कविता

अबकी बार फिर आना

मैं कभी उसकी पायल की झनक, कभी चूड़ी की खनक लिखता रहा, कभी बिन्दिया कभी झुमकों में, उसके रूप को श्रृंगारता रहा ।। सोचा था मिलूंगा जब उससे, उसके सौलह श्रृंगार में से, चुरा लूँगा कोई एक निशानी, रख लूँगा सदा के लिये छुपाके।। आई थी जब वह मिलने गहनों की जगह काले धागे ने, […]

कविता

वो दो सखियाँ …

सबसे छुपते छुपाती आपस में बतियाती कभी घर की बुराई कभी खामियों को एक दूसरे को बताती तो कभी परिवार की अच्छाईयों को व्यक्त करती तराजू के पलडों में रिश्तों के अच्छे बुरे अनुभव को  तोलती वो दो सखियाँ … रिश्तों को सम्भालने की जद्दोजहद करती खो न जाये कुछ इस बात से डरती जीवन […]

कविता

ये औरतें भी न…

बडी आलसी होती है वह औरतें जो रसोई का हर पकवान चख चख कर बनाती हैं स्वाद से खिलाकर परिवार को चाव से जब नही बचता कुछ तो कुछ भी खाकर सो जाती हैं। बडी लापरवाह होती हैं वह औरतें जो घर का हर कोना कोना सलीके से सजा धूल मिट्टी की परत से बचाती […]

कविता

कहानी है औरत

संस्कृति सभ्यता सौन्दर्य की कहानी है औरत —- सूर्य की पहली किरण के साथ द्वार पर लक्ष्मी के स्वागत को उरेन डालने से लेकर रात के सुकून की कहानी है औरत ….. मंथरा कैकयी द्रोपदी तो कभी सीता राधा रुक्मणी सी हर किरदार मे ढलती अलग अलग रूपों की कहानी है औरत …. खाली रिक्त […]

लघुकथा

बात बस इतनी सी है ….कि प्रेम है

उसका गुस्सा उसके नशे से अधिक बलशाली हो गया था ,क्योकि उसे पता चल गया था कि उसकी पत्नी को किसी से प्रेम है । नशा करके बिना बजह पत्नी से मार पीट करना तो रोज का था लेकिन आज उसे बजह मिल गई । उसका पुरुषत्व ये कैसै स्वीकार कर सकता है । बिना […]

कविता

जिन्दगी में लौटकर आना

शुष्क होती जमीन पर बारिश बन  बरसना बेजान होती मुस्कराहटों पर इत्र सा महकना कुछ यूं हुआ है तेरा मेरी जिन्दगी में लौटकर आना ।। मुरझाये ख्वाबों की बगिया का खिलना पंछियों के शोर से ज्यों सुबह का होना कुछ यूँ हुआ है तेरा मेरी जिन्दगी मे लौटकर आना।। बिन घुंघरू  पैरों का थिरकना बेवजह […]

लघुकथा

भैया बांटन

एक सास ता उम्र उस छोटी बहू को ये कहकर डराती और समझाती रही कि भैया बांटन में बेईमानी न करना फलती नही है क्योकि उसका छोटा बेटा ही अन्य बेटों की तरह चालाक कपटी स्वार्थी नही था… आया जब बंटवारे का समय तब खिचडी की थाली उसकी तरफ से उठा दी गई… इस तरह […]

लघुकथा

लघुकथा – सभ्य समाज का सभ्य रैकेट

महिला मोर्चा संगठन  नाम तो बडा सशक्त और कवर पिक भी स्टेज पर सम्मान लेती महिलायें ..इस नाम से रिक्वेस्ट आती है रूचिका को  ..देखती है उसमें बहुत सी म्युचुअल फ्ररेन्ड एड थी वह फ्ररेन्ड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेती है । अगले दिन से इस महिला के अश्लील मैसैजस आने शुरू हो जाते है ,यहाँ […]

कविता

दिशाहीन भीड़

खौफनाक मंजर समेटे सरपट दौड़ती भागती वो भीड़… बस बर्बादी का निशाना लिये चारों तरफ हाहाकार मचाती वो भीड़ … जो भी आया सामने सब खत्म करती वो भीड़ … मानवता की दुश्मन क्या बच्चे क्या बूढे सबको रोंदती वो भीड़…. कभी वाहन  कभी जिन्दा इन्सान बेदर्दी से जलाती वो भीड़… नवसृजन करती माँ के […]

लघुकथा

लघुकथा : हद है

“आखिर जरूरत क्या है रिश्तेदारों को रेप्लाई करने की ” “लेकिन मैं तो बस उन्हीं बातों का जबाब देती हूँ जो वह पूछते है अगर न दूं तो कहेंगे कि मैं घमंडी हूँ …इसमें बुरा क्या है …घर पर आने पर भी तो हम सब बात करते है न” “लेकिन अपनी तरफ से मैसैज करने […]