Author :

  • महफूज़

    महफूज़

    पता नहीं कितनी ही सदियों से … वर्ष दर वर्ष बंधती आ रही है राखियां बुजुर्गों ने बताया महत्व राखी बंधवाने वाला करता है हिफाज़त राखी बांधने वाले की हर इक लड़का राखी बंधवाता है और...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    कभी यूँ भी हो तुम करो मेरा इंतज़ार जब भी तेज़ हवा का झोंका खोले खिड़की के पट तुम बरबस देखो उस ओर शायद मैं वहाँ तो नहीं… और मैं …. मैं बहती जाऊं हवाओं संग...

  • दुःखता है

    दुःखता है

    कुछ दुखता है ….. जब खोकर अपना अस्तित्व, मिटाकर अपना सम्पूर्ण वजूद भी नही मिलता मुझे मेरे अधिकार जब रखती हूं तुम्हारी छोटी-छोटी बातों का ख़्याल और परवाह नही होती तुम्हें मेरी छोटी सी आदत की...

  • हम फिर मिलेंगे

    हम फिर मिलेंगे

    हम फिर मिलेंगे कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में हम फिर मिलेंगे …. गर बनोगे तुम आकाश मैं धरती बन अंतिम छोर तक तुमसे मिलने की करती रहूंगी कोशिश झुकना होगा तुम्हें भी मुझे...

  • शब्द

    शब्द

    शब्द ही तो हैं हमारे मध्य शब्दों में ही है हमारा संसार धुन की लय में बहते हुए शब्द कह जाते हैं कानों में बहुत कुछ कभी प्रेम , कभी तकरार कभी इज़हार , कभी इनकार...

  • उम्मीदें

    उम्मीदें

    2212 2212 2212 बैसाखियों पर चलती उम्मीदें मेरी अब नफरतों पर पलती उम्मीदें मेरी न मिला शजर, न मिली कली कोई कभी बनकर परिंदा उड़ती उम्मीदें मेरी शब रो रही महताब के आगोश में तारों के...

  • सपना

    सपना

    क्यों होता है मेरे मनवा तू बेकल कोई सपना बुन लेना फिर तू इक कल मध्यम पड़ जाए ये सूरज भी तुझसे बादल को अपना तू कर लेना आँचल चाहत की राहें मत समझो तुम आसां...

  • तन्हा दीवानी

    तन्हा दीवानी

    जिंदगी बन कर तेरी मेरी कहानी रह गई, आँखों में बस मेरी अश्कों की रवानी रह गई, रास न आया ज़िंदगी को मेरा आँचल फूलों का काँटे ही दामन में इकलौती निशानी रह गई, हसरतों की...

  • बस तुम

    बस तुम

    जाना चाहते हो तुम तो शौक से चले जाओ मगर सुनो….. लगा देना किवाड़ यादों के दरवाजे को कहीं विस्मृतियों के वन से पवन संग बहकर चली न आये याद कोई जो कर दे परेशां ….....

  • राह

    राह

    क्यों देखती हूँ बेवजह तेरी राह जबकि ख़बर है न आओगे तुम खो चुके हैं अहसास सारे मर गए हैं रिश्ते हमारे फिर भी दिल तलाशता है तुम्हें पता है इन अहसासों को कभी न समझ...