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  • क्यो छीना लाल मेरा

    क्यो छीना लाल मेरा

    नन्हें नन्हें कदमों ने दी चिता को आग है वो सिंदूरी कोपलों की आँखों में ढ़रकती सुहाग है वो तू सुन माओं की चीख अनुराग है वो जीना लानत है हराम तेरा तू देख कयामत तक...