कविता

कविता

बैठे नयनों घुटनों के बल रहे फ़ीचते मन के मैल……. गिर गिर कितने सारे जलकण अंतिम पथ के धोते शैल…. उखड़ बिखर संगी बन चलती फिर फिर गति स्वासों की मिटा रही अविराम भित्ति से स्मृति अंधियारी रातों की……. मेहनतकश हाथों पर लिखता अंतहीन पीड़ाएँ कौन विचर रहा नस नस अति विह्वल क्रंदन करता विचलित […]

गीत/नवगीत

सीप के घर ठिकाना चाहती हूँ

सीप के घर ठिकाना चाहती हूँ आज कुछ गुनगुना रहा है दिल आज मैं गीत गाना चाहती हूँ। धड़कने सुर सजा रही कुछ ऐसे साज़ दिल का बजाना चाहती हूँ।। महकते गेसुओं को झटककर तुम्हें खुशबू उढाना चाहती हूँ । तुम चमक जाओ चाँद की तरह तारे ऐसे सजाना चाहती हूँ।। तार टूटे न साज़ […]

कविता

पाँव अब उतने छोटे नही रहे

पाँव अब उतने छोटे नही रहे ================ तुम्हें कागज़ की कश्तियों से पार उतरना पसंद था कभी उपहास करती थी मैं तुम्हारी ये हल्की बातें सुन .. शायद बचपना ही था मेरा कि तुम तो पार उतर गये हवाओं से रुख मिला और मैंने ,,,? एक उम्र गुजार दी यहाँ लकडियाँ चुनते बीनते जोड़-तोड़ -जीवन […]

गीत/नवगीत

नयन ये चार होने दो

नयन से आज ओ प्रियतम नयन ये चार होने दो। कि ये तन आज फिर से प्रेम की बीमार होने दो।। लिखूँ मैं भीगी पाती फिर नमी पलकों कोरों से। कहीं अति दूर फिर से इक हृदय यलगार होने दो ।। हवा ख़ुशबू बटोरे स्वांस संग हलचल करे भीतर अधर बेचैन शब्दों के प्रबल उदगार […]

गीत/नवगीत

नयनों यूँ मत तोल

जिस दिन टकराये अनजाने नयनो के कुछ बोल हूक उठी भीतर अनजानी पीर मिली बिन मोल लाज सिहर सिमटी अनबुझ सी प्यास जगी मन धड़की निजता निज पर तकि अद्भुत आकर्षण अधर फड़कते पाँव थिरकते हृद जाग्रत सौ प्रश्न मिले न उत्तर यह प्रसंग क्या करते यत्न प्रयत्न दिवस दीर्घ निशि ज्यो लघु लगती मन […]

कविता

यूँ मत देख…

यूँ मत देख कि झुलसती हूँ बहुत तनिक तो कभी ओटकर के देख। तपिश हर वक्त ही सही नही होती कभी तो ओस की तरह झरके देख ।। माना कि बहुत तंग हुई हैे गलियां, जिधर रहते रहे हम बरसों से । कभी चढ़कर खुली छत पे मन की फुर्सत की हवाओं में बह के […]

गीत/नवगीत

एक पाती लिखनी तुमको

  एक पाती लिखनी तुमको क्या आज लिखूँ विरह कहूँ प्रिय या मिलने के अंदाज लिखूँ ।। आन मिले जब निपट अँधेरी रात प्रिये सिहर उठा जब पोर पोर ये गात प्रिये पकड़ हथेली मचल पड़े जब  सन्नाटे थे तकि दर्पण मुख बिम्ब पसरती लाज लिखूँ ।। आलिंगित से दृष्टिपात मन भीतर मंथन भ्रमित चित्त […]

गीतिका/ग़ज़ल

आसमां तक हलाल रखा है

दर्द ए बेहिसाब को कुछ यूं सम्भाल रखा है लबों पे हँसी और आँखों मे सवाल रखा है ।। बात इतनी सी ही हो हर बात बड़ी होती है। ज़ुबाँ की एक धार ही ये सारा बवाल रखा है।। रूह के रिश्तों में जिस्मों की ज़रूरत कब है। इश्क़ अय्याश नही जो इतना उछाल रखा […]

गीतिका/ग़ज़ल

तन्हाई आई है

निगाहों धुंध बेहद है घनी बदली सी छाई है दिल में दस्तक देती फिर से तन्हाई आई है ।। आब आँखों में भरा औ प्यास कि बुझती नही जाने किस डगर चलके ये तेरी याद आई है ।। छलछला उठी है माथे बूंदें सिसकती सी हुई कुछ बरस पड़ने को अब सांसें हुई पुरवाई है […]

गीत/नवगीत

तुम मिलो ना मिलो मग्न संसार में

कौन जाने कि कल वक्त कैसा यहां तुम मिलो ना मिलो मग्न संसार में, चार पल की मिली ज़िंदगानी यहां दो घड़ी का मिलन कोई सुंदर सपन आस की साँस घूंघट में टूटे न अब दो घड़ी ही सही प्रीत जी लो सजन ।। आज सूरज जो लेकर गगन है चढ़ा साँझ लेकर वो पल […]