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  • हमारी नर्मदा

    हमारी नर्मदा

    “सुनो मुझे तुमसे बात करनी है” “तुम ये सास बहू वाले सीरियल मुझे न सुनाया करो” शुभ ने सुधा की बात अनसुनी करते हुए कहा..! “आज मैं किसी की शिकायत नहीं करने नहीं, कुछ माँगने आई हूँ”...

  • बैचैन कलम

    बैचैन कलम

    कोई वीर रस मे डूबी कोई श्रृंगार रस में डूबी कलम है कोई भय के अधीन कोई कर रहा ऐलान है कोई बिअछोह कोई वियोग कोई किसी के दिल की तड़प को कर रहा बयां है...


  • उसका भी वजूद है ——

    उसका भी वजूद है ——

    एक स्त्री अच्छी माँ अच्छी बहन अच्छी बेटी भी है लेकिन अच्छी बहू नही , अच्छी पत्नि नही तो , तो आत्म-मंथन कीजिये कमी कहां है। एक स्त्री बचपन से जवानी तक कभी पिता के सम्मान...


  • सब गोलमाल है

    सब गोलमाल है

    “इस छोटे से शहर की इतनी आबादी नहीं है कि ओवर ब्रिज को इतना फैलाया जाये….और इतने घुमाव है इसमें की एक्सीडेंट भी हो सकते हैं” इंजीनियर ने अपना मत तो रख दिया लेकिन कौन मानने...


  • लघुकथा – बिछड़ा हुआ अधूरा इश्क

    लघुकथा – बिछड़ा हुआ अधूरा इश्क

    “क्यों ये रस्मों रिवाजों के बन्धन तोड़कर मेरे साथ नही आती… क्यों मेरा प्रेम मुकम्मल नहीं करती… मैं भी तो तुम्हारे लिये कान्हा बनकर तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूँ … तुम्हारे हिस्से का जहर पीने को तैयार हूँ...

  • मटके का श्राद्ध

    मटके का श्राद्ध

    ” बहू मटके को फोड दे …वो गांव से खबर आई है कि कुटुम्ब के चाचा ससुर शांत हो गये है” “पर मांजी अभी दो दिन ही तो हुऐ है इसे लाये ..कितना ठन्डा करता है...

  • रिश्तों की बुनियाद

    रिश्तों की बुनियाद

    “क्या बुराई है उस लडके में, बस तुम्हारे रूतबे के बराबर नही लेकिन अच्छे परिवार से है, . हमारी जाति का नही लेकिन बह भी सभ्य परिवार से है, थोडा ऊंचा नीचा चलता है और अपनी बेटी...