते थे

ब्रिटिश शासन सत्ता की बेड़ियों में जकड़ी भारत माता की मुक्ति के लिए हुए स्वाधीनता समर की बलिवेदी पर अनगिनत वीर सपूतों ने निज जीवन की आहुति दी है। अपने सुवासित जीवन-पुष्पों की माला से भारत माता का कंठ सुशोभित किया है, तो रुधिर से भाल पर अभिषेक भी। उन्हीं जननायकों में से एक महानायक […]