कविता

बदनाम कोरोना को करो ना…..

वक्त कितना भी बुरा हो, गुजर जाना ही होता है। हर जख्म की फितरत में, भर जाना ही होता है। बादल कई फटते हुये, देखे हैं दुनियाँ में – थोड़ी सी खुदाई फिसली, फिर संभल जाना ही होता है।। वक्त कितना भी बुरा हो……….. अदना बन गये वो, खुद को खुदा समझने वाले हर मुसीबत […]

गीतिका/ग़ज़ल

एैसी नींद बताओ कोई…….

रात की बेहोशी का तुम, नींद जैसा नाम न दो ग़म सारे गायब हो जायें, एैसा कोई जाम न दो रात की बेहोशी का तुम………………… दर्द बहुत मिलते हैं दिन में, रात को मुर्छा आ जाती बंजर में हरियाली भर दे, एैसी बरखा आ जाती शाम से सब सो जाते हैं, एैसा कह के रूलाओ […]

गीत/नवगीत

अब है संसार को रोना…….

अस्त्र शस्त्र सब धरे रह गये, कुछ भी काम न आया परग्रहों पर जाने वाला, घर से निकल न पाया हिरणाकष्यप अभिमानी भी, खुद को अमर वो मानता था कोई नरसिंह भी आयेगा, इसे नही वो जानता था प्रहलाद की उसने एक न मानी, अब अन्त समझ में आया अस्त्र शस्त्र सब धरे रह…………………………………. कुदरत […]

लेख

चमगादड़ तो एक बहाना है ……

एक बहुत ही प्रचलित कहावत है कि- जो दूसरों के लिये गढ्ढा खोदता है तो खुद ही गढ्ढे में गिरता है! बिल्कुल वैसा ही चीन के साथ हुआ है चीन खुद अपने खोदे हुये गढ्ढे में गिरा गया है और दोषी बता रहा है सॉप और चमगादड़ को। सोंचने वाली बात यह है कि क्या […]

गीत/नवगीत

चार दिन की जिन्दगी है

हर दिन जिन्दगी तेरा एक पत्ता टूट रहा। तेरे संग चलकर एक एक दिन छूट रहा।। काँटे ही बिछे हैं क्या तेरी राहों  में , कितने पहाड़ छुपे हैं तेरी पनाहों में। कहीं तू झील है, कहीं तू सागर के जैसी- कोई पार करता है, कोई यहाँ पर ढूब रहा। हर दिन जिन्दगी…………..एक दिन छूट […]

लेख

तो भला ऐसा कौन करेगा!

सोंचने वाली बात यह है कि जब देश के प्रधानमंत्री धारा 370 और 35ए को हटा सकते हैं तो देश में लगे आरक्षण को हटाने में क्यों हिचकिचा रहें हैं, देश की प्रगति का पथ रोकने में आरक्षण का सबसे अहम योग दान है इसी आरक्षण के कारण अपने सैकडों भारतीय विदेशों में आपने ज्ञान […]

अन्य लेख

सरकार की सौतेली औलाद

सरकार की नौकरी तो सभी करना चाहते हैं! फिर चाहें भी क्यों ना सरकार भी अपने कर्मचारियों को अपनी औलाद की तहर मानती है, मेहनत से कई गुना ज्यादा सभी को भुगतान भी करती है और होली, दिवाली, अन्य तीज त्यौंहारों पर उपहार स्वरूप कुछ न भेंट ही करती रहती है। किसी ने खूब ही […]

गीत/नवगीत

इसरो पर संतोष हुआ

चांद पे अपना चकोर गया तो, देख के वो मदहोस हुआ दुनिया दिवाना समझ है बैठी, कहती वो बेहोस हुआ देख के वो मदहोस हुआ……………………. जिस दर से दुनिया डरती थी, दीदार चकोर ने वहां किया जहां सांसे सबकी थमती थी, इजहार चकोर ने वहां किया धडकन पर काबू नही रहा, सदियों में पहली बार […]

गीत/नवगीत

भारत में पाक मिला देगें………

दहसत गर्दों की खैर नही, नापाक इरादे मिटा देगें अमन कहीं जो छीनेंगें, भारत में पाक मिला देगें कदम वीर सपूतों के, अब पीछे हटने वाले नही छुपकर वार जो करते हैं, शेर वो हमने पाले नही घर में घुस कर मारेगें, लाहौर हो या कराची हो तुम कीचड जहां उछालोंगे, हम कमल वहीं खिला […]

गीतिका/ग़ज़ल

तू वक्त को थाम नही सकता———

चाहे जितना दौड़ यहां ले ! तू मौत से भाग नही सकता। थक जायेगा जिस क्षण में ! तू सांसे मांग नही सकता।। चाहे जितना दौड़……………. ये मेरा है वो तेरा है ! ये अपने वो पराये हैं ! सब आयेंगे दर पे तेंरे – तू कुछ जान नही कसता।। चाहे जितना दौड़……………. रोते रोते […]