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  • अब घाटी नहीं कराची तक…

    अब घाटी नहीं कराची तक…

    बार बार ललकार रहा, पहरेदारों को मार रहा क्यों जवाब नहीं उसको देते,जो बांछे अपनी संवार रहा। बार बार ललकार रहा ………….. क्यों जाया आंसू हो जाते, क्यों करूणक्रंदन भूले हो अब वक्त नहीं समझाने का,...