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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    लोगों में अपनेपन का अब भाव नहीं रहा। परिवार टूटने का यही कारण खास रहा।। मिलते नहीं बिना मतलब के यहाँ कोई। हर कोई रुपये पैसे का यहाँ दास रहा।। भाव नहीं तो मिठास कहाँ दिखेगी...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    खूब लूटा सियासत ने आदमी को। राज पाट लूटा सारा और जान भी।। कितने ही सुरा सुंदरी में हुए बर्बाद। कितनों ने छुप कर लूटी आन भी।। घमंड में चूर – चूर हुए ख्वाब सारे ।...

  • लघु कथा

    लघु कथा

    लघुकथा मेहनत की रोटी आज विद्यालय में सभी विद्यार्थी अपने अपने घर से स्वादिष्ट भोजन लेकर आए। गुरुजी ने सबका भोजन देखा और बोले आज तो सब मजेदार डिश लाये हैं। कोई मिठाई कोई पुड़ी कोई...


  • समाचार

    समाचार

    पुरोहित राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2017 से सम्मानित ************************* राजस्थान के झालावाड़ जिले के ख्यातिनाम कवि, साहित्यकार राजेश कुमार शर्मा पुरोहित को राजकुमार जैन राजन फाउंडेशन एवम साहित्य समीर दस्तक मासिक भोपाल द्वारा आयोजित 12-13 वां राष्ट्रीय...

  • लेख

    लेख

    भारत में शिक्षा पद्धति कैसी हो ? ************************* – राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” अर्वाचीन काल मे भारत की शिक्षा मैकाले की शिक्षा पद्धति पर ही चल रही है। आज की शिक्षा मात्र नोकरी पाने हेतु क्लर्क तैयार...

  • दोहे

    दोहे

    1.सप्ताह का दिन रविवार,काम होते है हज़ार। घर परिवार में गुज़ार, खुशियां मिले अपार।। 2.मौज सभी मिलकर करो,आया फिर रविवार। अपनो से बातें करो,खुशी गम की हज़ार।। 3.नारे झूठे लगा रहे,राजनीति में आज। वादे जनता से...

  • गीतिका

    गीतिका

    देहरी के दीप बन रात दिन जलते रहो तमस मिटाकर तुम रोशनी करते रहो राह के कांटे चुन तुम फूल बिछाते रहो सत्य पथ चुनो और उस पर चलते रहो जीवन मे सदा ही उच्च विचार...

  • गीतिका : शहर की फ़िज़ां

    गीतिका : शहर की फ़िज़ां

    विषैली हवा चली मेरे शहर में। दम तोड़ रही पीढ़ी मेरे शहर में।। कारखानो की चिमनियाँ देखिये। जहर उगलने लगी मेरे शहर में।। कटने लगे हैं सभी शजर शहर में। सिर्फ धुँआ ही बचा मेरे शहर...

  • छन्द मुक्त रचना

    छन्द मुक्त रचना

    1. मर रहे है भूमिपुत्र,कुछ तो ख्याल करे। दे इन्हें मुक्त बीज,व्यर्थ न सवाल करे।। नहरें नही है जहाँ,वहां भी संभाल करें। खून पसीना बहाते जो,यूँही धमाल करे।। 2. वर्णमाला सीखने की उम्र में,कचरे में हीरे...