सामाजिक

स्वच्छ भारत अभियान में हमारा दायित्व क्या है?

एक स्वस्थ व सुन्दर राष्ट्र को बनाने के लिए स्वच्छता बहुत जरूरी है। स्वच्छ भारत के लिए 1 अप्रेल 1999 से भारत सरकार द्वारा व्यापक ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम का पुनर्गठन किया गया था साथ ही पूर्ण स्वच्छता अभियान का शुभारम्भ किया गया। जिसे बाद में 1 अप्रेल 2012 को निर्मल भारत अभियान नाम दिया।स्वच्छ भारत […]

कविता

ढाई आखर प्रेम के

ढाई अक्षर का शब्द होता प्रेम। कितना पवित्र शब्द होता प्रेम।। समर्पण की परिभाषा बनता। सागर से भी गहरा होता प्रेम।। राधा की तरह मीरां की तरह। असीम व  अनित्य होता प्रेम।। प्रेम से मधुरता आती है देखो। किसी एक से ही होता है प्रेम।। प्रेम से आत्मा परमात्मा होती।  परमेश्वर से मिलन होता प्रेम।। […]

सामाजिक

परीक्षाओं में सफल होने के आसान तरीके

बोर्ड परीक्षा आते ही अतुल की तबियत खराब हो जाती है। उसका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। कभी कभी तेज तेज घबराहट होती है। इतना बड़ा सेलेबस मैं कैसे पढ़ूँगा। परीक्षा तो कल ही तो है। साल भर दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने में गुजर गया। काश मम्मी पापा भैया भाभी की सुनी होती। थोड़ा […]

कविता

नारी का सम्मान करो

सुरक्षित हो अब तो नारी इसका पुख्ता काम करो जो भी करे कुकृत्य इनसे तुरन्त सजा उनको करो मुक्त विचरण करे नारी बेख़ौफ़ घूमे फिरे नारी उसके अधिकारों की आओ फिर बात करो हर क्षेत्र में अवसर दो आगे बढ़ती जाए नारी राजनीति खेलकूद में अव्वल है देश की नारी जमीं से फलक तक भी […]

कविता

मन को मन्दिर बना लो

राम मन्दिर मन को बना लो सब फसाद मिट जाएंगे काम क्रोध मद लोभ ये विकार छोड़ दो मन मन्दिर बन जायेगा आदमी से आदमी जुड़ेगा प्रीत के धागों से बंध जाएगा न जाति न धर्म के झगड़े न मजहबी फसाद होगा अमन से रहेंगे वतन में सभी भाईचारे की देश मिसाल होगा मन्दिर की […]

मुक्तक/दोहा

दोहे- अपना देश महान है

अपना देश महान है,कहते सारे लोग। दुख सुख में साथी सभी, करते सारे भोग।। किसान मेरे देश के, करते हाहाकार। खाद बीज मिलते नहीं, खेत हुये बेकार।। गौरव गाथा कह रहा, अपना ये इतिहास। देश हमारा कह रहा, कैसे हुआ विकास।। जन जन अब गाने लगा, वन्दे मातरम गान। मेरे भारत देश की,महिमा बडी महान।। […]

कविता

कदम बढ़ाता चल

गरल सुधा बन जाता है जब मीरा सी हो भक्ति। अभय हो जाता नर जब हो निष्काम कर्म शक्ति।। अगणित मदन हो न्योछावर शिव चरणों मे तब। मिलती देवों को उनके चरणों मे सच मे अनुरक्ति।। स्मृति आ जाती जग में जब मिट जाती आसक्ति। अन्तर्मन प्रफुल्लित होता जग उठती भावभक्ति।। उत्तम से उत्तम ऋषि […]

सामाजिक

भौतिक समृद्धि का परिचायक रूप है सभ्यता

सभ्यता समाज के सकारात्मक प्रगतिशील और समावेशी विकास को इंगित करने के लिए किया जाता है। सभ्यता के अंतर्गत उन्नत कृषि लम्बी दूरी का व्यापार नगरीकरण आदि की उन्नत स्थिति दर्शाता है।सभ्यता कुछ माध्यमिक तत्वों यथा विकसित यातायात व्यवस्था लेखन मापन के मानक विधि व्यवस्था कला की प्रसिद्ध शैलियां स्मारकों के स्थापत्य गणित उन्नत धातु […]

कविता

कविता – मन कैसे हो धवल

हज़ार  वादे झूँठ है एक सच के सामने। जैसे इंसान खड़ा हो आईने के सामने।। बेमतलब के झगड़े होते आमने सामने। रोज विश्वासघाती दिखे  आमने सामने।। शकुनि सी चाल खेलते है लोग सामने। हाथ मलते रहते दुर्योधन से लोग सामने।। ध्रतराष्ट्र सा मन विकारों से ढंका सामने।  मन कैसे हो धवल दुशासनों के सामने।। रोज […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका- अजीब रिवाज

दर्पण भी यूँ झूँठ बोलने लगा। नकली को भी सच बताने लगा।। चेहरा आया सामने जो उसके। देख कर उससे बतियाने लगा।। कितने रूप बनाओगे इंसान। वह दिन और रात गिनाने लगा।। झूँठ फरेब और धोखा सब कहे। वह शब्दकोश सारा चुराने लगा।। दुनिया का ये अजीब  रिवाज है । हर कोई किसी को  सताने […]