राजनीति

संविधान से ही संचालित होता है देश

परिवार देश की लघुतम इकाई होती है। परिवार से मिलकर ही एक वृहत्् समाज की रचना सम्भव होती है। प्रत्येक घर-परिवार एवं समाज में सदस्यों के कार्य व्यवहार एवं आचरण हेतु एक अलिखित नियमावली या संहिता होती है। परिवार एवं समाज अपने सदस्यों से अपेक्षा रखता है कि समाज की बेहतरी के लिए सभी इन […]

गीत/नवगीत

धरती पर न रहे अंधेरा

बाहर दीप जलाने से पहले, अंतर्मन में इक दीप जला लें। नेह सुधा-जल से अभिसिंचित कर, बंजर मन में रस, प्रीति उगा लें। अविवेक अंधेरा को अब त्यागें। जोड़ें जीवन के बिखरे धागे। सुख-शांति है आधार विकास का, तरु-तटिनी तट मत काट अभागे। हृदयांगन की हम करें सफाई, सत्कर्मों को मनमीत बना ले।। सब अपने […]

सामाजिक

दिवास्वप्न की कसौटी पर वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य

गत शताब्दी के प्रारंभ में देश के राजनीतिक फलक पर एक युगांतरकारी घटना हुई जिसने देश-दुनिया को प्रभावित किया। वह वह घटना थी, जनवरी 1915 में महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका से भारत वापसी। गांधी जी के साथ ही एक व्यक्ति, गिजुभाई बधेका, भी भारत आए हैं जो अफ्रीका में गांधी जी के साथ आश्रम […]

गीत/नवगीत

बाधाओं को मीत बना ले

उपवन की शोभा बढ़ती जब, खिलते पाटल और लिली हैं। स्नेह-भाव पाकर अपनों का, अधरों पर मुस्कान खिली है। प्रेम लुटाया करते हैं जो, भेदभाव से ऊपर उठकर। गिरि-शीश झुकाया करते वे, जो बढते जाते गिर-गिरकर। बाधाओं को मीत बना ले, वह साधक है, बहुत बली है। स्नेह-भाव पाकर अपनों का, अधरों पर मुस्कान खिली […]

गीत/नवगीत

वसुधा है परिवार 

हम एक नया संसार बनायें। न ढलें अश्रु नयनों से, स्वप्न पलें। सुख-दुख में शामिल, बन दीप जलें। मानव-मन के सब कष्ट मिटाकर, जीवन में हर पल हंसें-हंसायें। हम एक नया संसार बनायें।। हर मानव को भोजन वस्त्र मिले। काम हाथ को, मुख- मुस्कान खिले। भेदभाव से ऊपर उठकर हम, वंचित- शोषित को गले लगायें। […]

सामाजिक

आॅनलाईन शिक्षण : बच्चों को शिक्षा से जोड़ती नवीन विधा

मानव जीवन कभी एकांगी और एकरस नहीं होता है। उसमें जीवनानुभवो के विविध पक्ष एवं इंद्रधनुषी रंग समाये होते हैं। जीवन के व्यापक फलक में स्नेह-प्रेम, शान्ति, करुणा, विश्वास, सरसता, उत्साह, उमंग, ऊर्जा और रचनात्मकता के मोहक सितारे टंके होते हैं तो वहीं नैराश्य, क्रोध, नीरसता, अनुत्साह, आलस्य-प्रमाद, घमंड और नकारात्मकता की धूमिल धूसर छाया […]

कविता

खूब पढ़ाते टीचर जी

अच्छी बात हमें सिखाते, टीचर जी। मेहनत से खूब पढ़ाते, टीचर जी।। मोती से दांत चमकते, आंखे तेज। पान-मसाला नहीं चबाते, टीचर जी।। होमवर्क न करके लाते बच्चे जो। तब डांटते, चपत लगाते, टीचर जी।। कोई बात समझ न आती,  हम कहते। एक नहीं दस बार बताते, टीचर जी।। पढ़ाते-लिखते मन जब लगे ऊबने। कविता, […]

इतिहास

मैडम भीकाजी कामा : विदेश में तिरंगा ध्वज फहराने वाली प्रथम भारतीय

24 सितम्बर 1861 को मुम्बई के एक व्यापारी पारसी परिवार में माता जैजीबाई की कोख से एक बच्ची का जन्म हुआ। पिता सोराबजी फ्रेमजी पटेल बिटिया पर प्यार लुटाने लगे। नाम रखा गया भीकाजी। भीकाजी का बचपन अंग्रेजी रहन-सहन और रईसी शानो-शौकत में व्यतीत हुआ। पढ़ाई के लिए मुम्बई के प्रसिद्ध ‘‘अलेक्जेंडर नेटिव गल्र्स इंग्लिश […]

कुण्डली/छंद

वह रति को लजाती है

लालिमा सुशोभित मुखमंडल में उनके, अपूर्व सौंदर्य नख-शिख में समाया है। व्याकुल हृदय को लुभाते हैं कंज नयन, वाणी में मधुरता अमिय रस पाया है। मोहित मदन मन निहारे मृदुल तन, प्रेमी बादल अनंत अम्बर में छाया है। है विधाता का सृजन अनुपम मनोहर, अंग-अंग गढ़ रुचि नेह से बनाया है।         […]

क्षणिका

क्षणिकाएं

*रंग-रूप* युवती का ऐसा खिला रंग-रूप। जैसे सूरज ने केशर-दूध में घोल दिया हो मुट्ठी भर धूप। *भूख* एक था एक थी दोनों भूखे थे। था को मिला तन थी को मिला धन दोनों हुए खुश। *रहमत* कोरोना काल में वह बोला सब से घर से बाहर कभी रह मत। क्योंकि घर में है रहमत। […]