गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका – उदित हुए वो

उदित हुए वो नभ मंडल पर जैसे  चांद  उदय  होता है शीतलता  तेजस्व  प्रखर जैसेदिनकर कुसुमय होता है लोग  पराए  देस  पराया अंजाने  से  मुलाकात  नई फिरभी अजनबी लगा अपना जैसे  मिला  हृदय  होता है कदमों की आहट पर अपना उसके  पीछे  चलते  जाना हरियाली चारों  ओर खिली जैसे नूतन किसलय होता है व्यवहार नया सत्कार नया नव निर्मीत वाक़् प्रवाह नया […]

गीतिका/ग़ज़ल

रातों की सीयाही में

रातों की सीयाही में अस्मत के लुटुरे हैं गुनाह में डूबे दिल, मन में भी अंधेरे हैं इंसानी जिस्म में ये छुपे हुये दानव है जुल्मत की दुनियां में ये बनाए बसेरे हैं बीमार मन के सारे हवस के ये गुलाम मरी हुयी इस रुह में कायरता के चेरे हैं कब तक हम यूंही ऐसे […]

गीतिका/ग़ज़ल

सबब

आईने  से नज़र  मिला के परखिए तो जरा। आंख  झुकती तो नहीं  है ये देखिए तो जरा। किसी के अश्कों के बहने का तू सबब तो नहीं झांक के दिल में घड़ी भर को सोचिए तो जरा। कहीं  करता  हो  कोई  इंतजार  हसरत  से गुफ़्तगु  की  लिये  उम्मीद  गौर  करिये जरा। देखिए  हो  न  रही  […]

गीतिका/ग़ज़ल

मौन का शोर

अंतश  में  गूंजने लगा है , मौन का ये शोर। होने  लगा  है  इसका , असर यूं चारो ओर। पलकों  को  झपकने,नहीं देता ये रातों को, आंखों में बस  गया है,बनके  घटा घनघोर। मीलों से हो गये दिन ,सदियों के जैसी रात, कभी दिनको तरसे नैना,कभी ढूंढते हैं भोर। सूनी  पड़ी  है  धरती , चुपचाप […]

गीतिका/ग़ज़ल

डूबी शाम

कह रही हमसे ये तनहाई मे डूबी शाम छलकने दे आंखों से अश्कों के भरे जाम बड़ी ग़मज़दा हयात है कोई तो साथ हो कुछ तो बयां करे वो कभी लेके मेंरा नाम वक्त गुज़िश्ता सही यादें तो साथ हैं चलती हैं साथ लेकिन रहती हैं गुमनाम आ जाओ के हद हो गई है इंतजार […]

गीतिका/ग़ज़ल

तुम नहीं आए

वक्त ने लम्हें सजाए, तुम नहीं आए। ढल गये रातों के साये, तुम नहीं आए। कदमों की आहटों पे, दिल हो रहा बेदार, धड़कन ने दीं सदाएं, तुम नहीं आए। कुछ ख़्वाहिशें अधूरी, पड़ी हैं तुम्हारे पास, रहे डूब हसरतों के साए, तुम नहीं आए। अनकहे जज़्बात का, जारी है सिलसिला, अल्फाज़ लड़खड़ाए, तुम नहीं […]

गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी

जिंदगी सवाल का जवाब ढूंढती है बड़ी शिद्यत से बेहिसाब ढूंढती है क्या है मक़सद यहां पे आने का हो गये गुम कहां अल्फाज़ ढूंढती है घूम के देख लिये दर बदर अंजुमन है सवाल अब भी लाज़वाब ढूंढती है कौन अपना है यहां कौन बेगाना है दौर-ए- गम में खड़े हिसाब ढूंढती है हो […]

गीतिका/ग़ज़ल

निछावर

महाकवि श्री गोपाल दास नीरज जी की स्मृति में । आंखों में अश्क दे के, कारवां गुज़र गया। दर्पन दिखा के सबके दिलों में उतर गया। पंछी नयन के जागते हैं, किसकी आस में, शबे-ग़म की तीरगी में, ढूंढता पहर गया। आया था अज़नबी सा, दुनियां की भीड़ में, जाते हुये कदमों के निशां, छोड़कर […]

गीतिका/ग़ज़ल

बरसता सावन

मौसम-ए-इश्क है, उसपे ये बरसता सावन। आभी जाओ के है, मिलने को तरसता सावन। छुप गया चाँद, घटाओं के शोख चिलमन में, साज़िशे’ कर के, बादलों से गरजता सावन। दिल की बेचैनियां, बढ़ा रही बिजली की तड़प, तेरी आहट की, धड़कनों पे, धड़कता सावन। राह तकती रहीं, बेचैन निगाहें कब से, तेरे दीदार की, हसरत […]

गीतिका/ग़ज़ल

वक्त

वैसे तो वक्त ये हर पल चलायमान होता है सवारी पे ये अपनी आन बान शान होता है मगर नजाने क्यूं येएक ज़माने सेहै यूं ठहरा खड़ा है एक जगह पे जैसे के बेजान होता है न आएंगे हमें मालूम है फिर भी न जाने क्यूं निगाहों में वही दीदार का अरमान होता है दिलों […]