गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खूब लूटा सियासत ने आदमी को। राज पाट लूटा सारा और जान भी।। कितने ही सुरा सुंदरी में हुए बर्बाद। कितनों ने छुप कर लूटी आन भी।। घमंड में चूर – चूर हुए ख्वाब सारे । और आदमी की ये झूंठी शान भी।। मिट गई सारी हस्ती इस जहां से। और न रही अब कोई […]

लघुकथा

लघु कथा – मेहनत की रोटी

आज विद्यालय में सभी विद्यार्थी अपने अपने घर से स्वादिष्ट भोजन लेकर आए। गुरुजी ने सबका भोजन देखा और बोले आज तो सब मजेदार डिश लाये हैं। कोई मिठाई कोई पुड़ी कोई रसगुल्ले, कोई नमकीन, कोई हलवा । अरे वाह बच्चों आराम से भोजन का आनंद लो। गुरुजी ने अपनी बात समाप्त की थी ही […]

भाषा-साहित्य

हिंदी साहित्य के विलक्षण कवि – “रघुवीर सहाय”

दूसरा सप्तक के कवियों में प्रमुख नाम रघुवीर सहाय का आता है। हिंदी के विलक्षण कवि, लेखक, पत्रकार, संपादक, अनुवादक, कथाकार, आलोचक। रघुवीर सहाय का जन्म 9 दिसंबर1929 को लखनऊ उत्तर प्रदेश में हुआ था। इन्होंने 1951 में अंगेजी साहित्य में स्नातकोत्तर किया। 1946 से साहित्य सृजन करना प्रारंभ किया। इनका विवाह 1955 में विमलेश्वरी […]

समाचार

समाचार

पुरोहित राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2017 से सम्मानित ************************* राजस्थान के झालावाड़ जिले के ख्यातिनाम कवि, साहित्यकार राजेश कुमार शर्मा पुरोहित को राजकुमार जैन राजन फाउंडेशन एवम साहित्य समीर दस्तक मासिक भोपाल द्वारा आयोजित 12-13 वां राष्ट्रीय साहित्यकार सम्मान समारोह चित्तौड़गढ़ में राष्ट्रीय गौरव सम्मान 2017 से अलंकृत किया गया। पुरोहित को यह सम्मान डॉक्टर विमला […]

लेख

लेख

भारत में शिक्षा पद्धति कैसी हो ? ************************* – राजेश कुमार शर्मा”पुरोहित” अर्वाचीन काल मे भारत की शिक्षा मैकाले की शिक्षा पद्धति पर ही चल रही है। आज की शिक्षा मात्र नोकरी पाने हेतु क्लर्क तैयार कर सकती है। नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा का अभाव है। डिग्रियों का बोझ लिए आज के युवक युवतियां बेरोजगारी […]

मुक्तक/दोहा

दोहे

1.सप्ताह का दिन रविवार,काम होते है हज़ार। घर परिवार में गुज़ार, खुशियां मिले अपार।। 2.मौज सभी मिलकर करो,आया फिर रविवार। अपनो से बातें करो,खुशी गम की हज़ार।। 3.नारे झूठे लगा रहे,राजनीति में आज। वादे जनता से किये,नेता जी ने आज।। 4.धर्म जात में बंट गया,देखो अब इंसान। आरक्षण की आग में, जल रहा हिंदुस्थान।। 5.राजनीति […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

देहरी के दीप बन रात दिन जलते रहो तमस मिटाकर तुम रोशनी करते रहो राह के कांटे चुन तुम फूल बिछाते रहो सत्य पथ चुनो और उस पर चलते रहो जीवन मे सदा ही उच्च विचार रखते रहो निष्काम कर्म से जीवन उन्नत करते रहो तूफान झंझावतों में लक्ष्य पर खड़े रहो अर्जुन से लक्ष्य […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका : शहर की फ़िज़ां

विषैली हवा चली मेरे शहर में। दम तोड़ रही पीढ़ी मेरे शहर में।। कारखानो की चिमनियाँ देखिये। जहर उगलने लगी मेरे शहर में।। कटने लगे हैं सभी शजर शहर में। सिर्फ धुँआ ही बचा मेरे शहर में।। बस्तियाँ बीमार है मेरे शहर में। गंदगी फिर पनपी मेरे शहर में।। दवा और दुआ ही शेष रही […]

पद्य साहित्य

छन्द मुक्त रचना

1. मर रहे है भूमिपुत्र,कुछ तो ख्याल करे। दे इन्हें मुक्त बीज,व्यर्थ न सवाल करे।। नहरें नही है जहाँ,वहां भी संभाल करें। खून पसीना बहाते जो,यूँही धमाल करे।। 2. वर्णमाला सीखने की उम्र में,कचरे में हीरे खोज रहे है। ये हिन्द की ही संतान है,पापी पेट के लिए सोच रहे है।। 3. वेश पर ध्यान […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तुम्हारे प्यार के खातिर हमने दुनियाँ को छोड़ा। किसी की बात न समझे किसी से मुँह नहीं मोड़ा।। फ़क़त तुमसे शिकायत थी तुम्हारा सर नहीं फोड़ा। मुहब्बत में तुम्हारे साथ  ये दिल मैंने ही जोड़ा।। वादे कितने ही करते मगर वादा नहीं तोड़ा। जिधर भी तुम चले जाते उधर भी साथ न छोड़ा।। कभी भी […]