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  • सुनामी आ गई-

    सुनामी आ गई-

    मुसलसल बरसात का सिलसिला जारी रहा जिस पल………….. पलकों में भी सावन की सौगात आ गई इनायत औ गुनाहों ने संग में कदम रखा तरबतर दुनियां हुई, सुनामी आ गई मुसलसल बरसात……………. ढूंढते हैं सु कहीं...

  • बबूल के फूल

    बबूल के फूल

    जहां एक ओर अपना भारत नई विकास की गााथा गानें के लिये आतुर दिख रहा है वहीं अगर इसके दूसरे पहलू पर नजर डाली जाये तो अभी से ही बहुत सारी पूरानी परंपराओं को लोग भूल...

  • थाली का बैंगन

    थाली का बैंगन

    पता नही एक बात हमारी समझ में क्यों नहीं आ रही है ? क्या मैं अभी समझदार नही हुआ हूं ? या ओ बात मेरी समझ के बाहर है ? लगभग 30 वर्षों से एक तिलिस्म...





  • जहाज उड़ गए

    जहाज उड़ गए

    मेरे भी कई जहाज पानी में चलते थे। चांद और सितारे मेरे आंगन में पलते थे।। मिट्टी के खिलौने वो, कोहिनूर से कम न थे खुशहाल थी वो दुनियां, कहीं भी गम न थे। कागज के...