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  • भगवान परशुराम की वन्दना

    भगवान परशुराम की वन्दना

    ॐ जय ऋषिवर परशुराम,जय ऋषिवर परशुराम। विप्र जाति के रक्षक,सबके लीला धाम।।ॐ जय…. जमदाग्नि नन्दन हो,जग के पालनहार। रेणुका से जन्में,किया शत्रु संहार।।ॐ जय….. महादेव की भक्ति में,सब अर्पण किया। बदले में शिवजी ने,परशु भेंट किया।।ॐ...


  • ढाई आखर प्रेम के

    ढाई आखर प्रेम के

    ढाई अक्षर का शब्द होता प्रेम। कितना पवित्र शब्द होता प्रेम।। समर्पण की परिभाषा बनता। सागर से भी गहरा होता प्रेम।। राधा की तरह मीरां की तरह। असीम व  अनित्य होता प्रेम।। प्रेम से मधुरता आती...


  • नारी का सम्मान करो

    नारी का सम्मान करो

    सुरक्षित हो अब तो नारी इसका पुख्ता काम करो जो भी करे कुकृत्य इनसे तुरन्त सजा उनको करो मुक्त विचरण करे नारी बेख़ौफ़ घूमे फिरे नारी उसके अधिकारों की आओ फिर बात करो हर क्षेत्र में...

  • मन को मन्दिर बना लो

    मन को मन्दिर बना लो

    राम मन्दिर मन को बना लो सब फसाद मिट जाएंगे काम क्रोध मद लोभ ये विकार छोड़ दो मन मन्दिर बन जायेगा आदमी से आदमी जुड़ेगा प्रीत के धागों से बंध जाएगा न जाति न धर्म...

  • दोहे- अपना देश महान है

    दोहे- अपना देश महान है

    अपना देश महान है,कहते सारे लोग। दुख सुख में साथी सभी, करते सारे भोग।। किसान मेरे देश के, करते हाहाकार। खाद बीज मिलते नहीं, खेत हुये बेकार।। गौरव गाथा कह रहा, अपना ये इतिहास। देश हमारा...

  • कदम बढ़ाता चल

    कदम बढ़ाता चल

    गरल सुधा बन जाता है जब मीरा सी हो भक्ति। अभय हो जाता नर जब हो निष्काम कर्म शक्ति।। अगणित मदन हो न्योछावर शिव चरणों मे तब। मिलती देवों को उनके चरणों मे सच मे अनुरक्ति।।...


  • कविता – मन कैसे हो धवल

    कविता – मन कैसे हो धवल

    हज़ार  वादे झूँठ है एक सच के सामने। जैसे इंसान खड़ा हो आईने के सामने।। बेमतलब के झगड़े होते आमने सामने। रोज विश्वासघाती दिखे  आमने सामने।। शकुनि सी चाल खेलते है लोग सामने। हाथ मलते रहते...