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  • जिंदगी

    जिंदगी

    कभी हंसती , कभी रोती , कभी तू मुस्कुराती है कभी खुलकर तू गाती है , कभी तू गुनगुनाती है तू जैसी भी है सुन ऐ जिंदगी हरदम लुभाती है ।। कभी गम के हैं साये...

  • सिफारिशी पत्र

    सिफारिशी पत्र

    रमण भारती एक कंपनी में ऊंचे ओहदे पर कार्यरत था । कई साल बाद एक बार फिर उसका तबादला उसके गृहनगर ‘ राजनगर ‘ में ही हो गया था । घर लौटते हुए रास्ते में एक...



  • मदद की हकदार

    मदद की हकदार

    असलम बैंक से वापस आ रहा था । खाते में व्याज के रूप में मिली रकम लगभग नौ सौ रुपये उसने नगद निकलवा लिया था । ये वो रकम थी जो उसकी धार्मिक मान्यता के अनुसार...



  • कलियुग

    कलियुग

    पंडित कमलाकर जी घर से घाट की तरफ बढ़ रहे थे । सुबह की बेला थी । घाट पर नदी में नहा धोकर किनारे बने मंदिर में पूजा पाठ करना उनकी दैनिक दिनचर्या थी । घाट...