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  • फिजूलखर्ची

    फिजूलखर्ची

    चिलचिलाती धूप में लोगों की बडी भीड़ अपने प्रिय नेता को सुन रही थी । रैली में उमड़ी भीड़ से गदगद नेताजी का उत्साह चरम पर था । उन्होंने मंच से दहाड़ना शुरू किया ,” भाइयों...


  • चिंता के बादल

    चिंता के बादल

     सुबह की बेला में ओस की बूंदें इंद्रधनुषी छटा बिखेर रही थीं। कभी भारी बारिश तो कभी ओलावृष्टि जैसे कुदरत की मार की वजह से भारी कर्ज के बोझ तले दबे रमेश को प्रकृति की सुंदरता...

  • भाषण

    भाषण

    विधुर हरिया बच्चों का बिलखना बरदाश्त नहीं कर पाया और हाथ में घड़े लेकर चिलचिलाती धूप में पानी की तलाश में निकल पड़ा । पानी के अभाव में आज उसका चुल्हा ठंडा ही रह गया था...

  • किसके लिए ?

    किसके लिए ?

    रामलालजी सोसायटी में नए नए रहने आये थे ।  सोयायटी से बाहर जाते समय सदस्यों को विंग का ग्रिल वाला दरवाजा बंद करके बाहर जाना होता था ताकि कोई आवारा कुत्ता या जानवर सीढ़ियों के नीचे...

  • इंसान

    इंसान

    शहर में अचानक दंगे भड़क उठे । दो गुटों में मारपीट के बाद हालात बेकाबू होते देख प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया । समीर अपने बेटे के लिए चिंतित था जो शहर के दूसरे छोर पर अपने...

  • कलम और तलवार

    कलम और तलवार

    सभी सिपाही हैं लेकिन ,  सब रखते हैं तलवार नहीं कलम हाथ रखकर भी लड़ते इससे है इनकार नहीं बिना जोश के जंग लगेगी वीरों की समशिरों में बिना कलम के धार न होगी रखवालों के...

  • इंसान का बच्चा

    इंसान का बच्चा

    चश्मा माथे पर चढ़ाए वह थुलथुल काया विदेशी नस्ल के पामेरियन प्रजाति के पिल्ले को अपनी गोद में लिए हुए बड़ी अदा से अपनी वातानुकूलित कार से बाहर निकली । पिल्ले के बालों को सहलाकर उसे...

  • निःशब्द

    निःशब्द

    ” क्या हुआ माँ ? ये भाभी जी कहाँ जा रही हैं ? ”  ” अब तेरे भैया रहे नहीं ! अब यह विधवा यहां क्या करेगी ? जा रही है अपने भैया के पास ।...