गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कभी दर्द लिखा कभी प्यार लिखा। खता भूलकर खत कई बार लिखा। न आया सनम तू न खत आये तेरे। तेरी ये खता आज ही यार लिखा।। मेरी आँखों से छलकतें हैं जो मोती। वो आँसू नही उनको तो हार लिखा।। मुझे याद आयी तेरी चलते चलते। तो कातिल तुझे मैने सरकार लिखा।। सजा क्या […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

आस उनसे हम लगा बैठे लोगो। आग दिल में यूं जला बैठे लोगो।। इस कदर उनसे मुहब्बत हो गयी। हम जमाना भी भुला बैठे लोगो।। याद आयी जब कभी उनकी हमें। बस यूं ही साहिल पे जा बैठे लोगो।। जानते थे खत पढ़ा जाता नही। लिख के खत उनको जला बैठे लोगो।। हैं वो पत्थर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

वो गजल आनलाइन लिखा करते हैं। जाने किस नाजनीं से वफा करते हैं।। कह दो कोई तो जाकर सनम से मेरे। हम तो बस उनके खातिर मरा करते हैंं।। कब पढेंगे वो मेरी गजल क्या पता। हम तो लिख लिख के आहें भरा करते हैं।। दिल में उनकी ही सूरत बसायी सुनो। और दीदार उनका […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

उसने दिया हमको ये इल्जाम है। इश्क को हमने किया बदनाम है।। रूठ कर हम जाये किधर किस शहर। हर तरफ सद्दाम ही सद्दाम है। कत्ल करने की अदा भी है जुदा। कत्ल करके लिख दिया गुमनाम है।। खो गया वो खत किधर उसका लिखा। उसमें लिखा था मेरा पैगाम है।। बेवफा का साथ दूं […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

वो माँ मौत मांग रही थी आज अपने लिये। चराग की रौशनी में जिसने कपड़े सिये।। अब उसकी आँखों में रौशनी कहां थी। टिमटिमाते थे सिर्फ आँखों के दिये।। हाथों मे कम्पन था उसके तो बेहिसाब। सोचती थी कौन रात भर रोकर जिये।। जो जुबां शोर करती थी दिन रात। तरसती है दर्द अपना कहने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कसक दिल में उठती रहेगी तुम्हारे लिये। आंख भी रोज भरती रहेगी तुम्हारे लिये।। बेरूखी तुम्हारी दर्द मेरा बढ़ाती ही रहेगी। इक आह निकलती रहेगी तुम्हारे लिये।। जिस गली मे चर्चा तुम्हारा होगा सनम। वही पर रूह मचलती रहेगी तुम्हारे लिये।। बीच मझधार में तुमने दामन छोड़ा मेरा। अब जिन्दगी डसती रहेगी तुम्हारे लिये।। ख्वाब […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

मिला क्या मुहब्बत जताकर हमें। गया मुस्कुराते रूलाकर हमें।। ये दिल मानता कब हमारी सनम। हुआ खुश ये अक्सर जलाकर हमें।। न सुकूं न चैनो अमन है मिला। बदल कर गया इश्क आकर हमें।। करेगा दगा हमसे शायद सनम। गया धोखे से वो सुलाकर हमें।। यकींनन मुहब्बत नही मुझसे है। तभी वो गया मुंह चिढ़ाकर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल/ गीतिका

अब कहां लोग प्यार करतें हैं । इश्क में बस शिकार करतें हैं।। पूरे अरमान करने को वो तो। रूप देखो हजार करतें है।। आँखों में अब नही होता पानी। बातें तो बेशुमार करतें हैं।। चांदनी रात में जो खत लिक्खे। उनको वो तार तार करतें हैं।। उनको परवाह है नही साहिब। दिल में बस […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

चैन से जी रही थी क्यूं सताने आ गये। दिल में घर अपना क्यूं बनाने आ गये।। मिलता नही करार मुझे पल भर के लिये। बेचैनी फिर मेरी तुम क्यूं बढ़ाने आ गये।। वादा किया जो तुमने कभी निभाया नही। कसमों को तोड़ने के क्यूं बहाने आ गये।। अजीबो गरीब दास्तां है ये हमारी तुम्हारी। […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

वक्त ये कटता नही इन्तजार का। खत तेरा आता नही इकरार का।। बस ख्यालों में तेरे यूं ही डूबी रहूं। अहसास होता रहे तेरे प्यार का।। तेरे मेरे बीच कोई आने न पाये। न हो फैसला कभी जीत हार का।। तन्हाई में तू मेरे साथ रहे हरपल। मजा लेती रहूं मैं तेरे दीदार का।। दौर […]