गीत/नवगीत

मन के तीर बड़ी हलचल

मेरे मन के तीर बड़ी हलचल…. तंगहाल हो रही डगर नित आशाओं की बदल रहा जीवन क्षण क्षण परिभाषा भी जगे स्वप्न आँखों निशि दिन अगिन रंग के खेले खेल नींद नयन को पग पग देते छल ….. ढलक चिढ़ाए मुँह दर्पण लख बेबाक जवानी उथलाती तन रही उतर हृदय जो बनी रूहानी राग रंग […]

कविता

कविता : बस एक प्रीत तुम्हारी

बस एक प्रीत तुम्हारी जिसने मुझे मीरा तुम्हें श्याम बनाया बस एक बात तुम्हारी जिसने तन मन एक संग्राम रचाया रच-रच स्वप्न घरौंदे नित मैं इर्द गिर्द हूँ धरती फिरती कोण-कोण तेरे रूप सजाए हर चौखट पर दृष्टि बिछी प्रण है दृढ और प्रीत परीक्षा सहज नही ये परम प्रतीक्षा लहरों लहरों गिरती उठती आस […]

गीत/नवगीत

गीत

इन अश्कों को सियाही मैं आज कर डालूँ , चलो इस दिल को ही अब क़लम कर लूँ । जुबां अल्फ़ाज़ रख जो बयाँ कर नही पाती, वो हाल-ए-दिल मेरा तुमसे ए सनम कह लूँ ।। थिरकती नाचती होठों पे जो मुस्कान है देखी वहीं जलते हुए शोलों से कुछ अंगार रक्खे हैं धधक उठते […]

गीत/नवगीत

जब तुम हृदय विराजे

मंदिर मंदिर क्यो भटकूँ मैं जब तुम हृदय विराजे रग रग तन्मय प्रेम तुम्हारे भाल तुम्ही हो साजे नयन ज्योति आरती उतारूँ मैं तुमपर सब हारी तुम संग लगन लगी है जबसे सुध बुध बिसरी सारी आलिंगन जयमाल बना और स्वासों धूप जलाऊँ सुर मंजीरे हृदय थाप पर मन मिरदंग बजाऊं तन शाकल्य करूँ हवि-जीवन […]

कविता

मुश्किल दरवाजों से गुज़र

ज्ञान का एक असीम भंडार मस्तिष्क बस एक सोच ही होगी कुछ क्लिष्ट पग पग हृदय पथ दिखाता रहा हाथ पकड़ एक यही जड़ न कर पाई कहीं अपना घर क्यों न अब कुछ एक दिन ऐसा कर लें इन पञ्च पटों की आभास ऐन्द्री बन्द कर लें काया को देते हुए तनिक विश्राम माया […]

गीतिका/ग़ज़ल

मेरा नाम होने लगा है

शहर की गलियों में चर्चा आम होने लगा है। एक तेरे नाम से अब मेरा नाम होने लगा है ।। वो जो बैठे थे अब तलक मुँह पर ताले डाले । ज़ुबाँ से उनकी भी अब ये काम होने लगा है।। कोई बोला निगाहन और कोई जुबानी बोला। हवाओं का रुख़ कुछ बेलगाम होने लगा […]

गीत/नवगीत

श्याम तुम्हें कौन बुलाता

जो हम ना होते रंग श्वेत श्याम तुम्हे कौन बुलाता ऐसा ही होता है प्रियतम रंग रंग का रिश्ता नाता ।। ज्यों भोर अधूरी बिन रैना धवल काले बिन आधा सुख आधा बिनु दुःख चाखे जय आधी बिन बाधा ।। दो रंगों बिनु सूने नयना मूरत बिनु मंदिर लगे आधी । धरनि अधूरी बिनु अंबर […]

गीतिका/ग़ज़ल

आग का दरिया सुने ज़माना हो गया

उजड़ी नींदों का सफर भी तब सुहाना हो गया यूँ गुज़रा छूकर वो दिल तो बस दीवाना हो गया करवटों पे लिख रहा था जब दर्द कुछ इबारतें सिलवटों से मन की खेल वो परवाना हो गया ।। ख्वाब थे खामोश जागे सोये मचल कर हँस पड़े एक अदद इनकार सौ बातों का बहाना हो […]

गीत/नवगीत

जाकी अँखियों तेरी प्यास

बैठी चुप आगार मैं प्रज्वल दीपक दिशि चार हर झोंके से लड़ रहीं पलकें निज बाँह पसार।। दिशा भरम ना हो तुम्हेे ये दुनिया सजा बाजार। आ जाओ हृद प्रेम भर मोरी बाती जले कुम्हार ।। टलना छलना और लूटना जिसका हो ब्यौपार। छिटके हाथों का मोल तुझे क्या देगा वो संसार ।। यहाँ घर […]

गीत/नवगीत

मैं तो तेरी नगरी चलती हूँ

इन दो आँखों की कश्ती में साजोसामान सभी रखकर। धाराओं का रुख करती हूँ मैं तो तेरी नगरी चलती हूँ ।। पल प्रतिपल पार बुलाते हो औ मुखर इधर मुस्काते हो । किस धार बहूँ बोलो तब प्रिय पतवारे जब ठग ले जाते हो ।। मत खेलो ये ऊसर खेल प्रिये नयनो संग कर लो […]