गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

वंदना प्रमाणिका छंद 12 12 12 12 समांत: आर पदांत -दो सुलेखनी निखार दो सदैव मातु प्यार दो सुधर्म भी सुकर्म भी सुबुद्धि माँ प्रचार दो पढ़े चलूँ लिखे चलूँ कि उच्च माँ विचार दो सुकाव्य हो सुगीत माँ सुसाधना प्रसार दो गुमान हो नहीं कभी प्रवाह प्रेम धार दो नवीनता  लिखूं सदा सुछंद भाव […]

गीतिका/ग़ज़ल

“ग़ज़ल”

वक्त ने ही हमें सताया है। वक्त ने ही हमें  सम्हाला है। दास्ताँ और से कहें क्या क्या जिन्दगी में सबने रुलाया है। काफिला साथ है मेरे फिर भी; जिन्दगी का बसर ये’ तनहा है। फिक्र करता वही जमाने की कद्र जो वक्त की न करता है सब्र करते रहे हमेशा ही हाथ खाली हमको […]

गीत/नवगीत

गीत : बेटी की शिक्षा

कलम उठाई है जो तुमने बेटी का अधिकार लिखो शिक्षित हो बेटी हर घर में वीणा का अवतार लिखो लिख दो सारे अधिकार अभी बेटी का दामन भरना है तोड़ पुरानी जंजीरो को आज नया कुछ करना है वर्णों में हुंकार भरी हो आज वही अंगार लिखो शिक्षित हो बेटी हर घर में वीणा का […]