गीतिका/ग़ज़ल

लीक जैसे हादसे

दुर्व्यवस्था का वजन ढोते रहे हैं, तो लीक जैसे हादसे होते रहे हैं । खुल गया यह राज, इस राज में- वरना चुपके से लगा गोते रहे हैं । बबूल के अंकुर दिखते हैं कहाँ- उनके बड़े होने तक सोते रहे हैं । बस चलते जा रहे हैं आँख मूंदे- यूँ पीठ पीछे मंजिलें खोते […]

गीतिका/ग़ज़ल

जागते रहना

जो होता है होने दो ना, जो बोता है बोने दो ना । जागते रहना तुम भैया- जो सोता है सोने दो ना । मस्ती से जीवन जियो- जो ढोता है ढोने दो ना। रखो संभाले चरित्र को- जो खोता है खोने दो ना । पश्चाताप, कर पापों को- जो धोता है धोने दो ना […]

गीतिका/ग़ज़ल

आदमी

पहले था, लोग कहते भला आदमी- आज किस राह पर ये चला आदमी । इसकी मंजिल पूरब में ठहरी मगर- ये पश्चिम को चला दिलजला आदमी । जानवर के गुण, सब के सब पा लिए- जाने कौन सी किताबों से पला आदमी । इस धरा के जीव, जाएँ तो जाएँ कहाँ- कब किसे खा जाए […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

अपना जिसे समझा, हमारा कहाँ है, हमको हृदय में उसने, उतारा कहाँ है । सभी उड़ गए हैं, जो सपने थे पाले- पर कर्मों से ये जीवन संवारा कहाँ है । वह एक दिन मिल ही जाता हमें भी- किन्तु उसे, आत्मा से पुकारा कहाँ है । माँगकर भीख वह, ठेके पर गया था- अब […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सड़कों पर गुंडई दिखा वह खास हो गए, बदमाशी की परीक्षा में अब पास हो गए । ये राजा क्यो किताब से बाहर नहीं चलता- जब, टेड़ी अंगुलियों के सभी दास हो गए । सब हो गए हैं स्वार्थी, इस जंगल के पेड़ ये- झूंठे शब्द ही इनका अब विस्वास हो गए । इस घर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

करते क्या और जाने क्या हो जाता है, क्यों मौहार के छत्ते से हाथ लगाता है । पशु जाग्रत हो जाये, जिनके अन्दर- लाठी मारो, जब भी सींग हिलाता है । “सत्य मेव जयते” की बात पुरानी है- आजकल तो झूँठ ही शोर  मचाता है । आन्दोलन के पीछे शायद है कुछ और क्यों आखिर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हम मेघ से स्वयम को मिटाते चले गए, प्यासों की प्यास, ऐसे बुझाते चले गए । जो देते रहे, घृणा का धुआँ हमें सदैव- हम खुशी की बौछारें बरसाते चले गए । दुनिया को समझ ही ना पाए हम कभी- चालबाजों पर ही जीवन लुटाते चले गए । रिश्तों की राजनीति भी, कैसी हो गयी- […]

कविता

एक दीपक यहाँ भी

दीपावली को दीप कुछ जलाएं, इस धरा से, सारे अँधेरे मिटाएं । अहंकार जैसे कितने ही दानव- आकर बस गए, हृदय में हमारे- अन्दर या बाहर सुरक्षित नहीं हैं- अपने-पराये सब, शत्रु हैं सारे । रक्षा हिट ऋषियों की राम जैसे वीरता, आदर्श हम भी अपनाएं । जुआ-नशा सब गलत बात हैं ये इस पावन […]

गीत/नवगीत

अन्दर के रावण को

हे राम तेरे चरणों में, ध्यान लगाएं हम, जब भी गाएं, तेरे ही गुण, गाएं हम । दुःख की जड़,दुर्गुणों को मेरे दूर करो, सभी तरह के शत्रु, चकना-चूर करो । हनुमान से पात्र बनें हम भिलनी से- अपनी भक्ति से हमको, भरपूर करो । अपने जैसे ही सद्गुण, कुछ हमको दो- और संस्कार, तेरे […]

भजन/भावगीत

माँ दुर्गा स्तुति

ॐ ह्रीं दुंदुर्गाये नमः, नमस्कार स्वीकार करो ! मुझे भँवर से पार करो माँ, तुम मेरा उद्धार करो । धूं धूं धूमावती ठ ठ, सारे सुख प्रदान करो, करो क्षमा माँ मेरी गलती, और मेरा कल्याण करो । सब की सब बाधाएँ हर लो, दूर क्लेश-विकार करो, रोग-मुक्त, सुख-शान्ति युक्त, माँ मेरा परिवार करो । […]