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  • बस तुम

    बस तुम

    जाना चाहते हो तुम तो शौक से चले जाओ मगर सुनो….. लगा देना किवाड़ यादों के दरवाजे को कहीं विस्मृतियों के वन से पवन संग बहकर चली न आये याद कोई जो कर दे परेशां ….....

  • राह

    राह

    क्यों देखती हूँ बेवजह तेरी राह जबकि ख़बर है न आओगे तुम खो चुके हैं अहसास सारे मर गए हैं रिश्ते हमारे फिर भी दिल तलाशता है तुम्हें पता है इन अहसासों को कभी न समझ...

  • अनजाना डर

    अनजाना डर

    अनजाना डर आज बिटिया को बैंकिंग की परीक्षा देने नवी मुंबई जाना था। सुबह-सुबह उठकर तैयार होकर जाने लगी तब अचानक याद आया आज तो लोकल ट्रेनों का मेगा ब्लॉक है आज तो मेगा ब्लॉक है...

  • इक कहानी लिखूं

    इक कहानी लिखूं

    सोचती हूँ इक कहानी लिखूं तेरी और मेरी जुबानी लिखूं लिखूं हाल ऐ दिल अपना या सपनों की रवानी लिखूं अरमानों की लिखूं ग़ज़ल, यां आँखों का बहता पानी लिखूं बनाऊ नए फ़साने फिर से, या...

  • अभिनय

    अभिनय

    कितना जानदार अभिनय ऐसा के कोई समझ न पाये सच है या है कोई नाटक पीड़ा छुपाकर मुस्कुराना स्याह आँखों में काजल सजाना नीले निशान चूड़ियों और साडी में छुपाना आभावों में भी सम्पूर्णता भूखे पेट...

  • रिश्ता

    रिश्ता

    कैसा रिश्ता है अपना… कुछ कच्चा, कुछ पक्का सा… पानी के बुलबुले पे तैर आकाश छूने की ख्वाहिश इरादे मजबूत इतने कि पहाड़ से भी टकरा जाए और नाजुक इतना कि ज़रा सी छुअन से भी...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    सदा मेरी कुछ असर दिखाती तो होगी याद मेरी तुम्हें भी कभी सताती तो होगी आँसू, आहें, दर्द गर पाया है इश्क़ में मैंने आँख तेरी भी मोती बिछाती तो होगी गुनगुनाये थे जो नग्मे कभी...

  • लघुकथा – मनहूस

    लघुकथा – मनहूस

    बताईये डाक्टर साहब संजय कैसै हैं? भराई हुई आवाज़ में नीता ने पूछा।“हमने अपनी कोशिश कर ली, आगे जो भगवान की मर्जी ” कह डाक्टर चला गया।नीता और संजय की शादी को कुछ दिन ही हुए...

  • चाहत

    चाहत

    क्यों होता है मेरे मन तू बेकल इक सपना बुन लेना फिर से तू कल मद्धिम पड़ जाए सूरज भी तुझसे बादल को अपना कर लेना आँचल चाहत की राहें मत समझो आसां करना सपनों को...