Author :

  • तू चल कि तेरी…

    तू चल कि तेरी…

    तू चल कि तेरी हथेलियों को बहुत से पत्थर निचोडने हैं , तू चल की तेरी बेबसी को बहुत से कानून तोडने हैं | सहेगीं तू युँ ही अत्याचार कब तक ? कटेगें युँ तेरे विचार...


  • दहेज-भोजपुरी कहानी

    दहेज-भोजपुरी कहानी

    रामअसरे, काल तिलका पर 25 अदमी अइहंऽ। आज बजार में तिरलोकी मिलल रहलन ह। कहुअन कि रामअसरे से कह दिह 25 आदमी क व्यवस्था बना लिहन। चाचा, ठीक बा। लेकिन हम त खाली दस-बारह आदमी मंगले...

  • कविता

    कविता

    एक धुंधली तस्वीर हूँ मैं छूटता सिरा हूँ एक छोर का लापता सा कोई पता हूँ शायद या हूँ शहर का कोई सुनसान मोड़.. मैं अमावस की शाम हूँ एक टपकते घर की बरसात हूँ हूँ...

  • गजल

    गजल

    रोग जाता ही नहीं कितनी दवा ली हमने माँ के क़दमों में झुके और दुआ ली हमने इस ज़माने ने सताया भी बहुत है मुझको आग ये सीने की अश्कों से बुझा ली हमने जब नजर...

  • बेरोज़गार_आशिक़_

    बेरोज़गार_आशिक़_

    कल रात देर तक जागा था तो सुबह औंधी आँखों से एक ख़ूबसूरत सपना देखे! देखे की, आप हमको जगा रही हो! “उठिए भी! कितना सोते हो?” और हम जानबूझ कर सोने की ऐक्टिंग कर रहे हैं! लीजिए, पंखा भी...

  • तुम_लिखो

    तुम_लिखो

    आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ को बरसात लिखो, जिस से नाराज हो उस शख़्स की हर बात लिखो, जिस से मिलकर भी न मिलने की कसक बाकी है, उसी अंजान शहंशाह की मुलाकात लिखो, जिस्म मस्जिद...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    क्यों पिलाते हो मुझे जाम कोई और फिर देते हो इलज़ाम कोई। ख़ौफ़े रुसवाई से डर जाता हूँ जब भी लेता है तेरा नाम कोई। मेरा अंदाज़ अलग है तुमसे चाहिये मुझको नई शाम कोई ज़िन्दगी...