गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

शम्मा की तरह परवाना जलता रहेगा। ताक मे बैठकर वो आहे भरता रहेगा। नही आमंत्रण है उसे करीब आने का। दूर से देखो दीदार अब करता रहेगा।। जमीं की तिश्नगी पुकारती जोर शोर से। बादल बरसने को फिर तरसता रहेगा।। नही वफा सीखी अगर उसने प्यार में। चांद बन आंसमा में ही चमकता रहेगा।। हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

हमको हमारा गम भी प्यारा है। गम है कि गम दिया तुम्हारा है।। गुमान करने की इम्तहां हो गई। नही अब ये तहजीब गंवारा है।। क्यूं तन्हाई का दर्द सहूं रहबर। हाथ जब हाथ में मेरे तुम्हारा है।। नही अगर ऐतबार है तुम्हे तो। पूछ लो खुद से क्या गंवारा है।। रोज कहां हार होती […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

निभाया हैं हमने और निभाते रहेंगे तेरी बज्म में हम तो रोज आते रहेंगे खुदा का करम है हम पर सुनो तुम दर पे उसी के ये सर झुकाते रहेंगे मिलते कहां हो तुम हमसे ओ रहबर ताने सुनाकर हमें लोग जलाते रहेंगे पड़ जाये हम पर नजर इनायतें जो दिलो जां सब अपनी लुटाते […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

आंसू बिकाऊ हैं इश्क के कीमत लगाओ यारों । बेच दो इसको या फिर इसको बचाओ यारो।। तड़प रहा है सदियों से बेघर होकर यहाँ वहाँ । है निलामी इसकी बज्म मे तुम भी आओ यारो।। पहनकर घुंघरू आज की रौशन शाम कर दी है। जनाजा सजाने से पहले इसको ले जाओ यारो।। बिखर न […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका/गजल

इश्क तो अब आजमाया जा रहा है। खेल दिलो का दिखाया जा रहा है।। टूटकर बिखरता है बेचारा बार बार। शीशे की माफिक बताया जा रहा है।। खेलने वाले खेल लेते है ये खेल भी। मरकर भी इसे आजमाया जा रहा है।। जो रूठकर चले गये इस जहान से। उन्हे ही गुनाहगार बताया जा रहा […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

निगाहों में राज कैसा छुपाये हुये हो। दर्द क्या है जो दिल में दबाये हुये हो।। छोड़ दो कश्ती भंवर मे डूब जाने दो। मझधार में नइया क्यूं फँसाये हुये हो।। हो अंजाम जो भी उसका हो जाने दो। साहिल पे क्यूं आंखें लगाये हुये हो।। कभी मीठी कभी खट्टी बाते हुई हमसे। कड़वी पे […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका – याद आये तो…

याद जो उनकी आये मुस्कुरा लिया करो! याद मे उनकी गजल कोई गा लिया करो!! है जो शोखियां बुलन्द महबूब के आपकी! लाजिमी लगे तो उन्हे जरा हवा दिया करो!! नकाब जो सरका महबूब का तेरे खातिर! तीरे नजर का झुककर वास्ता दिया करो!! दहकती हुई आग को न देना तुम रास्ता! हसकर अपने रकीब […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका – अब न आयेगी लौट…

अब न आयेगी लौटकर वो रात कभी! बांहो मे बांहे लेकर बैठे थे साथ कभी!! आंखो में आंखे डालकर मुस्कुराना तेरा! चुपके से कह देना दिल के राज सभी !! वो खींचकर आगोश मे ले लेना तेरा ! और छेड़कर जाना दिल के तार सभी!! खामोश जुबां से किया करते थे बातें तुम! पूछ लो […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

मोहब्बत का गुजरा जमाना याद आ गया संग तेरे सरेराह मुस्कुराना याद आ गया पढ़ा करते थे किताबें तुम रौब में आकर पन्ने पलटकर मुझे दिखाना याद आ गया हुआ करती थी शीतल चांद की हसीं रातें चरागों का जलाकर बुझाना याद आ गया करते कहां थे तुम उन किताबों से गुफ्तगूं बातों-बातों में हमको […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल / गीतिका

अब न आयेगी लौटकर वो रात कभी! बांहो मे बांहे लेकर बैठे थे साथ कभी!! आंखो में आंखे डालकर मुस्कुराना तेरा! चुपके से कह देना दिल के राज सभी !! वो खींचकर आगोश मे ले लेना तेरा ! और छेड़कर जाना दिल के तार सभी!! खामोश जुबां से किया करते थे बातें तुम! पूछ लो […]