लघुकथा

इंसानों का मुल्क

  ” अरे भाईसाहब ! क्या हुआ ? ये अचानक कहाँ जाने की तैयारी है ? ” ” क्या बताऊँ भाईसाहब ! चार साल हो गए इस मुल्क की आबोहवा में साँस लेते हुए । इस मुल्क की माटी से हमें प्यार हो गया है , लेकिन लगता है अब हमें जाना ही होगा यहाँ […]

कहानी

जैसी करनी वैसी भरनी

कैलाश पर्वत पर विराजमान महादेव जी से एक दिन माता पार्वती जी बोलीं ,” हे नाथ ! माता आदिशक्ति की अनुकंपा से आप त्रिदेवों ने इस ब्रम्हांड और तत्पश्चात भूलोक की संरचना की जिसे नदियों , पहाड़ों , वनों और उनमें विचरण करते तरह तरह के जीव जंतुओं से आबाद किया ! लेकिन ये मनुष्य […]

लघुकथा

कोरोना की हार

  ” अरे शर्मा जी ! आप बिल्कुल अँधेरे में हो ! क्या बात है ? क्या बिजली चली गई ? ” ” अजी नहीं वर्मा जी ! कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपने प्रिय प्रधानमंत्री जी के हाथ मजबूत कर रहा हूँ । तुमने सुना नहीं क्या उनका भाषण ? ” ” सुना तो […]

कविता

सात का फेर ( मेरा नजरिया )

सात अंक का फेर है क्या , यह तो ईश्वर ही जाने सात जन्म के साथी को साथी पल में पहचाने लेकर फेरे सात साथ रहने की खाते कसमें एक जन्म भी साथ न रहते मन रखते ना वश में ऐसे भी जातक हैं जग में निष्ठा से जीते हैं खुशी खुशी हर गम का […]

लघुकथा

खौफ – भूख का

खौफ – भूख का ——————– लॉक डाउन की घोषणा हो चुकी थी । आज तीसरा दिन था । कंधे पर बैग , सिर पर पोटलियाँ और हाथों में नन्हें मुन्ने बच्चों का हाथ थामे लोगों का हुजूम सड़क से जाते हुए देखकर अमर का क्रोध के मारे बुरा हाल था । ” ऐसे जाहिलों की […]

लघुकथा

भूख का सम्मान

सारी बीमारियों के वायरस आज एक जगह इकट्ठा हुए थे। आज से उनका विशेष अधिवेशन शुरू हुआ था जिसमें सदी की सबसे खतरनाक बीमारी का ताज किसी एक बीमारी के सिर पर सजना था । अधिवेशन शुरू हुआ । हैजा , चेचक , मलेरिया तथा पोलियो के बाद एड्स जैसी आधुनिक बीमारियों ने भी बढचढकर […]

लघुकथा

संतोष

” अजी सुन रहे हो कलुआ के बाबू ? सरकारी बंदी का आज पाँचवां दिन है और घर में अनाज का एक दाना भी नहीं है । अभी तो और सोलह दिन हमें बिताने हैं इसी तरह झुग्गी में ! ” परबतिया के स्वर में वेदना झलक रही थी । ” मुझे भी इसकी चिंता […]

लघुकथा

आतंक का दंश

आतंक का दंश —————- कालिया नाग बौखलाया हुआ था । पड़ोस के मोहल्लों में लोगों के घरों में घुसकर छिप जाता और मौका मिलते ही उन्हें डस लेता । चारों तरफ उसका खौफ छाया हुआ था । रमेश ने मौके की नजाकत को देखते हुए अपने पिता चौधरी रामलाल को पहले ही आगाह कर दिया […]

मुक्तक/दोहा

मासूम दिल

कौन कहता है मर्द को दर्द नहीं होता ? दर्द भी होता है और सतरंगी सपनों का अहसास भी होता है शर्मोहया की लाली भी झलकती है और प्यार का सागर भी उमड़ता है गम की बदली कभी घुमड़ती है तो कभी खुशियों से दिल उछलता है बैर , प्रीति , योग , वियोग उसके […]

उपन्यास अंश

ममता की परीक्षा ( भाग – 64 )

साधना को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुए लगभग एक महीने का समय हो चला था । जीता जागता खिलौना पाकर साधना बेहद खुश थी और इस उम्मीद में थी कि अब अचानक किसी दिन गोपाल को लेकर जमनादास उनके सामने आ खड़ा होगा । वो दिन उसके लिए कितनी खुशी का होगा । इतनी खुशियाँ […]