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  • कविता – मन कैसे हो धवल

    कविता – मन कैसे हो धवल

    हज़ार  वादे झूँठ है एक सच के सामने। जैसे इंसान खड़ा हो आईने के सामने।। बेमतलब के झगड़े होते आमने सामने। रोज विश्वासघाती दिखे  आमने सामने।। शकुनि सी चाल खेलते है लोग सामने। हाथ मलते रहते...

  • गीतिका- अजीब रिवाज

    गीतिका- अजीब रिवाज

    दर्पण भी यूँ झूँठ बोलने लगा। नकली को भी सच बताने लगा।। चेहरा आया सामने जो उसके। देख कर उससे बतियाने लगा।। कितने रूप बनाओगे इंसान। वह दिन और रात गिनाने लगा।। झूँठ फरेब और धोखा...

  • स्वच्छता के दीप जले

    स्वच्छता के दीप जले

    दीप जले सदभाव के  ऐसी ये दीवाली हो। घर घर रोशन हो सारे  ऐसी ये दीवाली हो।। शिक्षा के आलोक में  देश के ननिहाल पले। मिटे अज्ञान अंतर्मन से  ऐसी ये दीवाली हो।। स्वच्छता के दीप...




  • कविता – जन्नत से प्यारा

    कविता – जन्नत से प्यारा

    हिमगिरि का ताज सजाये जो। सबकी पहचान बताये जो।। स्वर्ण सी चमक दिखाये जो। कितना प्यारा लगता है जो।। ऋषि मुनियों की खान है जो। सबके दिलों की जान है जो।। हम सबका स्वाभिमान है जो।...

  • कमर तोड़ मँहगाई

    कमर तोड़ मँहगाई

    पेट्रोल डीजल कितने हुए महँगे। ये तो कमर तोड़ महंगाई है भाई।। सब्जी मंडी में है महंगी सब्जियाँ। थाली से दाल भी गायब है भाई।। कतारों में लगी आम जनता देखो। मँहगाई से त्रस्त गरीब यहाँ...

  • कविता – आज़ाद हिंदुस्तान

    कविता – आज़ाद हिंदुस्तान

    हम स्वाधीनता दिवस की खुशियाँ मनाने निकले हैं। तिरंगे के खातिर हम अपनी जान लुटाने निकले हैं।। सरहद पर सैनिक हमारे रोज रोज ही शहीद होते हैं। हम भारत माँ की रक्षा में हथियार लेकर  निकले...

  • सैनिक

    सैनिक

    सीमा पर प्रहरी बनकर। भारत माँ की रक्षा करते।। शीत ताप वर्षा भी सहते। मातृभूमि का मान बढ़ाते।। वर्दी में तैनात सदा रहकर। माँ भारती की लाज बचाते।। तिरंगा मन में ये बसाकर। सीना ताने आगे...