गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका : देश सेवक

सच्चे देश सेवकों की अब कमी लगती है। सुभाष भगत आज़ाद की अब कमी लगती है।। चहुँ ओर हिंसा ने पैर जमा लिए हैं देखो। आज के दौर में देशभक्तों की कमी लगती है।। उठा भुजा जो चले रण में शत्रु सारे उखाड़ दे। ऐसे महावीर की आज कमी लगती है।। स्वार्थपरता की आंधी उड़ाती […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

खुदा से ख़ौफ़ नहीं कर रहा है आदमी। एक दूजे का दुश्मन बन रहा आदमी।। खैरियत पूछता कौन है अब किसी की यहाँ। मतलबपरस्ती में जी रहा है आदमी।। रंग नित नए बदलता अपने जीवन मे आदमी। गिरगिट भी हैरान हो देख रहा आदमी।। मर्यादा त्याग कर हँस रहा है आदमी। रिश्तों का अपनापन खो […]