Author :

  • वक्त

    वक्त

    वैसे तो वक्त ये हर पल चलायमान होता है सवारी पे ये अपनी आन बान शान होता है मगर नजाने क्यूं येएक ज़माने सेहै यूं ठहरा खड़ा है एक जगह पे जैसे के बेजान होता है...

  • खयालों के हुजूम

    खयालों के हुजूम

    रहते  हैं  खयालों के , हुजूम  आस पास। फिर भी ये जिंदगी है ,न जाने क्यूं उदास। ख़्वाहिश  के  परिंदे  हैं ,उड़  जाएं न कहीं, कुछ बंदिशेंहैं कायम ,कुछ फैसले हों खास। रौशन  न यूं करो...

  • आदमी

    आदमी

    डालो जिधर निगाह, है मजबूर आदमी। दर दर भटक रहा है, मजदूर आदमी। है बेबसी निगाह में, रोज़गार की लिए, अब तक बना हुआ है, गफूर आदमी। सड़कों पे बोझ ढोता है, दिन ढले तलक, फुटपॉथ...


  • फ़ानी दुनियां

    फ़ानी दुनियां

    फिर वही हम वही तनहाईयां है फिर वही आलम ए ख़ामोशियां हैं तीरगी फिर वही शब ए ग़म की गुमशुदा हो रही परछाईयां हैं सांसों के साथ चल रही छुपके आहों की चीखती सरगोशियां हैं कोई...



  • गीत

    गीत

    वीरों ने अपना लहू बहाया तब जाके ये सुबह आई आबो हवा स्वतंत्रता की तब हमने है पाई आजादी की कीमत कोई क्या जानेगा जिसने प्राण गंवाए वो ही पहचानेगा हंसते हंसते कितनों ने अपनी जान...

  • रंग-ए-बसंती

    रंग-ए-बसंती

    घुला मौसम-ए-रंग बसंती बसंती, उसपे हवाओं की ये शोख मस्ती, खुदा की कसम ये हसीं यूं न होती, अगर इसमें शामिल मोहब्बत न होती। रंगे रंग बसंती गुलों के ये चेहरे, ये शब़नम की बूंदों के...