गीतिका/ग़ज़ल

ज़िन्दगी फिर मुस्कुराना चाहती है

दूर हर मुश्किल भगाना चाहती है ज़िन्दगी फिर  मुस्कुराना चाहती है दोस्ती होती सदा सच्ची वही जो जान यारों पर  लुटाना चाहती है कौन परिश्रम को पराजित कर सका है  हर बला दामन छुड़ाना चाहती है आसमानों से न पूछे दूरियां वो हौंसलों के पर लगाना चाहती है प्रीत मेरी है रुहानी ‘रागिनी’ सी गीत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दूर हर मुश्किल भगाना चाहती है ज़िन्दगी फिर  मुस्कुराना चाहती है दोस्ती होती सदा सच्ची वही जो जान यारों पर  लुटाना चाहती है कौन परिश्रम को पराजित कर सका है  हर बला दामन छुड़ाना चाहती है आसमानों से न पूछे दूरियां वो हौंसलों के पर लगाना चाहती है प्रीत मेरी है रुहानी ‘रागिनी’ सी गीत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – आँगन का गुल महका होगा

आँगन का गुल महका होगा मंज़र प्यारा कितना होगा मैं धारा,वो होगा दरिया बहक गया दिल कब का होगा हँसता होगा मन ही मन वह  लिखकर ख़त जब पढ़ता होगा दूर तलक जब जाते देखा अश्क आँख से छलका होगा गुलमोहर सुनता होगा सब राग दिलों का झरता होगा भीगे भीगे मौसम में वह यादों […]

गीत/नवगीत

कोराना

सहमी सी सुबह है,सूनी- सूनी शाम है । गतिमान समय में,कैसा ये विराम है ।। दरवाजे बंद ,नहीं खुलती हैं खिड़कियां । सन्नाटा बोलता है,चुप -चुप हैं तितलियाँ।। दौर कैसा आया,डरे -डरे शहर , ग्राम हैं! सहमी सी सुबह है,सूनी -सूनी शाम है ।। लगता था बहुत बड़ा अपना, विज्ञान है । संचित है कोष […]

कविता

महिला सशक्तिकरण

शक्ति को न ललकारो शीतल जल ही रहने दो । वात्सल्य अमृत की धारा ममता कल कल बहने दो ।। रूप अनेक है शक्ति के तुम शक्ति न अपनी दिखलाना । मात सदा खाई उसने है जॉन नारी को पहचाना।। जननी को अपमानित कर कभी न कोई जीत सका । भुजबल धनबल के बल पर […]

गीतिका/ग़ज़ल

बिन रोशनाई लिख दी

दिल को करार आया, अँखियाँ चमक सी आई जब  चाँदनी सी’ छिप कर वह देख मुस्कुराई । इसरार भी अनोखा, इज़हार, हाय सदके उसने अदा अनूठी, मुझको अजब दिखाई।  नयनों के’ तीर मारे, बतियाँ बनी जो मरहम मर जाऊँ’ के जिऊँ मैं, ये जाँ समझ न पाई।  दिल ने बहुत ये चाहा, नजदीक से मैं’ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हुआ असर उनसे रू ब रू का ये रंग  रोशन जो मू औ रू का भरी है नफ़रत दिलों मे हरसू नही हैं मतलब वहां वज़ू का खुले दरीचे भी तंगदिल हैं अजीब मंज़र ये कू ब कू का लगे ये आलम बड़ा ही प्यारा असर हुआ उन से गुफ़्तगू का तुम्हारे दिल मे हमारी […]

कविता

मोरनी सा मन

तुम मिले तो खिल गया है प्राण ये जीवन झूमता है नाचता है मोरनी सा मन आज मानस सर भरा है नेह का निर्झर आज कम्पित हो उठा है हिय पुलक से भर देह की वीणा बजी है प्रीत ये पावन मोरनी सा मन …..!! हो गया मधु प्रात है अब ढल गयी रातें भूल […]

कविता

हिन्दी से प्रीत लिखें

देवनागिरी लिपि हमारी, सुंदर सुरभित गीत लिखें । मातृभूमि शृंगार है हिन्दी, हम हिंदी में जीत लिखें ।। अलख जगादें देश में अपने,      सँस्कृति अपनी महान । आज करे शुरुआत नई ,       हिन्दी हस्ताक्षर अभियान ।। इतनी शक्ति देना दाता ,     बने सभी हम सच्चे नेक । ईश्वर […]

कविता

सुंदर पावन धरा भारती

भारत माँ की करो आरती । सुंदर पावन धरा भारती ।। प्राची में फैले जब कुंकुम । शीश नवाये दिनकर हरदम । सुबह यहां की बड़ी निराली, अँगना नवरस से बुहारती । सुंदर पावन धरा भारती  ।। खड़ा हिमालय,जीवट प्रहरी । नदियाँ जिनमें ,ममता गहरी । सुरसरिता सी पावन नदिया, भवउदधि से पार उतारती । […]