गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दिल अदद पत्थर हुआ यूं चोट खाई ज़िंदगी । आंख ही बहती रही बह ना सकी ये ज़िंदगी ।। वो खफ़ा मुझसे है या फिर है ख़फ़ा ये जिंदगी बात कुछ भी हो मग़र नही ज़िंदगी सी ज़िंदगी।। रोशनी घुलता अंधेरा गर्दिश में लिपटी ज़िंदगी। बस धुआं ही औ धुआं कुछ यूं जली ये जिंदगी […]

कविता

सत्य का एक रंग श्वेत

हम सत्य के जितने करीब उतने उज्ज्वल,उतने धवल सत्य का सिर्फ एक रंग “श्वेत” विलीन है जिसमे रंग अनेक मिथ्या है केशों लिप्त ये कालिमा देह के सत्य ने अनवरत शुरू कर दिया जो यह बोलना भ्रम गुंथे मन बंधन को खोलना झुकने लगे अनुभवों से लदे वृक्ष देखो प्रगाढ़ होती इन झुर्रियों पर लटक […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वो बात ही कुछ ऐसी कर गए होंगे कि ख्वाब पलकों से फ़िसल गये होंगे ।। यूँ तो बेदर्द नही था वो कभी इतना वक्त अपनी करवट बदल गए होंगे ।। धूल चेहरे पे उड़ाते रहे कि पहचान न होअश्क भी बहने से मुकर गए होंगे ।। शहर में चर्चा गर्म था अपनी आशनाई का […]

गीत/नवगीत

उस पार जुलाहा बैठा है

एक चादर हुई झीनी तो क्या कोई ग़म मत कर यार उस पार जुलाहा बैठा है और हम आये मझधार, मैल कुचैली फटेहाल अब ये कैसी भी है धोहु पखारू ओढ़ ढाँक ये सूरत कैसी भी है दिन दोपहरी साँझ रात हों कितने ही विकट प्रहार अभी देह ढाकन को काफी मुख काहे ये मलिन […]

गीत/नवगीत

नमो नमो जय मोदी जी

नमो नमो जय मोदी जी हर दर्जे हर पर्चे में है अब खबर गर्म बस मोदी जी बड़े बड़े दिग्गज की काया जिसने पल में धो दी जी उजले कपड़े भीतर दाबी काली करतूतें जिसने भी घूम रहे बौराये से वो सुधबुध जैसे सब खो दी जी ।। मोदी जी मोदी जी नमो नमो जय […]

कविता

ज़िन्दगी …वहीँ तुम मिलोगी

ज़िन्दगी… अब तक तुमने जितने भी रेखाचित्र बनाये सूखी भुरभुरी इस रेत पर मिटने नही दिए मैंने उनके नामोनिशान… जिस दिन भी चाहो पलटकर देख लेना बन्द मुट्ठी को तुम खुले आसमान…. कितनी भी फिसलन भरी रही फिर, तासीर तुम्हारी सहेज कर ही रखा तुम्हें जिस दिन भी चाहो पलटकर देख लेना किसी दरिया के […]

गीत/नवगीत

तुम्हें लिखनी ये पाती है

अदाएं याद आती हैं वफायें याद आती हैं मेरे गुजरे हुए लम्हे तुझे लिखनी ये पाती है तुम्हारे देस की यादें तुम्हारे भेस की बातें फुहारों भीगते से दिन महकती चांदनी रातें बहुत हो दूर भी हमसे मन से तुमको मिलाती हैं वफ़ा तुमने नही छोड़ी मैंने शिद्दत नही तोड़ी यही एक आसरा अपना न […]

गीत/नवगीत

खेलें खेल श्याम लरकैयां

राधा सयानी संग श्याम खेलि रहे खेल लरकइयाँ,,,, धाय चढ़े पेड़ जाके लुके डालिन की ओट छलिया कूक रहे ,कोकिल सम ढूंढे गोरी लिए संग गुइयाँ,,,,, भटक थकी चार दिसा सुन सुन नव खगहिं भासा रूठ मटक बैठ गयी थकी राधे कदम की छैयां,,,,,, जानि रुठी राधा रानी रसिया बोले अपनी बानी धाय लपकी तरु […]

कविता

कविता : कहो क्या ऐसी कोई प्रीत रीत

सज धज वो डोली आई थी लाखों अरमान संग लायी थी एक छोर लहू को रख सहसा एक डोर बंधी चली आई थी कहो क्या ऐसी कोई प्रीत रीत तुमने भी कभी निभाई थी एक माटी से दूजी आकर खुद मुरझाई जड़ें जमाई थी एक उपवन महकी खिली बहुत एक मधुबन लगी बनाये थी बाबुल […]

कविता

कविता : प्रिय तुम होते जो पास

प्रिय तुम होते जो पास मन मगन मोर बन जाता दिशा चतुर्दिक पियू पियु का शोर गगन तक जाता सुन रथ पर चढ़ आ जाते बादल छा जाते हर छोर तृषा धरा की मिट जाती खिल उठते तन मन पोर कर श्रृंगार ठुमक संग चलती डाल हाथ में हाथ दिन कब ढलते खबर न होती […]