गीतिका/ग़ज़ल

बिन रोशनाई लिख दी

दिल को करार आया, अँखियाँ चमक सी आई जब  चाँदनी सी’ छिप कर वह देख मुस्कुराई । इसरार भी अनोखा, इज़हार, हाय सदके उसने अदा अनूठी, मुझको अजब दिखाई।  नयनों के’ तीर मारे, बतियाँ बनी जो मरहम मर जाऊँ’ के जिऊँ मैं, ये जाँ समझ न पाई।  दिल ने बहुत ये चाहा, नजदीक से मैं’ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हुआ असर उनसे रू ब रू का ये रंग  रोशन जो मू औ रू का भरी है नफ़रत दिलों मे हरसू नही हैं मतलब वहां वज़ू का खुले दरीचे भी तंगदिल हैं अजीब मंज़र ये कू ब कू का लगे ये आलम बड़ा ही प्यारा असर हुआ उन से गुफ़्तगू का तुम्हारे दिल मे हमारी […]

कविता

मोरनी सा मन

तुम मिले तो खिल गया है प्राण ये जीवन झूमता है नाचता है मोरनी सा मन आज मानस सर भरा है नेह का निर्झर आज कम्पित हो उठा है हिय पुलक से भर देह की वीणा बजी है प्रीत ये पावन मोरनी सा मन …..!! हो गया मधु प्रात है अब ढल गयी रातें भूल […]

कविता

हिन्दी से प्रीत लिखें

देवनागिरी लिपि हमारी, सुंदर सुरभित गीत लिखें । मातृभूमि शृंगार है हिन्दी, हम हिंदी में जीत लिखें ।। अलख जगादें देश में अपने,      सँस्कृति अपनी महान । आज करे शुरुआत नई ,       हिन्दी हस्ताक्षर अभियान ।। इतनी शक्ति देना दाता ,     बने सभी हम सच्चे नेक । ईश्वर […]

कविता

सुंदर पावन धरा भारती

भारत माँ की करो आरती । सुंदर पावन धरा भारती ।। प्राची में फैले जब कुंकुम । शीश नवाये दिनकर हरदम । सुबह यहां की बड़ी निराली, अँगना नवरस से बुहारती । सुंदर पावन धरा भारती  ।। खड़ा हिमालय,जीवट प्रहरी । नदियाँ जिनमें ,ममता गहरी । सुरसरिता सी पावन नदिया, भवउदधि से पार उतारती । […]

कविता

मुस्कराती सुबह

मुस्कुराती सुबह, खिलखिलाती दुपहरी, सुरभित शाम,! वक्त लिख जाता, जब तुम्हारा नाम !! व्यस्ततम क्षण भी बढ़ाते हैं , यादों के आयाम ! चितवनें प्रतिपल खोजतीं तुम्हें, लिखतीं हैं हवाओं पर पत्र, तुम्हारे नाम !! खुशियां दिल में गमकतीं हैं ‘ प्यार की सुगंध आती है आत्मा से, मुस्कानें बोलतीं हैं सतत , होठों पर […]

कविता

शंखनाद

नारी तुम, बन चंडी, उतर धरा पर.. करो स्वतन्त्रता का आगाज़ …! काटो बन्धन, लिए हौंसलें… भरो उड़ाने…. न रोक सके कोई परवाज़…!! कब तक ट्विंकल, कब तक आसिफा, कब तक बेटियाँ मारी जायेंगी ..! आने से भी डरें धरा पर सतत हैवानो के जो हाथ सताई जाएंगी मत मारो कोख में अब बेटी दरिंदों […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

लिपटता हुआ सा लगे गुल शजर से धनक सा लगे है, कसकता जिगर से मचलती उसाँसें यही कह रहीं हैं के गुज़रा है महबूब शायद इधर से महक आरही है मिरी धड़कनों से यही लग रहा है ,कि चूमा नज़र से गमकने लगी रातरानी तभी से दिखाई दिये वो गुज़रते इधर से शगूफे विगसने लगे […]

कविता

मन की कोकिल

जागती ही  रही ,रात मद से भरी मन की कोकिल, विरह राग गाती रही। तुम न थे, पर चकोरी भरी नेह से चाँद होने का बस भास पाती रही।। जो संजोये थे मन ने, मगन हो सपन । विरह की आग में,हो गये वो हवन। मालती ने पलक खोल, सिहरा  दिया, वो क्षितिज देख बुझता, […]

गीतिका/ग़ज़ल

महुआ नैन नशीले

सुनहले, रंगीले, सजीले ,छबीले ! मधुर भाव मनके , भावना से गीले ! सुधि सुगन्ध सुरभित हुई मन  गलियां । रंग सराबोर स्वप्न सहज ही परतीले। ले धड़कन गुलाल खड़ी  देहरी द्वार  शोख़ गुलाबी गाल  हुए फिर लजीले ।  है उमंग अंग -अंग मिल रहे रति अनंग मीत ,प्रीत गीत में  रंग भरे चटकीले । टेसू दहके देह ऋतुराज उतरे गेह कोयल कूक मादक स्वर […]