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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    प्यास दिल की वो बुझाने आए दो घड़ी पास बिठाने आए खुश थी मैं अपनी ही तन्हाई में अश्क क्यूं साथ निभाने आए जो सियासत करते लाशों की अश्क झूठे वो बहाने आए बंद आंखें जो...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    बिछड़ कर तुझसे यूं जीना भी क्या कोई ये जीना है तेरा दर ही मेरा मक्का तेरा दर ही मदीना है गमों का शौक है मुझको तभी तो दिल लगाया है कि आंसूं, आहें, तन्हाई भरा...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    सब कहते हैं तुम चले गए … पर मैं नहीं मानती… यह जाना भी कोई जाना है!! अब तक बसी है तुम्हारी खुशबू घर में जिनसे महकते हैं मेरे अल्फाज बिखरे हैं तुम्हारे शब्द जिनको दोहराती...

  • महफूज़

    महफूज़

    पता नहीं कितनी ही सदियों से … वर्ष दर वर्ष बंधती आ रही है राखियां बुजुर्गों ने बताया महत्व राखी बंधवाने वाला करता है हिफाज़त राखी बांधने वाले की हर इक लड़का राखी बंधवाता है और...

  • इंतज़ार

    इंतज़ार

    कभी यूँ भी हो तुम करो मेरा इंतज़ार जब भी तेज़ हवा का झोंका खोले खिड़की के पट तुम बरबस देखो उस ओर शायद मैं वहाँ तो नहीं… और मैं …. मैं बहती जाऊं हवाओं संग...

  • दुःखता है

    दुःखता है

    कुछ दुखता है ….. जब खोकर अपना अस्तित्व, मिटाकर अपना सम्पूर्ण वजूद भी नही मिलता मुझे मेरे अधिकार जब रखती हूं तुम्हारी छोटी-छोटी बातों का ख़्याल और परवाह नही होती तुम्हें मेरी छोटी सी आदत की...

  • हम फिर मिलेंगे

    हम फिर मिलेंगे

    हम फिर मिलेंगे कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में हम फिर मिलेंगे …. गर बनोगे तुम आकाश मैं धरती बन अंतिम छोर तक तुमसे मिलने की करती रहूंगी कोशिश झुकना होगा तुम्हें भी मुझे...

  • शब्द

    शब्द

    शब्द ही तो हैं हमारे मध्य शब्दों में ही है हमारा संसार धुन की लय में बहते हुए शब्द कह जाते हैं कानों में बहुत कुछ कभी प्रेम , कभी तकरार कभी इज़हार , कभी इनकार...

  • उम्मीदें

    उम्मीदें

    2212 2212 2212 बैसाखियों पर चलती उम्मीदें मेरी अब नफरतों पर पलती उम्मीदें मेरी न मिला शजर, न मिली कली कोई कभी बनकर परिंदा उड़ती उम्मीदें मेरी शब रो रही महताब के आगोश में तारों के...

  • सपना

    सपना

    क्यों होता है मेरे मनवा तू बेकल कोई सपना बुन लेना फिर तू इक कल मध्यम पड़ जाए ये सूरज भी तुझसे बादल को अपना तू कर लेना आँचल चाहत की राहें मत समझो तुम आसां...