लघुकथा

शराब बंदी

सुखिया रोज की तरह शराब के नशे में झूमते हुए अपनी झुग्गी के समीप पहुँचा । व्यग्रता से उसका इंतजार कर रही ललिया ने उसे सहारा दिया और झुग्गी में नीचे बिछे बिछौने पर उसे सुला दिया । कमीज की जेब टटोलकर हाथ में आए सौ सौ के दो नोट अपनी अंटी में खोंसते हुए […]

बोधकथा

भगवान का घर

  वैकुंठ लोक में भगवान श्री राम कुछ चिंतित मुद्रा में चहलकदमी कर रहे हैं । बगल में ही खड़े भ्राता लक्ष्मण व माता सीता उनसे कई बार उनकी चिंता का कारण पूछ चुके हैं लेकिन भगवान श्री राम उनकी तरफ कोई विशेष ध्यान दिए बिना सिर झुकाए चिंता में डूबे बस चहलकदमी किये जा […]

कविता

श्री राम हनुमान युद्ध (3)

साथियों नमस्कार ! आज पेश है श्री राम हनुमान युद्ध प्रसंग पर आधारित कविता की अंतिम कड़ी 🙏 श्री राम हनुमान युद्ध (3) करके नमन पूज्य गुरुवर को राम ने शर संधान किया सम्मुख कपि थे ,हाथ जोड़कर प्रभु को फिर प्रणाम किया रामनाम का जाप ही करते कपि ने शीष झुकाया है सम्मुख जाके […]

कविता

श्री राम हनुमान युद्ध ( 2)

कविता अधिक लंबी होने की वजह से आपने कल इसका प्रथम खंड ही पढ़ा था , आज पढिये दूसरा खंड 🙏  💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 श्री राम हनुमान युद्ध (2) ————————– गुरु की आज्ञा पालन को प्रभु तज के निकले अपना धाम धनुष हाथ ले विकट रूप धर पूरा करने अपना काम देव यक्ष गंधर्व सहित सब चिंतातुर […]

ब्लॉग/परिचर्चा

लीला तिवानी जी – एक विलक्षण व्यक्तित्व

आज 10 सितम्बर है । हर तारीख इतिहास में एक विशेष महत्व रखती है । 10 सितम्बर के साथ भी ऐसा ही है । 10 सितम्बर को ही प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी और वरिष्ठ भारतीय राजनेता पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त जी का भी जन्मदिन है । वे उत्तर प्रदेश राज्य के प्रथम मुख्य मन्त्री और भारत […]

कविता

श्री राम हनुमान युद्ध (भाग -1)

सुनो , सुनाता हूँ किस्सा ये , लेकर के श्री राम का नाम क्यों कहते हैं लोग बड़ा है राम से भी प्रभु राम का नाम … लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम अयोध्या आए थे ग्रहण सिंहासन को करके वह राजा राम कहाए थे दूध दही की नदियाँ बहती रामराज था देश में प्रजा […]

गीत/नवगीत

मैं तेरी बेटी हूँ

ना मारो ना माँ ,मैं तेरी बेटी हूँ दुःख की ना समझो ,मैं सुख की पेटी हूँ मैं तेरी बेटी हूँ … मैं सुख की पेटी हूँ … ना मारो ना माँ मैं तेरी बेटी हूँ ….. मैं ना रही तो ,किसको गुड़िया बुलाओगी अपना अक्स फिर ,किसमें तुम दिखलाओगी तेरे लहू का हूँ माँ […]

लघुकथा

गाँव और शहर

गाँव और शहर ——————- ” अरे रमेश ! कहाँ जा रहे हो ? ” ” शहर जा रहा हूँ । यहाँ गाँव में रहा तो तुम्हारी तरह ऐसे ही दिन भर मिट्टी में सना रहना पड़ेगा । मिट्टी से परहेज नहीं मुझे भी , लेकिन क्या मिलता है इतनी मेहनत करके ? शहर की जिंदगी […]

कविता

जीवन

जीवन तो तरुवर का है   जो छांह पथिक को देता है फल देकर मीठे जग की   वह क्षुधा शमन भी करता है जलता है दीपक जग का      अंधियारा दूर भगाने को काँटों में खिलकर सुमन      सिखलाता है मुस्काने को अँगारे सा जलता है रवि ,     तमस जगत […]

कविता

चंदा और चकोर

चंदा और चकोर ——————– तू चंदा मैं चकोर प्रिये दिन रात तकूँ तेरी ओर प्रिये तू बन के पतंग उड़े जग में थामे मैं रहूँ तेरी डोर प्रिये चंचल चितवन मदमस्त नयन और होंठ हैं जैसे पुष्प प्रिये गालों पे है सुर्खी मेरे लिए नैनों में शरम की डोर प्रिये निर्मल कोमल काया तेरी खिंचे […]