कविता

जानेवाला साल

जानेवाले साल चला जा , आँसू मेरे लेता जा छिन लिया जो मेरी खुशियाँ अब तो वापस देता जा अब ना हों आँखों में आँसू गम की कोई बात न हो ऐ दिल अब तू कभी न रोना अब कोई आघात न हो जख्म दिए जो तूने दिल को मरहम भी तो देता जा जानेवाले […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग – 63 )

धूल भरी सड़क में गड्ढों के बीच राह तलाशते हुए जमनादास की कार ने जब सुजानपुर में प्रवेश किया सूर्य भी अपने गंतव्य तक पहुँच चुके थे । दूर कहीं क्षितिज पर फैली हुई लाली शीघ्र ही आनेवाले अँधेरे का इशारा कर रही थी । अपने घर के सामने खटिये पर बैठी उदास नजरों से […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग – 62 )

रामू काका के मुँह से सुजानपुर और फिर मास्टर सुनते ही जमनादास अधीरता से बंगले के मुख्य दरवाजे की तरफ भागा ! बाहर मुख्य दरवाजे के बगल में बने छोटे से दड़बेनुमा कक्ष में मास्टर रामकिशुन बैठे हुए थे । जमनादास को देखते ही मास्टर जो कि एक बेंच पर बैठे थे उठ खड़े हुए […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग – 61 )

परबतिया के जाने के बाद साधना के होठों पर आई हुई मुस्कान ने एक बार फिर खामोशी की चादर ओढ़ ली थी । दिल में बेपनाह दर्द को समेटे हुए वह खामोशी से जुट गई रसोई में । बाबूजी को जल्दी भोजन करने की आदत थी । उसे खुद तो भूख नहीं लगी थी लेकिन […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग -60 )

सेठ अम्बादास अपने वादे के मुताबिक दूसरे दिन फिर आये थे । उनके साथ उनका लीगल एडवाइजर गुप्ताजी भी थे । सेठ शोभालाल के सामने उन्होंने अपनी सभी कंपनियों के 30 प्रतिशत शेयर शोभालाल व बृन्दादेवी तथा 30 प्रतिशत शेयर सुशीला के नाम करके आवश्यक कागजात तैयार करने के निर्देश दिए । काफी देर तक […]

अन्य

उन दिनों की बात

साथियों ! नमस्कार ! नेहा जी के अनुरोध पर विचार करते हुए यह तय किया कि कुछ मैं भी लिख दूँ । हालाँकि यह दिए गए विषय से कोसों दूर है लेकिन फिर भी लिखने का मकसद है कि नई पीढ़ी के लोगों को उन दिनों की सामाजिक मर्यादा , शुचिता व परंपराओं के बारे […]

कहानी

गंगा जमुनी तहजीब

सुबह का समय ! एक रेस्तरां का दृश्य जिसमें बेतरतीब बिछी कुछ मेजों पर बैठे कुछ लोग नाश्ता कर रहे हैं । रेस्तरां में प्रवेश करने की जगह पर एक काउंटर है जहाँ रेस्तरां का मालिक बैठकर सब पर अपनी नजर बनाए हुए है । गंदे से कपड़े पहने दो वेटर मेज के सामने की […]

कविता

प्रेम

तुम सामने बैठी हो तो, मैं और क्या देखूँ , नजरों को तुम बिन , और कुछ भी भाता नहीं है  दिल चाहता है प्यार करूँ , तुमको जी भर के  मुश्किल बड़ी ये है कि , प्यार आता नहीं है  जी चाहता है हरदम तू , मुस्काती ही रहे  पल भर को अक्स , […]

लघुकथा

जानवर कौन ?

वह एक पशु चिकित्सक थी ! पशुओं के प्रति प्रेम और करुणा ने उसे पशु चिकित्सक का कैरियर अपनाने के लिए प्रेरित किया था । वह अक्सर राह चलते हुए किसी भी घायल जानवर की मरहम पट्टी और दवाई कर देती थी । इससे मिलनेवाले आत्मिक खुशी की चाह में उसे अपने आर्थिक नुकसान की […]

कविता

इश्क सूफियाना

एक सूफियाना प्रयास —————————– ये इश्क और इश्क की दास्तां भी अजीब है कल तक जो थे अजनबी ,आज दिल के करीब है इश्क की दौलत से जिसे रब ने नवाजा वही तो है अमीर , बाकी दुनिया गरीब है इश्क है खुदा से , जुदा हो न जाना ऐ दिल इश्क ही इबादत और […]