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  • गीत – अब मत बांटो रे

    गीत – अब मत बांटो रे

    टुकड़ों-टुकड़ों में धरती को अब मत बांटो रे। बांट लिया घर, खेत, बाग, मत अम्बर बांटो रे।। गगन चूमते लम्बे तरु बादल पास बुलाते। गरज-गरज खूब बरसते भू की प्यास बुझाते। वृक्ष हमारे जीवन दाता, इन्हें...


  • धरती तपती

    धरती तपती

    तप्त तवा-सी धरती तपती। अम्बर से है आग बरसती।। गली-गली जल रही शहर की। कली-कली सूखी उपवन की।। साँय-साँय लू-लपट लगाये। तरु-छाया भी सिमट सुखाये।। पशु-पक्षी सब फिरें तड़पते। इधर उधर छाया को तकते। सूखे पोखर-ताल...