गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दर्द आँखों ने कह दिया होगा। जब जिक्र प्यार का हुआ होगा।। याद आये होंगे उसे जब तुम। अश्क आँखों से ही बहा होगा।। सीं लिये उसने लब तेरी खातिर। फिर भी बदनाम वो हुआ होगा।। होके पागल यहां वहां साहिब। नाम दीवारों पे लिखा होगा।। नज्म गायीं होंगी मुहब्बत की। दिल की आवाज भी […]

गीतिका/ग़ज़ल

मुकर गया वो

कहकर भी यारों मुकर गया वो। वादा खिलाफी मुझसे कर गया वो।। ताउम्र जलती रही शम्मा मगर। जमाने के डर से घर गया वो।। आस थी कि आयेगा लौटकर। चाँद पर लेकिन मचल गया वो।। जिद न हुई पूरी उसकी मगर। मुहब्बत भी बदनाम कर गया वो।। तमन्ना है कि मिले किसी मोड़ पर। दाग […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

देकर दगा यूं मुहब्बत में फिर गया कोई। किये थे वादे मगर बेवफा हुआ कोई।। गली गली में वो बदनाम हो गया आशिक। मुझे भी नाम देकर फिर भुला गया कोई।। जली होगी यूं मेरी ही तरह कभी शम्आ। मुझे भी खाक में मिला चला गया कोई।। तरस गयी ये मेरी आँखें राह को तक […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

पहलू में बैठ कर तेरे मेरे कम़र लिखूं। जी चाहता है आज तुझे रात भर लिखूं।। जो कह दे तू जहां को भुला दूं तेरे लिये। तेरे ही नाम कह दे तो सारी उमर लिखूं।। ये सादगी तेरी ये तेरा बांकपन सनम। कहता है दिल मेरा तुझे शामों सहर लिखूं।। दिल पर मेरे कोई है […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खिली हुई है रंगत आहिस्ता से आये हैं। खुमार आँखों में ले नींद से जगाये हैं।। हसींन ख़्वाब हो जैसे वो आँखों के मेरी। करीब आके तसब्बुर में मुस्कुराये हैं।। लेकर के हाथों में प्याला शराब का यारो। नशा वो आज बड़े प्यार से पिलाये हैं।। वो बैठकर मेरे पहलू में गुफ्तगू कर लें। ये […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हम ठहरते नही फायदा देखकर। ये कदम रुकतें हैं गमजदा देखकर।। यूं तो आँखों में बसती है सूरत तेरी। चाँद फीका लगे कायदा देखकर।। लोग कहने लगे आजकल बेवफा। क्यूं लगी जान प्यारी बला देखकर।। जिनके ख्यालों में खुश्बू बसी है मेरी। क्यूं ठहरते वो फिर मैकदा देखकर।। याद आती रही मुझको शामों सहर। नींद […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जो हम आइने में सवरने लगे। हमें देखकर वो मचलने लगे।। नशा इस कदर उनपे छाया के फिर। वो तो नींद में यारों चलने लगे।। जो आयी कयामत न पूछों ये तुम। सरे बज्म ही वो बहकने लगे।। न पूछो मुहब्बत में हाल फिर। वो शम्मा के जैसे पिघलने लगे।। गजब की कहानी लिखी शाम […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दीद करने न आओ कोई गम नही। दूर से ही मगर गुनगुनाते रहो।। याद आ जाये तुमको कभी तो सनम। खत से रिश्ता हमारा निभाते रहो।। बात है कुछ दिनों की मुहब्बत से तुम। दिल की आवाज दिल को सुनाते रहो।। आने वाली सुबह बीते दिनों से है। बेहतर जानेमन गुनगुनाते रहो।। पल दो पल […]

गीतिका/ग़ज़ल

इश्क की आग

उसे इश्क की आग में अब जलने दो। कैदियों की तरह उसे भी मचलने दो।। हो गये रूसवा जमाने में जिसके खातिर। उस चाँद में दाग है जरा संवरने दो।। बंद करके मुट्ठी वो दिल मेरा ले जायेगा। राह में उसकी फूल तुम बिखरने दो।। तमन्ना है मेरी उसकी मजार के सामने। मेरा भी जनाजा […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कभी दर्द लिखा कभी प्यार लिखा। खता भूलकर खत कई बार लिखा। न आया सनम तू न खत आये तेरे। तेरी ये खता आज ही यार लिखा।। मेरी आँखों से छलकतें हैं जो मोती। वो आँसू नही उनको तो हार लिखा।। मुझे याद आयी तेरी चलते चलते। तो कातिल तुझे मैने सरकार लिखा।। सजा क्या […]