लघुकथा

गलती किसकी ?

उस बेतरतीब से घर में ऐशोआराम की सभी सुविधाएं मौजूद थीं लेकिन कोरोना के कोहराम के चलते सभी गतिविधियाँ जहाँ की तहाँ थम गई थी । गृहस्वामी भारी चिंता में पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए था । गृहस्वामिनी चिंतातुर नजरों से भूखे सोये हुए अपने पाँच वर्षीय बेटे को निहार रही थी । उसको […]

लघुकथा

असली देशभक्त

शराब की दुकान के सामने से शुरू हुई कतार के अंतिम सिरे तक पहुँचने में गुप्ताजी को लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी । बड़ी शान से वह भी कतार में खड़े हुए । कतार आगे सरक तो नहीं रही थी अलबत्ता अपने पीछे कतार में लंबी भीड़ देखकर उनको थोड़ी खुशी हुई […]

लघुकथा

इंसान

मजदूरों से खचाखच भरी ट्रक मुम्बई से निकल कर मध्यप्रदेश से गुजर रही थी । भेड़ बकरियों की तरह ठूंसे ये मजदूर भीषण गर्मी का प्रकोप भी झेल रहे थे । कोरोना जैसी भयानक महामारी के साथ ही भूख की दोहरी मार सहते मजदूरों के मन में अपने गाँव , अपने परिजनों के पास पहुंचने […]

लघुकथा

आत्मनिर्भर

आत्मनिर्भर —————-  देश के लाखों मजदूरों की तरह सुनील भी लॉक डाउन की वजह से अपनी दिहाड़ी गंवा चुका एक मजदूर था । श्रमिकों के लिये चलाये जानेवाले ट्रेन में टिकट पाने की आस में वह भोर में ही शहर के एक नामी एजेंट की दुकान पर पहुँच गया था जो उसे टिकट निकालकर दे […]

गीत/नवगीत

सार्थक गीत

सार्थक गीत —————— नाम हो सार्थक , काम हो सार्थक सार्थक हो पहचान आओ हम सब मिलकर अपना अपना बढ़ा लें ज्ञान वाणी मधुरम , विनम्रता ही हो अपनी पहचान तुम भी सीखो, मैं भी सीखूँ ना रखना अभिमान……! कड़ी कड़ी मिलकर बनती है अद्भुत एक जंजीर ज्ञान बढ़ा लें , मान बढ़ा लें कर […]

लघुकथा

विरोध प्रदर्शन

विरोध प्रदर्शन ————— एक गोदाम में मोमबत्तियों के एक समूह की आपस में बातें हो रही थीं । एक मोमबत्ती ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा ,” भला हो इस कोरोना का , जिसने सारे असल दरिंदों को घरों में कैद कर दिया है , नहीं तो अब तक न जाने कितनी निर्भयाओं की […]

लघुकथा

दहशत

पूरी दुनिया में अपनी दहशत कायम करते हुए कोरोना ने भारत की तरफ रुख किया । दहलीज पर ही बूढ़ी लेकिन मजबूत महिला को देखकर कोरोना चौंका । उसकी असमंजस को महसूस कर वह बुढ़िया मुस्कुराई ” तुम इस गुमान में न रहो कि अन्य देशों की तरह तुम यहाँ भी तबाही मचा लोगी । […]

भजन/भावगीत

दर्शन दे दो हे …..

दर्शन दे दो हे ….. दर्शन दे दो हे त्रिपुरारी , डमरूधारी की जग पे है छाई बीमारी ….. त्राहि त्राहि करती …. त्राहि त्राहि करती अब तो दुनिया सारी की जग पे है छाई बीमारी…. ! दर्शन दे दो हे त्रिपुरारी ……! गाँव शहर सब ठप्प पड़े हैं , विपदा कैसी आई .. बाबा […]

लघुकथा

इंसानों का मुल्क

  ” अरे भाईसाहब ! क्या हुआ ? ये अचानक कहाँ जाने की तैयारी है ? ” ” क्या बताऊँ भाईसाहब ! चार साल हो गए इस मुल्क की आबोहवा में साँस लेते हुए । इस मुल्क की माटी से हमें प्यार हो गया है , लेकिन लगता है अब हमें जाना ही होगा यहाँ […]

कहानी

जैसी करनी वैसी भरनी

कैलाश पर्वत पर विराजमान महादेव जी से एक दिन माता पार्वती जी बोलीं ,” हे नाथ ! माता आदिशक्ति की अनुकंपा से आप त्रिदेवों ने इस ब्रम्हांड और तत्पश्चात भूलोक की संरचना की जिसे नदियों , पहाड़ों , वनों और उनमें विचरण करते तरह तरह के जीव जंतुओं से आबाद किया ! लेकिन ये मनुष्य […]