लघुकथा

रोटी

  वह रोटी ही थी जिसकी तलाश में रामू अपना घर परिवार व गाँव छोड़कर शहर की शरण में आया था । लेकिन यह उसका दुर्भाग्य ही था कि अभी शहर में आए चंद दिन भी नहीं हुए थे, कोरोना के चलते पूरे देश में लॉक डाउन की घोषणा हो गई । चंद रुपये जो […]

कविता

हर रंग हुआ बदरंग

हर रंग हुआ बदरंग धरा पर ,         विपदा है ऐसी छाई सावन की घटा हरियाली भी इस मन को बिल्कुल ना भाई नहीं कजरी गूँजी गाँवों में ना लगे महावर पाँवों में हर दिल में तड़प है अब बाकी हैं जख्म हरे हर घावों में झूलों को तरसी हर डाली अब […]

लघुकथा

जैसा बोओगे , वैसा काटोगे

‘ जो बोओगे, वही काटोगे ‘ —————————— धरती का कोई भी कोना कुदरती विनाशलीला से अछूता न था । कई महीनों तक कोरोना जैसी घातक महामारी का दंश झेलने के साथ ही अब कई देश बाढ़ की विभीषिका झेलने को अभिशप्त थे तो वहीं कुछ देश अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे थे । […]

लघुकथा

आत्मनिर्भर

  कई दिनों की भारी बरसात की वजह से वह पूरा क्षेत्र जलमग्न हो चुका था । नजदीक ही बहनेवाली नदी अपने किनारे तोड़कर आसपास के गाँवों में जर्जर घरों को लीलती हाहाकार मचाती जलप्रलय जैसा दृश्य उपस्थित कर रही थी । लोग अपने अपने घरों की छतों पर खड़े भोजन व पानी की चिंता […]

लघुकथा

काँटों वाला पेड़

गाँव की सीमा पर सरकारी जमीन पर उग आए उस विशाल बबूल के पेड़ से पूरा गाँव त्रस्त था । सड़क के किनारे शान से खड़ा वह पेड़ सड़क पर अक्सर काँटों की बरसात कर दिया करता था और बेचारे ग्रामीणों के पैर में धँसे काँटों से उनका लहूलुहान पैर देखकर वह खुशी से लहलहा […]

लघुकथा

भविष्य

युवा शिक्षक रोहित जल्दी जल्दी अपनी कक्षा की तरफ जा रहा था कि पांडेय जी ने उसको आवाज लगाई ! पांडेय जी वरिष्ठ थे सो रोहित उनके पास गया । पांडेय जी बोले ,” और सुनाओ ! नए नए आये हो स्कूल में ! अपना थोड़ा परिचय भी तो दो ! आखिर हम सब एक […]

कहानी

संन्यासी महाराज

निःसंतान राजा की अचानक मृत्यु हो गई ! दरबारियों में व राज्य की प्रजा में शोक की लहर दौड़ गई । सूनी राजगद्दी को देखते हुए प्रधान बहुत चिंतित थे । आखिर गद्दी किसे सौंपी जाए ? यह यक्ष प्रश्न सभी के सामने था । सभी दरबारियों की सहमति से इसपर कोई फैसला करने के […]

कविता

दरिंदगी

दरिंदगी ———- मैं भूखी प्यासी बेबस लाचार इंसानों से थी मदद की दरकार पेट में पल रहा था एक नव अंकुर मेरे मन में उमंगें मचल रही थीं बहुतेरे भूख प्यास से व्याकुल आ गई थी मैं इंसानों की बस्ती में सवार हो गई थी मैं विश्वास अविश्वास की कश्ती में इंसानों से डरना चाहिए […]

लघुकथा

गलती किसकी ?

उस बेतरतीब से घर में ऐशोआराम की सभी सुविधाएं मौजूद थीं लेकिन कोरोना के कोहराम के चलते सभी गतिविधियाँ जहाँ की तहाँ थम गई थी । गृहस्वामी भारी चिंता में पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए था । गृहस्वामिनी चिंतातुर नजरों से भूखे सोये हुए अपने पाँच वर्षीय बेटे को निहार रही थी । उसको […]

लघुकथा

असली देशभक्त

शराब की दुकान के सामने से शुरू हुई कतार के अंतिम सिरे तक पहुँचने में गुप्ताजी को लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ी । बड़ी शान से वह भी कतार में खड़े हुए । कतार आगे सरक तो नहीं रही थी अलबत्ता अपने पीछे कतार में लंबी भीड़ देखकर उनको थोड़ी खुशी हुई […]