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  • दोहे

    दोहे

    1.सप्ताह का दिन रविवार,काम होते है हज़ार। घर परिवार में गुज़ार, खुशियां मिले अपार।। 2.मौज सभी मिलकर करो,आया फिर रविवार। अपनो से बातें करो,खुशी गम की हज़ार।। 3.नारे झूठे लगा रहे,राजनीति में आज। वादे जनता से...

  • कविता

    कविता

    देहरी के दीप बन रात दिन जलते रहो तमस मिटाकर तुम रोशनी करते रहो राह के कांटे चुन तुम फूल बिछाते रहो सत्य पथ चुनो और उस पर चलते रहो जीवन मे सदा ही उच्च विचार...

  • कविता

    कविता

    शहर की फ़िज़ां विषैली हवा चली मेरे शहर में। दम तोड़ रही पीढ़ी मेरे शहर में।। कारखानो की चिमनियाँ देखिये। जहर उगलने लगी मेरे शहर में।। कटने लगे हैं सभी शजर शहर में। सिर्फ धुँआ ही...

  • छन्द मुक्त रचना

    छन्द मुक्त रचना

    1. मर रहे है भूमिपुत्र,कुछ तो ख्याल करे। दे इन्हें मुक्त बीज,व्यर्थ न सवाल करे।। नहरें नही है जहाँ,वहां भी संभाल करें। खून पसीना बहाते जो,यूँही धमाल करे।। 2. वर्णमाला सीखने की उम्र में,कचरे में हीरे...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    तुम्हारे प्यार के खातिर हमने दुनियाँ को छोड़ा। किसी की बात न समझे किसी से मुँह नहीं मोड़ा।। फ़क़त तुमसे शिकायत थी तुम्हारा सर नहीं फोड़ा। मुहब्बत में तुम्हारे साथ  ये दिल मैंने ही जोड़ा।। वादे...

  • गीतिका : देश सेवक

    गीतिका : देश सेवक

    सच्चे देश सेवकों की अब कमी लगती है। सुभाष भगत आज़ाद की अब कमी लगती है।। चहुँ ओर हिंसा ने पैर जमा लिए हैं देखो। आज के दौर में देशभक्तों की कमी लगती है।। उठा भुजा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    खुदा से ख़ौफ़ नहीं कर रहा है आदमी। एक दूजे का दुश्मन बन रहा आदमी।। खैरियत पूछता कौन है अब किसी की यहाँ। मतलबपरस्ती में जी रहा है आदमी।। रंग नित नए बदलता अपने जीवन मे...