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  • रिश्ते

    रिश्ते

    प्रीत बरसती थी रिश्तों मेंअंगारे क्यों भभक रहे हैं ?बोए हमने फूल यहाँ थेकाँटे फिर क्यों उपज रहे हैं? संस्कार अब विलुप्त हो गएमाँ -बहनें यहाँ लजाती हैं,सरे आम लज्जा लुटने परअपराधिन सी बन जाती हैं।...

  • आँचल

    आँचल

    याद आती है माँ मुझे, तेरे आँचल की छाँव ममता से सँवार के, सिर को सहलाया। शहद से मीठी थी वो, मिर्ची सी तीखी डाँट भी प्यार अपना लुटाके, कनिया पे बिठाया। स्नेह निर्झर बहता माँ...

  • कश्ती

    कश्ती

    आँखों में मेरी सावन पा, मनमीत लुभा कर रूँठ गया। जीवन में प्यासी कश्ती को, हर रोज़ रिझा कर लूट गया। माँझी जिसको समझा मैंने, निकला काग़ज़ की कश्ती वो। पाकर लहरों के आलिंगन, खुद भूला...

  • आया मधुमास

    आया मधुमास

    पीत वसन धारा मधुमासा। पुलकित उर जागी बहु आसा ।। सुरभित सरसों हिय मदमाती। देख तिन्हें अवनि हरषाती।। वन-उपवन में छाई बहार। शारदे! आ जाओ इक बार।। स्वर्ण कलश ऊषा छिटकाई। पीत चुनर खेतन लहराई।। हिम...