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  • दोहा

    दोहा

    अगर पाण्डव पक्ष में, आगे आये स्वार्थ। धर्मयुद्ध में देखना, हार न जाएं पार्थ।। परिचय - प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून' नाम-प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून' जन्मतिथि-08/03/1983 पता- ग्राम सनगाँव पोस्ट बहरामपुर फतेहपुर उत्तर प्रदेश पिन 212622 शिक्षा- स्नातक (जीव...


  • खून उबलता है

    खून उबलता है

    लावा  जैसे ग़र  ये   दर्द   पिघलता   हैपलकों से कब इतना बोझ सँभलता है तब-तब  सब्र  टूटने  पर  मजबूर  हुआ जब-जब पानी सर के पार निकलता है सर्दी गर्मी बारिश लाख सितम  कर  लें मौसम है मौसम ...


  • बंदिश कड़ी है

    बंदिश कड़ी है

    इस तरफ़ यक  झोपड़ी  उल्टी  पड़ी  है उस तरफ़ दसमंजिला अब तक खड़ी है इसलिये  तूफ़ान   ने   बदला   है   रुख अब  रईसों   की  इधर  बस्ती   बड़ी  है साहिबों   के    फैसले  सारे सही हैं मुफ़लिसों की किस्मतों में ...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    चिंतन स्वयं से मुग्धता में और की कविता न भाती है महाकवि हैं कथित उनको न औरों की सुहाती है प्रतिस्पर्धा कलुष से हो रहित तो ही फलित होती अहमहमिका सदा कविमंच को नीचे गिराती है...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    एक रिश्ता तबाह कर डाला हाय ये क्या गुनाह कर डाला लब पे पहले हँसी तुम्हीं ने दी फिर तुम्हीं ने कराह कर डाला आशनाई में जान पे आयी काम ये ख़ामख़ाह कर डाला शेर की...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    तुम्हे सूरज के आगे सर झुकाना ही पड़ेगा विजय चिर चाहते तो हार जाना ही पड़ेगा कहाँ तक जाओगे आगे अँधेरा ही अँधेरा ये दावा है कि इक दिन लौट आना ही पड़ेगा -प्रवीण ‘प्रसून’ परिचय...

  • होली

    होली

    न या पिचकारी न वा पिचकारी होली म अबकी चलइबे दुधारी खाली तिजोरी पीएनबी की करिगें सगल बोझ मोदी के काँधें म धरिगें सफाई के अभियान के बनिगें अगुवा रंगारंग खुद होइके नीरव निकरिगें बड़े बोल...