गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खिली हुई है रंगत आहिस्ता से आये हैं। खुमार आँखों में ले नींद से जगाये हैं।। हसींन ख़्वाब हो जैसे वो आँखों के मेरी। करीब आके तसब्बुर में मुस्कुराये हैं।। लेकर के हाथों में प्याला शराब का यारो। नशा वो आज बड़े प्यार से पिलाये हैं।। वो बैठकर मेरे पहलू में गुफ्तगू कर लें। ये […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हम ठहरते नही फायदा देखकर। ये कदम रुकतें हैं गमजदा देखकर।। यूं तो आँखों में बसती है सूरत तेरी। चाँद फीका लगे कायदा देखकर।। लोग कहने लगे आजकल बेवफा। क्यूं लगी जान प्यारी बला देखकर।। जिनके ख्यालों में खुश्बू बसी है मेरी। क्यूं ठहरते वो फिर मैकदा देखकर।। याद आती रही मुझको शामों सहर। नींद […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो हम आइने में सवरने लगे। हमें देखकर वो मचलने लगे।। नशा इस कदर उनपे छाया के फिर। वो तो नींद में यारों चलने लगे।। जो आयी कयामत न पूछों ये तुम। सरे बज्म ही वो बहकने लगे।। न पूछो मुहब्बत में हाल फिर। वो शम्मा के जैसे पिघलने लगे।। गजब की कहानी लिखी शाम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दीद करने न आओ कोई गम नही। दूर से ही मगर गुनगुनाते रहो।। याद आ जाये तुमको कभी तो सनम। खत से रिश्ता हमारा निभाते रहो।। बात है कुछ दिनों की मुहब्बत से तुम। दिल की आवाज दिल को सुनाते रहो।। आने वाली सुबह बीते दिनों से है। बेहतर जानेमन गुनगुनाते रहो।। पल दो पल […]

गीतिका/ग़ज़ल

इश्क की आग

उसे इश्क की आग में अब जलने दो। कैदियों की तरह उसे भी मचलने दो।। हो गये रूसवा जमाने में जिसके खातिर। उस चाँद में दाग है जरा संवरने दो।। बंद करके मुट्ठी वो दिल मेरा ले जायेगा। राह में उसकी फूल तुम बिखरने दो।। तमन्ना है मेरी उसकी मजार के सामने। मेरा भी जनाजा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कभी दर्द लिखा कभी प्यार लिखा। खता भूलकर खत कई बार लिखा। न आया सनम तू न खत आये तेरे। तेरी ये खता आज ही यार लिखा।। मेरी आँखों से छलकतें हैं जो मोती। वो आँसू नही उनको तो हार लिखा।। मुझे याद आयी तेरी चलते चलते। तो कातिल तुझे मैने सरकार लिखा।। सजा क्या […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

आस उनसे हम लगा बैठे लोगो। आग दिल में यूं जला बैठे लोगो।। इस कदर उनसे मुहब्बत हो गयी। हम जमाना भी भुला बैठे लोगो।। याद आयी जब कभी उनकी हमें। बस यूं ही साहिल पे जा बैठे लोगो।। जानते थे खत पढ़ा जाता नही। लिख के खत उनको जला बैठे लोगो।। हैं वो पत्थर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

वो गजल आनलाइन लिखा करते हैं। जाने किस नाजनीं से वफा करते हैं।। कह दो कोई तो जाकर सनम से मेरे। हम तो बस उनके खातिर मरा करते हैंं।। कब पढेंगे वो मेरी गजल क्या पता। हम तो लिख लिख के आहें भरा करते हैं।। दिल में उनकी ही सूरत बसायी सुनो। और दीदार उनका […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उसने दिया हमको ये इल्जाम है। इश्क को हमने किया बदनाम है।। रूठ कर हम जाये किधर किस शहर। हर तरफ सद्दाम ही सद्दाम है। कत्ल करने की अदा भी है जुदा। कत्ल करके लिख दिया गुमनाम है।। खो गया वो खत किधर उसका लिखा। उसमें लिखा था मेरा पैगाम है।। बेवफा का साथ दूं […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

वो माँ मौत मांग रही थी आज अपने लिये। चराग की रौशनी में जिसने कपड़े सिये।। अब उसकी आँखों में रौशनी कहां थी। टिमटिमाते थे सिर्फ आँखों के दिये।। हाथों मे कम्पन था उसके तो बेहिसाब। सोचती थी कौन रात भर रोकर जिये।। जो जुबां शोर करती थी दिन रात। तरसती है दर्द अपना कहने […]