Author :

  • “संभलते कैसे”

    “संभलते कैसे”

    अदाओं से तेरी संभलते तो संभलते कैसे निगाहों से तेरी बचके निकलते तो निकलते कैसे, चांद गायब था शब भर तुम भी न आए छत पर फलक पर सितारे चमकते तो चमकते कैसे, डालियों को सीखना...

  • “तुम याद आए”

    “तुम याद आए”

    हुई बरसात तो तुम याद आए उमड़े जज्बात तो तुम याद आए, हिचकियां हिचकियों पर आती रही किसने किया याद तो तुम याद आए, रात महफिल थी सब नशे में थे छिड़ी जब बात तो तुम...

  • करीब आ जाओ

    करीब आ जाओ

    गर जानना है मुझको करीब आ जाओ पहचानना है मुझको करीब आ जाओ, दुआ सलाम से फितरत नहीं जानी जाती दिल्लगी है तो फिर हाल ए दिल सुना जाओ, किनारे बैठ कर दरिया की गहराई नहीं...

  • “अपने जैसे लगते हो”

    “अपने जैसे लगते हो”

    कितने वर्षों बाद मिले हो, पर अपने जैसे लगते हो, आंख का पानी सूख गया है, तुम भी कितना गम सहते हो, एक दिन जीवन होगा अपना, बोलो तुम भी क्या कहते हो, एक सपना मैंने...

  • “कुछ पता नहीं”

    “कुछ पता नहीं”

    इंसान तो दिखते हैं इंसानियत का कुछ पता नहीं मासूम तो लगते हैं मासूमियत का कुछ पता नहीं समाज सेवक उग आये हैं गलियों और मोहल्लों में दिल के अंदर क्या है इनके नीयत का कुछ...

  • दर्द  मिलता है दिल लगाने से

    दर्द मिलता है दिल लगाने से

    तुम जो आये नहीं जमाने से हम मुस्कराये नहीं जमाने से कितने सावन यूं ही बीते दर्द मिलता है दिल लगाने से रुठना भी तुम्हारा वक़्ती था मान जाओगे तुम मनाने से सितारे रात भर जागते...

  • “बहारों की बात करते हैं”

    “बहारों की बात करते हैं”

    फलक पर चांद सितारों की बात करते हैं बाग में आए बहारों की बात करते हैं, रात के स्याह अंधेरों की बात क्या करना सुबह सूरज के नजारों की बात करते हैं, वो लहरे जो हमारे...

  • “अपने मन की”

    “अपने मन की”

    शुरू करो कुछ अपने मन की कब तक करोगे सबके मन की, लोगों को खुश करना छोड़ो कब तक सुनोगे बेसर पर की, अपनी खिचड़ी पका रहे सब कब तक भरोगे मटकी जल की, उठो लड़ो...

  • ग़ज़ल – हंसता और हंसाता क्या

    ग़ज़ल – हंसता और हंसाता क्या

    मेरी जिंदगी में आकर बस यूं ही चले जाओगे पता जो होता मुझको तो दिल को लगाता क्या सारी रात तेरी बातें सारी रात तेरे चर्चे महफिल में तेरे किस्से लोगों को सुनाता क्या सरे राह...

  • मोहब्बत की बातें

    मोहब्बत की बातें

    अब वो प्यार मोहब्बत की बातें सुनने में कम ही है आते, सीरी फरहाद के किरदार कहानियों से बाहर नहीं आते, खूने दिल से खत लिखते थे आंखों से करते थे तब बातें, इंतजार करते थे...