गीतिका/ग़ज़ल

खिलौना

अनमोल है ये जीवन,  इसे खोना नहीं सोचो अपनों के बारे, पड़े उन्हें रोना नहीं गिनना अपनी खुशियां, अपने सुख को याद रखो कभी दु:खों की माला पिरोना नहीं जीवन की बगिया में खिले कई सुंदर फूल इन्हीं से मन भरो, बस विलग होना नहीं सभी यादें तो सुखदाई नहीं होती कभी जो दु:ख देती […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी

आज आंखों में आंसू उतर आए। जैसे शाम को भूला कोई घर आए। कई सदियां बीत गई जैसे, और फिर वही रहगुजर आए। उस अजनबी को देखा तो सिलसलेवार, हो ताजा याद ग़म -ए- सफ़र आए। याद आते ही वो एक नाम, बस आंखों में शिकन उभर आए। भूला बैठे हैं हम खुद को ही, […]

गीतिका/ग़ज़ल

कोरोना- एक कालखंड 

एक कालखंड हमें अनुशिक्षित कर रहा जो था पुरातन उसे अनुशंसित कर रहा त्यागना होगा जो है पश्चिम से मिला फिर बने सनातन,  अभिमंत्रित कर रहा जिन वस्तुओं बिन जीवन था अकल्पनीय उन सभी भोगों को अनवांछित कर रहा विलास से परे, आवश्यकता ही भर को निस दिन ये जीवन आधारित कर रहा समय की […]

कविता

अनबूझा

संतप्त हैं, पर तृप्त हैं है क्षेम, न अभिशप्त हैं हम हैं मनु, हैं मनस्वी कई तप किये, हैं तपस्वी कुछ के लिए वरदान हैं कईयों के हम अभिमान हैं मीरा भी हम, शिव भी हुए अमृत बाँटे, हलाहल पिये हिमवान से हैं हम शीतल कभी पावस वृष्टि से सजल अग्नि से ज़्यादा ही ज्वलंत […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी

आज आंखों में आंसू उतर आए। जैसे शाम को भूला कोई घर आए। कई सदियां बीत गई जैसे, और फिर वही रहगुजर आए। उस अजनबी को देखा तो सिलसलेवार, हो ताजा याद ग़म -ए- सफ़र आए। याद आते ही वो एक नाम, बस आंखों में शिकन उभर आए। भूला बैठे हैं हम खुद को ही, […]

गीतिका/ग़ज़ल

सिफर 

सारा जहान घूम कर सही, आती है ज़रुर जो आह निकले, वो रंग दिखाती है ज़रूर  वक़्त चलता जाता है, कभी ठहरता नहीं आदत पुरानी है ये, कुछ सिखाती है ज़रूर सांस-दर-सांस कई साल बीतते गए रवायत पुरानी है मगर निभाती है ज़रूर सुबह आंखें खोलने से रात पलकें मूंदने तक कुछ और न हो, […]

कविता

शाद

कुछ कहना चाहती हूं, कि दिल मेरा शाद है लब खोलना चाहती हूं, यह अब तो आज़ाद है जो राह चुनी मैंने कभी.. वह ख्वाबों से आबाद है यूं चले सफर अपना, इतनी फरियाद है दैर हो या हरम हो, अमन बुनियाद है पुरसुकून ना हो गर, जिंदगी बर्बाद है मेरे संग था औ’ संग […]

कविता

सारे जवाब बनना

हार यूँ तो मैं मानती नहीं मायूस होना जानती नहीं फिर भी लाज़िम है कभी ग़मग़ीन मैं हो भी जाऊँ जानती हूँ तुम ग़मज़दा कभी मुझे होने नहीं दोगे दुनिया के दश्त-ए-ग़म में कभी मुझे खोने नहीं दोगे तुम हौसला तो हो मेरा मेरी जान भी हो तुम जिसपे नाज़ कर सकूँ मेरा मान भी […]

गीत/नवगीत

कई साल मिले

लम्हों की चादर तले दबे कई साल मिले ख़ुशनुमा चेहरे सारे वही ग़म-ए-हाल मिले सोचती मैं थी हमेशा सब मेरे जैसे तो हैं हमसफर मिले कई कहां हमख़्याल मिले? खुशनुमा चेहरे सारे वही ग़म-ए-हाल मिले रंग सारे शोख़ थे सभी खूबसूरत थे दिल को भा जाए जो वो कहां जमाल मिले! हाथ मिलाए सबने ही […]

गीत/नवगीत

मेरी इक चाह

तुम सागर हो गहरे प्रेम का मेरे प्रियतम तुम प्रेम अथाह तुम में डूब कर मैं तर जाऊं है बस यही मेरी इक चाह मैं प्रीत की चुनरी धानी ओढ़े चाहूँ तुम्हारे नाम की पनाह भर दो मांग तो निखर जाऊं है बस यही मेरी इक चाह मेरे दिन-रैन हुए तुम्हारे अब कहीं लगे न […]