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  • जिन्दगी अजीब है

    जिन्दगी अजीब है

    ये जिन्दगी बड़ी अजीब है कि हर आदमी जो मेरे करीब है कि संग जिसके कुछ पल कुछ साल गुजारे थे मैंने; जिनमें से कइयों ने तो अँगुली पकड़कर चलना भी सिखाया था, दूर बहुत दूर...

  • वो जगह

    वो जगह

    ढूँढ रहा हूँ जाने कब से धुँध में प्रकाश में कि सिरा कोई थाम लूँ जो लेकर मुझे उस ओर चले जाकर जिधर संशय सारे मिट जाते हैं और उत्तर हर सवाल का सांसों में बस...


  • नज़र से नज़र की बात

    नज़र से नज़र की बात

    नज़र ने तेरे नज़र से मेरे नज़र की बात की थी पल दो पल की नहीं सदियों से लम्बी बड़ी……… मुलाकात की थी। बंदिशें…… थीं जो दरम्याँ कुछ नज़रों में ही टूट गईं पर इतेफ़ाक़ ये...

  • दुनिया का दिखावा

    दुनिया का दिखावा

    तुम्हारी दुनिया का दिखावा कुछ और है मेरी दुनिया के उसूल कुछ और फ़र्क बस इतना है कि तुम तुम नहीं होते और मैं होता हूँ कोई और। © राजीव उपाध्याय परिचय - राजीव उपाध्यायनाम: राजीव...

  • आज जो ये आज है

    आज जो ये आज है

    आज, जो ये आज है कल नहीं रह जाएगा। बारिश के बादलों सा कुछ बरसेगा कुछ रह जाएगा॥हर बात हर हस्ती हर बस्ती ख़ाक में मिल जाएगी।  फितरत आदमी की कहाँ-कहाँ ले जाएगी। भाषा, परिभाषा  और...


  • बुद्धिजीवी का विमर्श

    बुद्धिजीवी का विमर्श

    लोगों को (मुख्य रूप से बुद्धिजीवियों को) ये कहते हुए अक्सर सुनता हूँ कि वक्त बहुत खराब हो गया है। विमर्श के लिए कोई जगह शेष नहीं बची है। संक्रमण काल है। गुजरे जमाने को तो...