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  • वो दो सखियाँ …

    वो दो सखियाँ …

    सबसे छुपते छुपाती आपस में बतियाती कभी घर की बुराई कभी खामियों को एक दूसरे को बताती तो कभी परिवार की अच्छाईयों को व्यक्त करती तराजू के पलडों में रिश्तों के अच्छे बुरे अनुभव को  तोलती...

  • ये औरतें भी न…

    ये औरतें भी न…

    बडी आलसी होती है वह औरतें जो रसोई का हर पकवान चख चख कर बनाती हैं स्वाद से खिलाकर परिवार को चाव से जब नही बचता कुछ तो कुछ भी खाकर सो जाती हैं। बडी लापरवाह...

  • कहानी है औरत

    कहानी है औरत

    संस्कृति सभ्यता सौन्दर्य की कहानी है औरत —- सूर्य की पहली किरण के साथ द्वार पर लक्ष्मी के स्वागत को उरेन डालने से लेकर रात के सुकून की कहानी है औरत ….. मंथरा कैकयी द्रोपदी तो...


  • जिन्दगी में लौटकर आना

    जिन्दगी में लौटकर आना

    शुष्क होती जमीन पर बारिश बन  बरसना बेजान होती मुस्कराहटों पर इत्र सा महकना कुछ यूं हुआ है तेरा मेरी जिन्दगी में लौटकर आना ।। मुरझाये ख्वाबों की बगिया का खिलना पंछियों के शोर से ज्यों...

  • भैया बांटन

    भैया बांटन

    एक सास ता उम्र उस छोटी बहू को ये कहकर डराती और समझाती रही कि भैया बांटन में बेईमानी न करना फलती नही है क्योकि उसका छोटा बेटा ही अन्य बेटों की तरह चालाक कपटी स्वार्थी...


  • दिशाहीन भीड़

    दिशाहीन भीड़

    खौफनाक मंजर समेटे सरपट दौड़ती भागती वो भीड़… बस बर्बादी का निशाना लिये चारों तरफ हाहाकार मचाती वो भीड़ … जो भी आया सामने सब खत्म करती वो भीड़ … मानवता की दुश्मन क्या बच्चे क्या...

  • लघुकथा : हद है

    लघुकथा : हद है

    “आखिर जरूरत क्या है रिश्तेदारों को रेप्लाई करने की ” “लेकिन मैं तो बस उन्हीं बातों का जबाब देती हूँ जो वह पूछते है अगर न दूं तो कहेंगे कि मैं घमंडी हूँ …इसमें बुरा क्या...

  • हमारी नर्मदा

    हमारी नर्मदा

    “सुनो मुझे तुमसे बात करनी है” “तुम ये सास बहू वाले सीरियल मुझे न सुनाया करो” शुभ ने सुधा की बात अनसुनी करते हुए कहा..! “आज मैं किसी की शिकायत नहीं करने नहीं, कुछ माँगने आई हूँ”...